inflation rise not just tariffs 20250801075325417235

मुद्रास्फीति बढ़ रही है, और यह सिर्फ टैरिफ की वजह से नहीं! जानें पूरी सच्चाई

मुद्रास्फीति का भूत फिर सर चढ़कर बोल रहा है… और यह सिर्फ टैरिफ की कहानी नहीं!

अरे भाई, हालत तो देखो! महंगाई ने फिर से दस्तक दे दी है। आपको भी महसूस हो रहा होगा – बाजार जाता कहाँ है? CPI के ताजा आंकड़े देखकर तो लगता है जैसे सबकी जेबें हल्की हो रही हैं। लेकिन सच यह है कि यह समस्या सिर्फ टैरिफ या सप्लाई चेन की गड़बड़ी से कहीं बड़ी है। असल में तो… (गहरी सांस लेते हुए) यह एक पूरी जटिल पहेली है जिसमें RBI, सरकार और हम जैसे आम लोग फंसे हुए हैं।

समस्या की जड़: प्याज़ से लेकर पेट्रोल तक, सबकी कीमत क्यों उछल रही?

सालों से तो RBI और सरकार महंगाई को काबू में करने की कोशिश कर रही है। पर ये कोविड और रूस-यूक्रेन वॉर का असर… अभी तक गया ही नहीं! वैसे तो दुनिया धीरे-धीरे नॉर्मल हो रही है, लेकिन हमारे यहाँ महंगाई का भूत क्यों नहीं जा रहा? मजे की बात यह है कि अब एक नया खिलाड़ी मैदान में आ गया है – अमेरिकी टेक दिग्गजों का वह “Magnificent Seven” ग्रुप! Apple, Google जैसी कंपनियों का दबदबा… सच कहूँ तो यह ग्लोबल इन्वेस्टमेंट का पूरा गणित ही बदल रहा है। और हम जैसे देश? बस देखते रह जाते हैं।

कहाँ-कहाँ चोट लग रही है? असली नुकसान किसे हो रहा?

अब जरा हालात पर नजर डालिए – रोटी, पेट्रोल और बेसिक सर्विसेज की कीमतें आसमान छू रही हैं। RBI ने तो ब्याज दरें बढ़ाकर दमखम दिखा दिया, पर असर? उतना नहीं जितना चाहिए था। सच तो यह है कि अब पैसा सीधा Mag 7 कंपनियों की ओर भाग रहा है। नतीजा? बाकी सेक्टर सूखने लगे हैं। और हाँ… रुपये की लगातार गिरती कीमत ने तो आग में घी का काम किया है। आयात महंगा, तो महंगाई और बढ़ी – सीधा सा फंडा!

बड़े लोग क्या कह रहे हैं? सरकार से लेकर विशेषज्ञ तक

इस मसले पर तो हर कोई अपनी-अपनी राय दे रहा है। RBI गवर्नर का कहना है – “हम कोशिश कर रहे हैं, पर ग्लोबल अनिश्चितता बड़ी मुसीबत है।” वहीं वित्त मंत्रालय वाले GST कम करने और सप्लाई चेन सुधारने की बात कर रहे हैं। मगर डॉ. रघुराम राजन जैसे अर्थशास्त्री साफ कहते हैं – “समस्या सिर्फ बाहरी नहीं, हमारी अपनी कमजोरियाँ भी जिम्मेदार हैं।” और उद्योग जगत? उनकी चिंता समझ आती है – “ब्याज दरें बढ़ने से छोटे व्यापारी दबाव में आ रहे हैं।”

आगे क्या? क्या हमें और तंगहाली के लिए तैयार रहना चाहिए?

अगर यही हाल रहा तो… (सिर हिलाते हुए) RBI को फिर से ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। मतलब? लोन और महंगा, ग्रोथ और स्लो। सरकार को तो अब पेट्रोल-डीजल से लेकर आटा-दाल तक की कीमतों पर कुछ ठोस करना ही होगा। और हाँ, Mag 7 के बढ़ते प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हम जैसे आम लोगों के लिए? बस इतना – खर्चे में स्मार्टनेस दिखाओ, और निवेश के नए रास्ते खोजो। क्योंकि यह दौर… टाइट रोप वॉकिंग जैसा है!

