यूके सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या बैंकों को मिल गई राहत?
अरे भाई, शुक्रवार को यूके सुप्रीम कोर्ट ने कार फाइनेंस वाले उस बड़े मामले में फैसला सुना दिया! वो जिसके चलते पिछले कुछ सालों से बैंक वालों की नींद उड़ी हुई थी। अब विशेषज्ञ कह रहे हैं कि बैंकों को जो मुआवजा देना पड़ रहा था, उसमें काफी कटौती हो सकती है। सच कहूं तो ये फैसला उन हजारों ग्राहकों के लिए बड़ा झटका है जो ये मानते थे कि उनके साथ कार लोन के नाम पर धोखाधड़ी हुई थी।
असल में देखा जाए तो… यूके में तो कार फाइनेंस को लेकर शिकायतों का सिलसिला काफी पुराना है। ग्राहकों का कहना था कि उन्हें जानबूझकर गलत जानकारी देकर महंगे लोन थमा दिए गए। और हां, कई तरह के छुपे हुए चार्जेज भी लगाए गए। FCA ने तो इस मामले में जांच शुरू कर दी थी – और बैंक वाले पसीने-पसीने हो गए थे। हालांकि, बैंकों ने हमेशा यही दावा किया कि उन्होंने सारे नियम फॉलो किए हैं। पर सच क्या है? वो तो कोर्ट ही बता सकता है।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसने पूरे गेम को ही बदल दिया है। कोर्ट ने बैंकों के पक्ष में कुछ राहत दे दी है। और ये सुनकर तो बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में तेजी आ गई! क्यों? क्योंकि अब बैंकों पर वित्तीय दबाव कम होगा। मतलब साफ है – उनका प्रॉफिट बढ़ेगा। एकदम ज़बरदस्त। सच में।
अब इस फैसले पर सबकी अलग-अलग राय है। बैंकिंग वालों ने तो जैसे खुशी से उछल पड़े – “ये फैसला सही है, हमने कोई गलती नहीं की!” वहीं दूसरी तरफ, ग्राहक अधिकार वाले गुस्से में हैं – “ये तो ग्राहकों के साथ अन्याय है, हम आगे लड़ेंगे!” विश्लेषक क्या कहते हैं? उनका मानना है कि बैंकों की बैलेंस शीट अब पहले से बेहतर होगी।
तो अब क्या होगा? अब बैंकों को मुआवजे की रकम फिर से कैलकुलेट करनी होगी। और हां, ग्राहकों को पहले के मुकाबले कम पैसा मिलेगा। FCA शायद नए गाइडलाइन्स लाएगा ताकि भविष्य में ऐसे झगड़े न हों। लेकिन… क्या ये मामला यहीं खत्म होगा? शायद नहीं। ग्राहक संगठन तो इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। मतलब ये लड़ाई अभी और लंबी खिंच सकती है।
देखिए, इस फैसले के असर तो आने वाले सालों में दिखेंगे। ये केस तो वित्तीय सेक्टर के नियमों और ग्राहक सुरक्षा को नया आकार दे सकता है। इसलिए अगर आप फाइनेंस या बैंकिंग से जुड़े हैं, तो इसके डेवलपमेंट पर नजर रखिए। क्योंकि ये सिर्फ यूके की बात नहीं – ऐसे फैसले तो पूरी दुनिया में असर डालते हैं। है न?
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UK सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कार फाइनेंस पर बैंकों की मनमानी पर लगाम?
1. UK सुप्रीम कोर्ट ने कार फाइनेंस के मामले में क्या कहा?
देखिए, UK सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जो बैंकों के लिए बड़ा झटका है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बैंक अब ग्राहकों से hidden charges या फिर बेतुके ब्याज दर नहीं वसूल सकते। सच कहूं तो, यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा है जो कार लोन लेने की सोच रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या बैंक वाकई इस पर अमल करेंगे?
2. आम ग्राहकों को इससे क्या फायदा होगा?
असल में बात यह है कि अब बैंकों को पारदर्शिता से काम करना होगा। मतलब साफ है – no more छुपे हुए charges, no more ऊंचे-ऊंचे interest rates। आपको पता चलेगा कि आखिर आप किस चीज के लिए पैसे दे रहे हैं। एक तरह से देखें तो यह online shopping में ‘no hidden cost’ वाले ऑफर्स जैसा है। बुरा नहीं है, है न?
3. क्या सभी बैंकों को यह नियम मानना होगा?
जी हां! कोर्ट का यह आदेश सिर्फ एक-दो बैंकों के लिए नहीं है। जो भी बैंक या financial institution कार लोन देता है, उसे इन नियमों का पालन करना होगा। वैसे भी, rules तभी काम करते हैं जब वे सब पर समान रूप से लागू हों। सही कहा न?
4. पहले लिए गए लोन पर भी यह लागू होगा?
यहां बात थोड़ी tricky हो जाती है। कोर्ट ने साफ तो नहीं कहा, लेकिन संभावना है कि पुराने लोन भी इसके दायरे में आ सकते हैं। पर एक बात याद रखिए – आपको खुद ही अपने बैंक से बात करनी होगी। वैसे भी, terms और conditions चेक करने में क्या हर्ज है? हो सकता है आपको कुछ पैसे वापस मिल जाएं!
एकदम ज़बरदस्त। सच में।
Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com