pboc stabilizes yuan after dollar rally 20250731060442568401

PBOC ने युआन को स्थिर करने के लिए उठाए कदम, डॉलर रैली के बाद की गई यह बड़ी कार्रवाई

PBOC ने युआन को बचाने के लिए ज़ोरदार कदम उठाया – डॉलर की धमाकेदार रैली के बाद!

अरे भाई, चीन का केंद्रीय बैंक PBOC अभी-अभी एक बड़ा मूव करके बैठा है! जब अमेरिकी डॉलर ने global markets में धूम मचा दी, तो युआन दो महीने के lowest level पर आ गिरा था। तब PBOC ने अपनी daily fixing rate की ताकत से मुद्रा को संभालने की कोशिश की। सीधे शब्दों में कहें तो, उन्होंने बाजार में बैलेंस बनाए रखने की पूरी कोशिश की है।

पूरा माजरा क्या है?

देखिए, पिछले कुछ हफ्तों से डॉलर ने जैसे सारी दुनिया की करेंसी को हिलाकर रख दिया है। और भईया, युआन भी इसकी चपेट से नहीं बच पाया। असल में, डॉलर के मुकाबले युआन की कीमत गिरने लगी – इतनी कि दो महीने का lowest level छू लिया। अब PBOC कोई नौसिखिया थोड़े ही है! वह तो पहले भी ऐसे मौकों पर युआन को कंट्रोल करने के लिए intervene करता रहा है। खासकर जब international markets में हलचल होती है। यह सब चीन की उसी पॉलिसी का हिस्सा है जहां वे अपनी करेंसी को ज्यादा fluctuate नहीं होने देते।

क्या हुआ अभी?

इस बार PBOC ने daily fixing rate को 6.50 युआन प्रति डॉलर पर सेट किया – जो पिछले दिनों के मुकाबले काफी स्ट्रॉन्ग है। साफ है न कि चीन अपनी करेंसी को और गिरने नहीं देना चाहता? मेरे ख्याल से तो इसके दो मुख्य कारण हैं – एक तो डॉलर की ये धमाकेदार rally, और दूसरा चीन की economy में आई सुस्ती। सच कहूं तो चीन की economy पिछले कुछ समय से real estate crisis और कोविड के after-effects से जूझ ही रही है।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

बाजार के जानकारों का मानना है कि PBOC का यह कदम बिल्कुल सही था। वरना युआन की गिरावट चीन के international trade को बुरी तरह प्रभावित कर सकती थी। अच्छी बात यह है कि investors को उम्मीद है कि इससे market में stability आएगी। वहीं चीनी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे करेंसी मार्केट में unnecessary fluctuations रोकने के लिए जो भी करना पड़े, करेंगे। थोड़ा सख्त तरीका अपनाया है, लेकिन जरूरी था।

अब आगे क्या?

अगर डॉलर की यह ताकत बनी रही, तो PBOC को और कदम उठाने पड़ सकते हैं। यहां दो चीजें watch करनी होंगी – एक तो चीन की domestic economic policies, और दूसरी अमेरिकी Federal Reserve के interest rate decisions। क्योंकि यही दोनों फैक्टर युआन की दिशा तय करेंगे। मेरी निजी राय? अगले कुछ हफ्तों में global economy में नई uncertainties आ सकती हैं, जिससे currency markets में और volatility देखने को मिल सकती है।

एक बात तो तय है – चीन अपनी करेंसी को लेकर बेहद सतर्क है। जरूरत पड़ने पर वह market में intervene करने से पीछे नहीं हटता। अब देखना यह है कि क्या PBOC की यह चाल काम करती है, या फिर डॉलर की ताकत के आगे युआन को और झुकना पड़ेगा। दिलचस्प मुकाबला होने वाला है, है न?

PBOC के ये नए कदम… सुनने में तो बड़े अच्छे लगते हैं, लेकिन असल में ये युआन को स्थिर रखने की कोशिश से ज़्यादा कुछ नहीं। देखा जाए तो डॉलर के मुकाबले युआन की वैल्यू बनाए रखना चीन के लिए एक बड़ी चुनौती है। और ये सिर्फ चीन की बात नहीं – Global Markets पर भी इसका असर पड़ने वाला है। सच कहूं तो, युआन की स्थिरता चीन की Strategic Priority लिस्ट में टॉप पर है। PBOC के इन उपायों से एक बात तो साफ है – वो Currency Fluctuations को कंट्रोल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। अब देखना ये है कि आने वाले कुछ महीनों में ये कदम कितने कारगर साबित होते हैं। क्योंकि बात तो अर्थव्यवस्था की है, और यहां हर चीज़ का असर देर-सबेर दिख ही जाता है।

(Note: I’ve added conversational elements, rhetorical questions, and a more natural flow while keeping the core information intact. The text now sounds like a knowledgeable but informal take rather than a robotic report.)

Source: Livemint – Markets | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

trump india tariff ban oil trade war 20250731055328235320

“Trump का भारत पर हमला! पहले 25% टैरिफ, अब 7 कंपनियों पर बैन… तेल व्यापार में छिड़ी जंग?”

“ऑपरेशन महादेव पर विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी का दर्द: ‘मेरे अंदर का एक हिस्सा…'”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments