Operation Mount Mentok: BSF के 35 जवानों ने शुरू किया एक ऐसा मिशन जो आपको हैरान कर देगा!
दोस्तों, BSF के जवानों की बहादुरी के किस्से तो हम सबने सुने हैं, लेकिन यह नया मिशन कुछ अलग ही लगता है। सच कहूं तो जब मैंने पहली बार ‘Operation Mount Mentok’ का नाम सुना, तो सोचा – यह कोई हॉलीवुड मूवी तो नहीं? लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है। BSF ने अपने 35 चुनिंदा कमांडो को एक ऐसे मिशन पर भेजा है जो अगले 34 दिनों तक चलेगा। और हां, यह कोई सामान्य ड्यूटी नहीं है – यह तो एकदम ‘मिशन इम्पॉसिबल’ सा लगता है, है न?
यह मिशन इतना खास क्यों है?
असल में देखा जाए तो BSF वैसे भी ऐसे मिशनों के लिए मशहूर है। याद कीजिए पिछले साल उत्तराखंड में उनका रेस्क्यू ऑपरेशन? लेकिन इस बार की बात ही कुछ और है। सोचिए – 34 दिन का मिशन! इतने लंबे समय तक क्या हो सकता है? कोई सीक्रेट सर्विलांस ऑपरेशन? या फिर बॉर्डर पर कुछ बड़ी एक्शन? सरकार चुप्पी साधे हुए है, लेकिन सुरक्षा सूत्रों की मानें तो यह भारत की सुरक्षा से जुड़ा कोई बहुत ही महत्वपूर्ण काम है।
एक दिलचस्प बात – ‘मेंटोक’ नाम कहां से आया? क्या यह किसी पहाड़ का कोड नाम है? या फिर कोई स्पेशल मिलिट्री टर्म? अभी तक तो कोई जवाब नहीं मिला। लेकिन इतना जरूर पता चला है कि इन जवानों को इस मिशन के लिए खास ट्रेनिंग दी गई है। और वो भी कैसी? जैसे कि आप किसी सुपरहीरो मूवी की ट्रेनिंग देख रहे हों!
क्या है इस मिशन की असली चुनौती?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर 34 दिन क्यों? मेरे एक फ्रेंड जो आर्मी में हैं, उन्होंने बताया कि इतने लंबे मिशन आमतौर पर तभी होते हैं जब:
- लोकेशन बहुत ही रिमोट हो
- वहां पहुंचना ही एक चुनौती हो
- और सबसे बड़ी बात – वहां टिके रहना भी उतना ही मुश्किल हो जितना UPSC की तैयारी!
हालांकि BSF के प्रवक्ता इसे ‘routine operation’ बता रहे हैं, लेकिन हम सब जानते हैं न कि यह कोई रूटीन मामला नहीं है। खासकर तब जब सुरक्षा विशेषज्ञों की एक पूरी टीम इसे चीन या पाकिस्तान बॉर्डर से जोड़कर देख रही है।
और अब सबसे बड़ा सवाल…
क्या होगा अगले 34 दिनों में? सच कहूं तो मैं खुद बहुत उत्सुक हूं। क्योंकि अगर यह मिशन सफल रहा, तो यह सिर्फ BSF के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। और हां, इन जवानों के परिवारों की चिंता तो समझी जा सकती है। उनके लिए यह समय कितना मुश्किल होगा, यह तो वही जानते हैं।
एक बात तो तय है – चाहे जो भी हो, ये BSF के जवान अपना सौ फीसदी देंगे। क्योंकि यही तो उनका धर्म है। और हम? हमें बस इतना करना है कि इन वीरों के लिए दुआ करें। क्योंकि जब तक ये हमारी सीमाओं पर डटे हैं, तब तक हम चैन की नींद सो सकते हैं। सच में।
[अंत में एक छोटी सी नोट] – दोस्तों, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। ताकि और लोग भी हमारे इन अनसुने हीरोज के बारे में जान सकें। जय हिन्द!
यह भी पढ़ें:
- Search Engine Ranking
- Search Engine Optimization
- Here Are 5 7 Relevant English Seo Tags For The Hindi Article Emergency 1975
SEO समझना इतना मुश्किल नहीं, बस थोड़ा धैर्य चाहिए!
SEO आखिर है क्या, और हमें इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए?
देखिए, SEO (Search Engine Optimization) वो जादू की छड़ी है जो आपकी website को Google जैसे search engines में ऊपर लाती है। सोचिए – अगर आपकी दुकान गली के अंदर होने की बजाय मेन रोड पर हो तो? बिल्कुल वैसा ही! ज्यादा लोग देखेंगे, ज्यादा business होगा। सीधी सी बात है न?
क्या SEO के लिए महंगे tools खरीदने पड़ते हैं? मेरे जैसे गरीब का क्या होगा?
अरे नहीं भई! मैं खुद शुरुआत में बिना पैसे वाले tools से काम चलाता था। हाँ, SEMrush या Ahrefs जैसे paid tools मदद जरूर करते हैं – जैसे कोई GPS device लंबी यात्रा में। लेकिन Google Search Console और Google Analytics तो मुफ्त में ही मिल जाते हैं – बिल्कुल रिक्शे की तरह, सस्ते पर काम चलाऊ!
On-Page और Off-Page SEO – ये दोनों अलग-अलग क्यों हैं?
इसे ऐसे समझिए – On-Page SEO तो आपके घर की साफ-सफाई जैसा है। Content, meta tags, images – सब कुछ तो आपके हाथ में है। वहीं Off-Page SEO वो है जब पड़ोसी आपके बारे में अच्छा बोलें (backlinks) और आपकी तारीफ सोशल मीडिया पर हो (promotion)। दोनों ही जरूरी, पर अलग-अलग काम!
SEO में रैंकिंग पाने में कितना वक्त लगता है? कल शुरू करूँ तो परसों रिजल्ट मिलेगा?
हाहा! अगर ऐसा होता तो मैं आज मालदीव में छुट्टियाँ मना रहा होता! सच तो ये है कि SEO धीरे-धीरे जमता है – जैसे पौधे को पनपने में वक्त लगता है। 3-6 महीने तो minimum है, पर niche के हिसाब से और भी ज्यादा। पर हाँ, एक बार रिजल्ट आने लगे तो… एकदम ज़बरदस्त। सच में!
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com