राज ठाकरे फिर चर्चा में: “जमीन खरीदने आएं तो पूछो हमसे…” – मराठी अस्मिता की बहस गरमाई!
अरे भई, राज ठाकरे जब बोलते हैं तो हंगामा तो होगा ही ना! MNS प्रमुख ने फिर एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को हिलाकर रख दिया। एक रैली में उनका कहना था, “कोई बाहर वाला यहाँ ज़मीन खरीदने आए तो सीधा कह दो – हमें बताओ पहले… हम मराठी लोगों को दरकिनार नहीं होने देंगे।” सुनकर लगा जैसे पुराना विवाद फिर से जीवित हो गया – मराठी बनाम बाहरी वाला।
पर ये कोई नई बात थोड़े ही है। असल में देखा जाए तो ये राज ठाकरे का पुराना राग है। सालों से वो मराठी भाषा, संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। याद है 2008 का वो ‘मराठी माणूस’ अभियान? जब दुकानों पर मराठी में बोर्ड लगवाने की मांग चल रही थी। अब हालात ये हैं कि बाहरी लोगों द्वारा ज़मीन खरीदने के मामले बढ़े हैं – और ठाकरे साहब ने इसी चिंता को फिर से उछाल दिया है।
बयान देते ही राजनीति वालों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। एक तरफ ठाकरे सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि मराठी लोगों के हक़ मारे जा रहे हैं। दूसरी तरफ विपक्ष वालों का कहना है कि ये बस फूट डालो की राजनीति है। सोशल मीडिया पर तो #MarathiPride और #RajThackeray ट्रेंड कर रहा है – लेकिन लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ तालियाँ बजा रहे हैं, तो कुछ सिर पकड़े बैठे हैं।
अब सवाल ये है कि सबकी प्रतिक्रिया क्या रही? शिवसेना (UBT) वाले तो कह रहे हैं कि “राज साहब सिर्फ हेडलाइन्स पकड़ना चाहते हैं।” भाजपा वालों ने इसे समाज में तनाव फैलाने वाला बयान बताया। पर हैरानी की बात ये कि कुछ मराठी संगठन ठाकरे के साथ खड़े दिख रहे हैं – उनका कहना है कि बाहरी लोगों की वजह से स्थानीय लोगों को नौकरियों और रिसोर्सेज में नुकसान हो रहा है। आम आदमी? उनकी राय तो दो कटोरों में बंटी हुई है!
तो अब क्या? सच कहूँ तो ये बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफ़ान ला सकता है। सरकार के लिए ये टाइटरोप वॉक जैसा होगा – मराठी और गैर-मराठी दोनों को साथ लेकर चलना पड़ेगा। और हाँ, अगले कुछ महीनों में तो ये मुद्दा और गरमा सकता है – खासकर स्थानीय चुनावों से पहले। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया भी देखने लायक होगी। क्योंकि आखिरकार, ये सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, पूरे देश की एकता का सवाल है।
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com