अमेज़न ने टैरिफ की परवाह नहीं की, और ई-कॉमर्स में मारी बाज़ी!
अरे भाई, अमेज़न ने तो इस बार Q2 के नतीजों में धमाल मचा दिया! 13% की राजस्व वृद्धि? सच में? ये तो वैश्विक मंदी और ट्रम्प के trade war के बीच कमाल है। और सबसे मजेदार बात – टैरिफ का असर न के बराबर! क्या आपको नहीं लगता कि ये कंपनी कुछ ज्यादा ही स्मार्ट होती जा रही है?
याद है वो ट्रेड वॉर का पागलपन?
असल में, पूरी कहानी समझनी है तो थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। ट्रम्प के जमाने में अमेरिका-चीन trade war ने तो सबकी नींद उड़ा दी थी। इतने सारे टैरिफ… supply chain का बुरा हाल… पर देखिए न, अमेज़न ने चुपके से अपनी logistics और domestic manufacturing को मजबूत कर लिया। शाबाश!
एक तरफ तो बाकी कंपनियां परेशान थीं, वहीं अमेज़न ने अपना गेम पहले से तैयार कर रखा था। सीधे कहूं तो – चालाकी से काम लिया!
Q2 के नंबर्स ने उड़ाए सबके होश
अब आते हैं मजेदार हिस्से पर – आंकड़े! $134.4 अरब का राजस्व… यानी लगभग 11 लाख करोड़ रुपये। भई ये तो किसी छोटे देश के GDP जितना है! और सबसे जबरदस्त? AWS में 37% की उछाल। क्लाउड कंप्यूटिंग में तो ये लोग राज कर रहे हैं।
पर सच्चाई ये है कि कीमतें न बढ़ाने का फैसला ग्राहकों को भाया। Smart move था ये। आखिर customer trust तो सबसे बड़ी चीज है न?
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे?
JPMorgan के एक विश्लेषक ने तो सीधे कह दिया – “अमेज़न की supply chain और operational efficiency ने टैरिफ का असर कम कर दिया।” और भई, शेयर मार्केट ने भी 7% की छलांग लगा दी। Investors खुश, कंपनी खुश… बस Walmart और eBay वाले शायद मुंह बना रहे होंगे!
मजे की बात ये कि competitors के मुकाबले अमेज़न ने बाजी मार ली। क्या आपको नहीं लगता कि ये कंपनी अब हर मुश्किल से निपटने का तरीका ढूंढ लेती है?
आगे की राह क्या है?
अब अमेज़न logistics को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। Delivery fleet बढ़ाने से लेकर regional manufacturing units तक… सबकुछ प्लान में है। Experts मानते हैं कि ई-कॉमर्स में तो ये राज करेगा ही, पर सरकारी नीतियों पर नजर रखना भी जरूरी होगा।
अंत में बस इतना – अमेज़न ने फिर साबित कर दिया कि global challenges को handle करना इसके लिए नई बात नहीं। टैरिफ हो या कोई और बाधा, ये कंपनी अपने business model के दम पर आगे बढ़ती जाएगी। क्या आपको लगता है कोई इसे रोक पाएगा?
एकदम ज़बरदस्त। सच में।
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Source: Financial Times – Global Economy | Secondary News Source: Pulsivic.com