स्टारबक्स ने उठाया बड़ा कदम: अब कॉर्पोरेट वाले ऑफिस में 4 दिन तो आएँगे ही!
अरे भई, स्टारबक्स वालों ने तो बड़ा दिलचस्प फैसला कर दिया है! जिस कंपनी की कॉफी और काम करने के तरीके की पूरी दुनिया दीवानी है, उसने अब अपने हेडऑफिस वाले कर्मचारियों के लिए नया नियम बना दिया है। और ये नियम? सप्ताह में कम से कम 4 दिन ऑफिस आना ज़रूरी! CEO ब्रायन निकोल ने ये आदेश अक्टूबर 2023 से लागू करने का ऐलान किया है, जो खासकर अमेरिका और कनाडा के कर्मचारियों पर लागू होगा।
देखा जाए तो ये कोविड के बाद के दौर में एक बड़ा बदलाव है। याद है ना वो समय? 2020 में जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब स्टारबक्स जैसी कंपनियों ने WFH (वर्क-फ्रॉम-होम) को हरी झंडी दिखा दी थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। गूगल, अमेज़ॉन से लेकर एप्पल तक – सबने या तो हाइब्रिड मॉडल अपना लिया है या फिर पूरी तरह ऑफिस वापसी का रास्ता दिखा दिया है।
अब सवाल यह है कि स्टारबक्स को ये फैसला क्यों लेना पड़ा? कंपनी का कहना है कि असली मज़ा तो आमने-सामने बैठकर काम करने में ही आता है। टीमवर्क हो, नए आइडियाज़ हों या कंपनी की संस्कृति – ये सब ऑफिस की चारदीवारी में ही बेहतर तरीके से फलते-फूलते हैं। ब्रायन निकोल का मानना है कि इससे कर्मचारियों के बीच का जुड़ाव भी मजबूत होगा। लेकिन सच कहूँ तो, सभी कर्मचारी इस बात से खुश नहीं दिख रहे। कुछ तो WFH के दौरान मिले वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नाराज़ हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय? बिल्कुल मिश्रित। ये फैसला एक तरफ़ तो टीम स्पिरिट को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन दूसरी ओर कर्मचारियों में नाराज़गी भी पैदा कर सकता है। और हाँ, एक बड़ा रिस्क ये भी है – अगर कर्मचारी नाराज़ हुए तो स्टारबक्स को टैलेंट रिटेंशन में दिक्कतें आ सकती हैं। साथ ही, दूसरी कंपनियाँ भी इसके नतीजों को गौर से देख रही होंगी।
तो क्या हो सकता है समाधान? शायद हाइब्रिड मॉडल! जैसे 3 दिन ऑफिस, 2 दिन घर से काम। ऐसा लचीला तरीका शायद दोनों पक्षों को संतुष्ट रख पाए। फिलहाल तो ये देखना दिलचस्प होगा कि स्टारबक्स इस नए नियम के साथ कैसे बैलेंस बिठा पाती है। कर्मचारी खुश रहेंगे या नहीं? कंपनी को फायदा होगा या नुकसान? वक्त ही बताएगा।
यह भी पढ़ें:
स्टारबक्स का यह नया फैसला… सच कहूं तो मुझे थोड़ा हैरानी हुई! आखिरकार, कॉर्पोरेट दुनिया में work-life balance की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन असल में कुछ कंपनियां ही ऐसा कर पाती हैं। अब देखिए न, इस October से शुरू हो रही policy सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है – employees की productivity बढ़ाने के साथ-साथ यह दूसरी companies के लिए एक तरह का wake-up call भी है। मतलब साफ है – अगर स्टारबक्स ये कर सकता है, तो बाकी क्यों नहीं?
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सच में काम करेगा? मेरा मानना है कि flexible work models को adopt करना आसान नहीं होता। एक तरफ तो employees खुश होंगे, पर दूसरी तरफ कंपनी को भी manage करने में चुनौतियां आएंगी। पर यह एक सही दिशा में उठाया गया कदम है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पहली बार work from home का concept आया था।
अब बस इंतज़ार है कि यह experiment कितना successful होता है। और हां, यह देखना भी दिलचस्प होगा कि कौन-कौन सी कंपनियां अब इस राह पर चलती हैं। क्या आपको नहीं लगता कि यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है? सच कहूं तो… मैं तो optimistic हूं!
स्टारबक्स का नया नियम: 4-डे वर्कवीक पर आपके सभी सवालों के जवाब!
स्टारबक्स ने कर्मचारियों के लिए 4-डे वर्कवीक का फैसला क्यों लिया?
देखिए, स्टारबक्स ने यह फैसला कोई अचानक नहीं लिया है। असल में, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में work-life balance की बात सबसे ज़्यादा हो रही है, है न? कंपनी का मानना है कि 4 दिन काम करने से employees को ज़्यादा आराम मिलेगा और वो खुश रहेंगे। और सच कहूं तो, खुश employee मतलब बेहतर productivity – ये तो हम सब जानते हैं!
क्या यह नया नियम सभी स्टारबक्स कर्मचारियों पर लागू होगा?
अरे नहीं भाई! ये बात तो समझनी ज़रूरी है। यह policy अभी सिर्फ corporate वालों के लिए है। जो लोग stores और cafes में काम करते हैं, उनके लिए तो अभी पुराने नियम ही चलेंगे। थोड़ा unfair लगता है, लेकिन क्या करें, retail sector की अपनी मजबूरियां होती हैं।
4-डे वर्कवीक में कर्मचारियों के working hours क्या होंगे?
तो यहां समझने वाली बात ये है कि total working hours वही रहेंगे। मतलब? मतलब ये कि 5 दिन में 40 घंटे की जगह अब 4 दिन में 40 घंटे निकालने होंगे। हालांकि exact schedule अभी तय नहीं हुआ, पर शायद 10-10 घंटे की shifts होंगी। थोड़ा tough लगता है, लेकिन फिर 3 दिन की छुट्टी का मजा ही कुछ और होगा!
क्या इससे स्टारबक्स के products की prices पर effect पड़ेगा?
अच्छा सवाल पूछा! पर घबराने की कोई बात नहीं। स्टारबक्स ने खुद ही साफ कर दिया है कि आपके पसंदीदा frappuccino या latte की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आएगा। वैसे भी, हम भारतीयों को तो price increase से allergy है न? फिलहाल तो आराम से अपनी coffee का लुत्फ़ उठाइए!
Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com