यह भी पढ़ें:

मुद्रास्फीति की बात करें तो यह सिर्फ महंगाई बढ़ने का सीधा-साधा मामला नहीं है। असल में, यह तो एक पूरी पहेली है जिसके कई टुकड़े हैं – supply chain की खामियाँ, demand का अचानक उछाल, और वैश्विक अर्थव्यवस्था का हाल… ये सब मिलकर इसकी वजह बनते हैं। अब सवाल यह है कि हम इससे कैसे निपटें?

तो देखिए, सरकार और आम जनता दोनों को ही थोड़ा स्मार्ट तरीके से काम करना होगा। बजट बनाते वक्त priorities तय करनी होंगी, खर्चों को लेकर थोड़ा कंजूसी दिखानी होगी। मगर सिर्फ यही काफी नहीं। जागरूकता भी उतनी ही ज़रूरी है जितना कि सुबह की चाय में चीनी!

और हाँ, एक बात और – quick fixes से काम नहीं चलेगा। यह कोई ऐसी समस्या नहीं जिसका समाधान overnight हो जाए। लेकिन अगर सही कदम उठाए जाएँ, तो long-term में हालात सुधर सकते हैं। वैसे भी, जब तक हम सब मिलकर कोशिश नहीं करेंगे, तब तक… आप समझ ही गए होंगे!

P.S. – अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ economists की चिंता का विषय है, तो फिर से सोचिए। आपके घर का बजट भी इससे directly affect होता है!

मुद्रास्फीति (Inflation) पर चर्चा: वो सवाल जो आप पूछना चाहते हैं लेकिन डरते हैं!

अचानक मुद्रास्फीति क्यों बढ़ जाती है? सिर्फ पेट्रोल तो नहीं है जिम्मेदार!

देखिए, मुद्रास्फीति का बढ़ना वैसा ही है जैसे ट्रैफिक जाम – कोई एक वजह नहीं होती! कभी सप्लाई चेन का उलझना (जैसे कोविड के दौरान), तो कभी crude oil की कीमतों का आसमान छूना। और हां, government policies भी कई बार ऐसा करवाती हैं। मजे की बात? कभी-कभी तो बस demand और supply का खेल होता है। है न मजेदार?

आपकी जेब पर कैसे गिरती है मुद्रास्फीति की मार?

अरे भाई, सीधा असर तो यह होता है कि महीने के आखिर तक पैसे नहीं बचते! पेट्रोल से लेकर आटा-दाल तक, सबकी कीमतें हवा हो जाती हैं। असल में, आपकी purchasing power घट जाती है – यानी वही पैसे में कम सामान। और savings? उसका तो बुरा हाल… जैसे गर्मी में पिघलता आइसक्रीम!

क्या RBI हमें बचा सकता है? या सिर्फ interest rates घटा-बढ़ाकर खेल रहा है?

सच कहूं तो RBI की मुश्किल जॉब है। वो monetary policy के इस जादू की छड़ी से inflation को कंट्रोल करने की कोशिश करता है। Interest rates बढ़ाएंगे तो लोन महंगा होगा, घटाएंगे तो… खैर, समझदार लोग तो जानते ही हैं। पर क्या यह हमेशा काम करता है? उस पर फिर कभी!

मुद्रास्फीति से लड़ने के 3 जबरदस्त तरीके (जो आपकी दादी भी नहीं बताएगी)

पहली बात तो यह कि पैसे को तकिए के नीचे रखना बंद करो! SIP में invest करो, थोड़ा gold लो, real estate पर नजर रखो। दूसरा – बजट बनाना सीखो। और तीसरा? वो फालतू का online shopping रोक दो! सच कहूं तो यही असली जंग है।

एक्स्ट्रा टिप: अगले महीने जब petrol price बढ़े तो गुस्सा करने से बेहतर है इन बातों पर ध्यान देना। कह दिया न!

Source: Financial Times – Global Economy | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

malegaon blast case ex ats officer reveals mohan bhagwat arr 20250801072911079213

मालेगांव ब्लास्ट केस: पूर्व ATS अफसर महबूब का बड़ा खुलासा – “मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का मिला था आदेश!”

turkey pays price for pakistan friendship india reaction 20250801080619639304

“तुर्की को भारी पड़ी पाकिस्तान से दोस्ती! भारत के खिलाफ खेलते ही झेलनी पड़ी भयंकर मुसीबत”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments