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बिहार में BJP-JDU का 70 प्लस फॉर्मूला: 9 विधायकों के चुनाव लड़ने पर क्यों लगेगा ग्रहण?

बिहार में BJP-JDU का 70 प्लस फॉर्मूला: क्या 9 विधायकों का टिकट कटना तय है?

अरे भई, बिहार की राजनीति तो फिर से गरमा गई है! NDA गठबंधन (BJP-JDU वाला) इस बार युवाओं पर दांव लगाने जा रहा है। और यहाँ तो बस… कई पुराने विधायकों की कुर्सी डोलने लगी है। खासकर उन 9 विधायकों की, जिनके चेहरे पर अभी से हार का मलहम लग चुका है। सच कहूँ तो, यह सब देखकर लगता है जैसे राजनीति का पुराना नियम फिर से काम कर रहा है – “जो आज है, कल नहीं होगा!”

पूरा माजरा क्या है?

देखिए, BJP और JDU के बीच सीट बँटवारे की बातचीत तो अभी चल ही रही है। लेकिन असली मज़ा तो यह है कि उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। 2020 में तो NDA ने 70+ सीटें जीती थीं ना? अब वही फॉर्मूला दोहराने की तैयारी है। पर इस बार मसाला थोड़ा अलग है।

दोनों पार्टियों ने तय किया है कि नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। मतलब साफ है – कई पुराने विधायकों को बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ सकता है। और सुनिए, पार्टी leadership को लगता है कि नए candidates युवा voters को अपनी तरफ खींच लेंगे। पर सवाल यह है कि क्या यह सोच सही साबित होगी? क्योंकि पुराने leaders का गुस्सा भी तो देखना होगा!

अभी तक क्या हुआ?

NDA के भीतर के sources कह रहे हैं कि 9 विधायकों (5 BJP और 4 JDU वाले) को इस बार टिकट नहीं मिलने वाला। अब इनमें से कुछ तो पिछले पाँच साल से सोए हुए थे, वहीं कुछ पर corruption के ऐसे-ऐसे आरोप लगे हैं कि सुनकर ही पसीना छूट जाए!

मजेदार बात यह है कि दोनों पार्टियाँ caste equations को ध्यान में रखकर नए लोगों को आगे लाना चाहती हैं। मतलब, OBC और EBC वर्ग के युवा leaders को ज्यादा opportunities मिलेंगी। अच्छी बात है, पर क्या यह सब इतना आसान होगा?

कौन क्या बोल रहा?

इस पूरे मामले पर reactions तो आने ही लगे हैं। एक BJP नेता (जिनका नाम तो मैं नहीं लूँगा!) ने कहा, “यार, पार्टी इस बार grassroots workers और युवाओं के साथ जाना चाहती है। हालाँकि पुराने विधायकों को भी मौका मिल सकता है… पर वो भी तभी जब उनका performance दमदार हो।”

वहीं JDU के एक spokesperson ने साफ कहा, “नीतीश जी का focus development और नए leadership पर है। जिन्होंने काम किया है, उन्हें टिकट मिलेगा ही।” सुनने में तो अच्छा लगता है, ना?

पर एक विधायक (जो टिकट खोने के कगार पर हैं) ने गुस्से में कहा, “हमें बलि का बकरा बनाया जा रहा है! अगर टिकट नहीं मिला तो… विकल्प तो हैं ही।” अरे वाह! यह तो खुली धमकी हो गई!

अब आगे क्या?

अगले कुछ दिनों में BJP और JDU की top-level meeting होनी है। यहीं पर final candidates की लिस्ट तय होगी। और यकीन मानिए, इसका असर पूरे बिहार की राजनीति पर पड़ेगा।

Political experts कह रहे हैं कि अगर इन 9 विधायकों को टिकट नहीं मिला, तो NDA के भीतर बवाल हो सकता है। RJD-कांग्रेस गठबंधन को फायदा मिल सकता है। पर दूसरी तरफ, यह youth strategy युवा voters को खुश भी कर सकती है। Risk है, पर reward भी तो है!

सच पूछो तो, बिहार की इस राजनीतिक कहानी का अगला chapter बहुत दिलचस्प होने वाला है। पार्टी workers के बीच तो बहस जारी है – क्या यह साहसिक कदम सफल होगा? या फिर पुराने खिलाड़ी गेम बदल देंगे? वक्त ही बताएगा!

BJP-JDU का 70+ Formula: जानिए क्या है पूरा खेल?

1. भईया, ये 70 प्लस फॉर्मूला आखिर है क्या चीज़?

देखिए, बात सीधी है – बिहार में BJP और JDU ने मिलकर एक ‘जीतने वाला कॉम्बो’ बनाने की कोशिश की है। 70+ का मतलब? वो 70 से ज़्यादा सीटों पर अपने सबसे धाकड़ उम्मीदवार उतारेंगे। सीधा गोल – 2025 में पूर्ण बहुमत! पर सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ़ कागज़ों वाली प्लानिंग रहेगी या असल में काम करेगी?

2. 9 विधायकों पर इतना बवाल क्यों?

अरे भई, सच तो ये है कि इनमें से कुछ पर तो केस चल रहे हैं…कुछ की जनता में छवि ही खराब हो चुकी है। सोचिए – अगर आपको किसी ऐसे इंसान को वोट देना हो जिस पर आप भरोसा ही न करते हों? बिल्कुल नहीं न! यही वजह है कि इन सीटों पर पार्टियों को पसीना आ रहा है।

3. क्या ये फॉर्मूला दोस्ती को और गहरा करेगा?

ईमानदारी से कहूँ तो…हो सकता है! अगर सब कुछ शांति से चला, टिकट बंटी, और जीत हासिल हुई तो दोस्ती पक्की। लेकिन अगर कहीं ‘आपको ज़्यादा सीटें मिल गई?’ वाली बहस छिड़ गई तो? फिर तो यारी भी दुश्मनी में बदल सकती है। राजनीति है भाई, कुछ भी हो सकता है!

4. क्या RJD वालों की नींद उड़ जाएगी?

एक तरफ तो अगर BJP-JDU एकजुट रहे और सही कैंडिडेट चुने, तो विपक्ष के लिए मुश्किल ज़रूर होगी। परंतु! अगर इनमें आपसी तकरार हुई…तब तो RJD और कंपनी मज़े से पॉपकॉर्न खाते हुए मैच देखेंगी। असल में, ये पूरा खेल एक्शन और रिएक्शन पर टिका है।

Source: Aaj Tak – Home | Secondary News Source: Pulsivic.com

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