रूस ने किया धोखा? भारत का 5वीं पीढ़ी का जेट सपना टूटा, पर सवाल ये है कि F-22 ने Su-57 को बिना फायर किए कैसे पछाड़ दिया?
ये कहानी है एक सपने के टूटने की… वो भारत का सपना जो 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट (FGFA) के साथ उड़ान भरना चाहता था। लेकिन रूस? उसने तो हमें ठेंगा दिखा दिया! असल में देखा जाए तो ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट फेल होने की बात नहीं है, बल्कि एक सबक है – रक्षा तकनीक में दूसरों पर निर्भर रहने का खतरा। और सबसे दिलचस्प बात? अमेरिका का F-22 Raptor, रूस के Su-57 को बिना एक भी मिसाइल फायर किए ही मात दे देता है। कैसे? चलिए समझते हैं।
दस साल की दोस्ती, पर…!
भारत और रूस का रिश्ता तो वैसे तकनीकी गठजोड़ से भी पुराना है। हमारे मिग-29 और सुखोई-30MKI इसकी गवाही देते हैं। 2007 में जब FGFA प्रोजेक्ट पर हाथ मिलाया गया, तो लगा था कि अब भारत भी 5वीं पीढ़ी के जेट्स के क्लब में शामिल हो जाएगा। अरबों डॉलर खर्च किए गए, सपने बुने गए… पर कहानी का अंत कुछ और ही निकला।
समस्या क्या थी? असल में Su-57 में वो दम ही नहीं था जो F-22 या F-35 में था। स्टील्थ टेक्नोलॉजी? औसत। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर? बस ठीक-ठाक। और तो और, 2018 का वो सिमुलेशन टेस्ट तो जैसे पूरी कहानी बयां कर देता है – F-22 ने Su-57 को बिना फायर किए ही ‘मार’ दिया! ये सुनकर ही भारतीय वायुसेना के होश उड़ गए होंगे।
धोखे की पोल खुली
पर सबसे बड़ा झटका तो तब लगा जब पता चला कि रूस हमें सिर्फ ग्राहक समझ रहा था। तकनीक शेयर करने का नाम सुनते ही उनके कान खड़े हो जाते थे। हमारा मकसद तो तकनीक सीखना था, पर रूस का मकसद सिर्फ एक और विमान बेचना। ईमानदारी से कहूं तो, ये हमारे लिए एक कड़वा सच था।
अब क्या? अब तो हमें अपने AMCA पर ही भरोसा करना होगा। 2025 तक इसका प्रोटोटाइप उड़ान भर सकता है। और हां, फ्रांस के Rafale या अमेरिका के F-35 भी विकल्प हैं। पर सबक यही है कि अब हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। वैसे भी, जो दूसरों के सहारे उड़ता है, उसके पंख कब कट जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता। सच ना?
एक बात तो तय है – इस पूरे प्रकरण ने हमें आत्मनिर्भर होने का महत्व समझा दिया है। अब देखना ये है कि हम इस सबक से कितना सीख पाते हैं। क्योंकि जैसा कि हमारे दादाजी कहते थे – “अपना हाथ जगन्नाथ!”
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अरे भाई, ये रूस वाला मामला तो हल्ला मचा रहा है न? सब जानना चाहते हैं कि आखिर Su-57 प्रोजेक्ट से भारत ने हाथ क्यों खींच लिया। तो चलिए, बिना गिले-शिकवे के बात करते हैं।
1. भारत ने Su-57 को अलविदा क्यों कहा?
सीधी बात करूं? हमें जो चाहिए था, वो रूस दे नहीं पाया। असल में, ये जेट हमारी expectations के आगे बिल्कुल फीका पड़ गया। स्टील्थ टेक्नोलॉजी? नाम मात्र की। एडवांस्ड एवियोनिक्स? वो भी ठीक-ठाक नहीं। F-22 जैसे 5th-gen जेट्स के सामने तो ये बच्चा ही लगता है। सच कहूं तो पैसे की बर्बादी होती।
2. F-22 ने Su-57 को बिना गोली चलाए कैसे पछाड़ दिया?
अरे यार, यहां तो बिल्कुल डेविड और गोलियत वाली कहानी हो गई! F-22 की स्टील्थ कैपेबिलिटीज़ इतनी ज़बरदस्त हैं कि उसने Su-57 को तो देख लिया, लेकिन हमारा रूसी दोस्त उसे ट्रैक ही नहीं कर पाया। सोचो न, दुश्मन को देख भी न पाओ तो लड़ाई कैसे लड़ोगे? यही तो असली टेक्नोलॉजी का फर्क है।
3. क्या अब भारत अपना खुद का 5th-gen जेट बना रहा है?
हां भई हां! और यह कोई छोटा-मोटा प्रोजेक्ट नहीं है। AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) पर काम चल रहा है – पूरा स्वदेशी, पूरा स्टील्थ। DRDO और HAL मिलकर इसे develop कर रहे हैं। पर सच बताऊं? अभी रास्ता लंबा है। लेकिन कोशिश तो करनी ही पड़ेगी न!
4. Su-57 में ऐसा क्या खराब था जो भारत को रास नहीं आया?
लिस्ट लंबी है दोस्त! पहली बात तो स्टील्थ डिज़ाइन – वो भी ऐसा कि रडार पर दिखता रहे। इंजन? वो तो बिल्कुल ‘हैलो, मैं यहां हूं!’ कहता नज़र आता था। वेपन सिस्टम्स? उन पर भरोसा करना मुश्किल। और सबसे बड़ी बात – टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का वादा तोड़ दिया रूस ने। ऐसे में डील टूटना तो तय था।
अंत में सिर्फ इतना – अब हमारी नज़र AMCA पर है। कामयाब होगा या नहीं? वक्त बताएगा। लेकिन कोशिश तो अपनी करनी ही है ना? आपको क्या लगता है?
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com