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कोलकाता के वकील की कहानी: जब प्यार का गिफ्ट बन गया पुलिस केस!

कल्पना कीजिए – आप अपनी पत्नी को खुश करने के लिए एक नया smartphone गिफ्ट करते हैं, और कुछ दिन बाद… धड़ाम! पुलिस आपके दरवाज़े पर खड़ी है। यही हुआ कोलकाता के एक वकील साहब के साथ। सच कहूं तो मेरे जैसे लोगों के लिए तो यह सीधा सीरियल वाला मामला लगता है, लेकिन असलियत बड़ी डरावनी है।

पूरा माजरा कुछ यूं है – वकील साहब ने लोकल मार्केट से एक शानदार फोन खरीदा (वो भी sealed बॉक्स में!), लेकिन अब गुजरात पुलिस का दावा है कि यही फोन किसी साइबर क्राइम में इस्तेमाल हुआ था। IMEI नंबर मैच कर गया और बस… केस खुल गया। है न मजेदार?

जब नया फोन निकला ‘रिफर्बिश्ड’

अब यहां सबसे ज़हर तो यह है कि दुकानदार ने इन्हें पक्का विश्वास दिलाया था कि फोन बिल्कुल नया है। लेकिन असलियत? वो तो रिफर्बिश्ड माल था! मतलब किसी और के हाथों से गुजरकर, किसी और के अपराध में इस्तेमाल होकर, वापस मार्केट में आ गया। सोचिए, आप तो बस पत्नी को खुश करना चाहते थे, और यहां…

सच कहूं तो मुझे तो सबसे हैरानी इस बात पर हुई कि गुजरात पुलिस ने इतनी दूर से IMEI ट्रैक कर लिया। टेक्नोलॉजी ने सचमुच पुलिसिंग को बदल दिया है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे फोन मार्केट में आते कैसे हैं?

पुलिस वालों ने क्या किया?

तो जनाब, जब पुलिस को पता चला कि यह फोन उस पुराने साइबर फ्रॉड केस से जुड़ा है, तो उन्होंने तुरंत वकील साहब और उनकी पत्नी से पूछताछ की। लेकिन अच्छी बात यह रही कि जब उनकी मासूमियत साबित हो गई, तो पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। हालांकि फोन तो उनके हाथ से गया ही।

अब निशाना है वो दुकानदार जिसने यह गोरखधंधा किया। पुलिस का कहना है कि यह या तो चोरी का माल था, या फिर किसी साइबर गैंग ने इस्तेमाल करके बेच दिया। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कितने और फोन बाजार में घूम रहे होंगे?

वकील साहब का गुस्सा और एक्सपर्ट की सलाह

वकील साहब तो बिल्कुल हिल गए। उनका कहना है – “हम तो बस एक नॉर्मल गिफ्ट देना चाहते थे, और यहां पुलिस के चक्कर में फंस गए!” सच में, कोई भी होता तो परेशान हो जाता।

इधर साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह सुनिए: “भाई, अब phone खरीदते वक्त IMEI चेक करना और original बिल लेना कोई ऑप्शन नहीं, जरूरत बन गया है।” सच कहूं तो मैंने तो अब तक कभी IMEI नंबर चेक ही नहीं किया – आपने किया?

आगे क्या होगा? और क्या सीख मिली?

अब तो दुकानदार के खिलाफ केस दर्ज होगा। पुलिस यह पता लगाएगी कि यह फोन आया कहां से? चोरी का माल था या साइबर गैंग का टूल?

लेकिन हम सबके लिए सबक साफ है:
1. हमेशा authorized दुकान से ही खरीदें
2. IMEI चेक करना न भूलें
3. बहुत सस्ते ऑफर पर शक करें

अंत में एक बात – डिजिटल युग में अब सतर्कता ही सुरक्षा है। वरना पता भी नहीं चलेगा और आप किसी केस का हिस्सा बन जाएंगे। क्या पता, अभी आपके हाथ में जो फोन है, वो किसके किस्से जानता हो!

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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