राहुल गांधी के वार… पर असर उल्टा क्यों? EC से लेकर ट्रंप तक, कहां चूक रही है रणनीति?
सच कहूं तो, राहुल गांधी इन दिनों जिस तरह से हमले कर रहे हैं, वो किसी एक्शन मूवी के विलेन की तरह – ज़ोरदार तो हैं, लेकिन निशाना चूक रहा है! चुनाव आयोग (EC) हो या फिर डोनाल्ड ट्रंप… हर बयान के बाद सवाल ही सवाल खड़े हो रहे हैं। असल में, समस्या ये है कि जहां उन्हें पॉलिटिकल प्वाइंट्स मिलने चाहिए थे, वहां उनकी अपनी पार्टी वाले भी पलटकर सवाल कर रहे हैं। है न मज़ेदार बात?
पूरा मामला क्या है?
देखिए, पिछले कुछ महीनों से राहुल जी का स्टाइल बदला है – जैसे कोई सुपरहीरो जिसने नई पॉवर पा ली हो! EC पर ‘पक्षपात’ का आरोप… ट्रंप के सामने ‘लोकतंत्र खतरे में’ वाली लाइन… और फिर अरुण जेटली साहब के बारे में वो टिप्पणियां। पर यहां दिक्कत ये हुई कि facts थोड़े… एम… कहें तो ‘ढीले’ निकले। जैसे EC के कार्यकाल को लेकर कन्फ्यूजन। ऐसे में सवाल तो उठेंगे ही ना?
क्यों भारी पड़ रही है ये स्ट्रैटजी?
अब जरा गौर से समझिए… इसके तीन बड़े नुकसान दिख रहे हैं:
1. पहला तो ये कि कांग्रेस के अंदर ही कुछ लोग चुपके-चुपके कह रहे हैं – “यार, ये बिना homework किए बयानबाजी ठीक नहीं”
2. दूसरा, सोशल मीडिया पर तो मजा आ गया! ‘राहुल गांधी फैक्ट चेक’ ट्रेंड करने लगा। Twitter पर जो हुआ, वो तो आप समझ ही रहे होंगे!
3. और सबसे बड़ी बात – BJP ने इसे गोल्डन चांस समझा। प्रकाश जावड़ेकर जी तो मानो डायलॉग मारने लगे – “देखिए, इनके पास अब सिर्फ झूठ बचा है!”
कुल मिलाकर, जहां तीर चलाना था, वहां पैर पर ही लग गया!
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
मैंने कुछ पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से बात की तो उनका कहना है – ये दो मुंह वाली तलवार है। एक तरफ, युवा voters को ये आक्रामक अंदाज पसंद आता है (वो भी ‘मोदी vs राहुल’ वाली बाइनरी में)। लेकिन दूसरी तरफ… जब बार-बार facts गलत निकलते हैं, तो credibility डूबने लगती है। कांग्रेस के एक नेता ने (जो नाम नहीं लेना चाहते) कहा – “साहब का इरादा तो सही है, पर थोड़ा research… वो भी कर लिया करें!”
अब आगे क्या?
2024 की बात छोड़िए… अभी तो ये देखना है कि कांग्रेस इस गोल-गप्पे से कैसे निकलेगी! पार्टी के अंदर चर्चा जोरों पर है कि राहुल जी के बयानों को कैसे और पॉलिश किया जाए। मेरी निजी राय? अगर facts check किए बिना ऐसे ही चलते रहे, तो उन्हें ‘serious leader’ मानने वाले और कम हो जाएंगे। फिलहाल तो यही लग रहा है कि जो शॉट्स सामने वाले को लगने चाहिए थे, वो खुद ही चुभ रहे हैं। देखते हैं, अब कोई नई strategy आती है या नहीं!
[एक छोटी सी बात और – क्या आपने नोटिस किया कि इन दिनों राहुल जी के बयानों पर BJP की प्रतिक्रियाएं पहले से ज्यादा प्लान्ड लगती हैं? चलो, ये फिर कभी…]
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राहुल गांधी के वार उल्टे क्यों पड़ रहे? – कुछ सवाल जो दिमाग में कौंधते हैं
सच कहूं तो, ये सवाल मैं खुद से भी पूछता रहता हूं। आखिर क्यों एक नेता जो इतनी मेहनत से मैदान में उतरा है, उसके हर कदम पर सवाल उठाए जा रहे हैं? चलिए कुछ बिंदुओं पर गौर करते हैं।
1. राहुल गांधी के बयानों का असर: BJP और मीडिया पर क्या गुजर रही है?
देखिए, हाल के दिनों में राहुल के statements – चाहे वो EC पर हों, ट्रंप पर या फिर जेटली पर – इन्हें लेकर BJP और कुछ मीडिया चैनलों ने जमकर हंगामा किया है। “बेबुनियाद”, “गलत” जैसे लेबल चिपकाए गए। पर सच ये भी है कि इससे उनकी छवि को थोड़ा झटका लगा है। और विरोधियों को तो मानो दिवाली मनाने का मौका मिल गया हो।
2. Election Commission का नोटिस: सिर्फ फॉर्मैलिटी या कुछ और?
असल में EC ने code of conduct के उल्लंघन का मामला बनाया है। Notice भेजा है, और कुछ मामलों में तो strict action की धमकी भी। लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि क्या ये सिर्फ नियमों का पालन है, या फिर राजनीति का एक और खेल? आप क्या सोचते हैं?
3. ट्रंप और जेटली पर टिप्पणियां: जनता क्या कह रही है?
यहां reaction बिल्कुल मिला-जुला है। एक तरफ तो वो लोग हैं जो मानते हैं कि राहुल सही मुद्दे उठा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी हैं जो इसे महज political drama मानते हैं। और social media? अरे भई, वहां तो हर कोई अपनी-अपनी राय थोपने में लगा हुआ है। एकदम जंगल राज।
4. क्या यह रणनीति Congress को आगे ले जाएगी?
Experts की राय? Short-term में तो headlines मिल ही रहे हैं। पर long game के बारे में? अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। Congress के hardcore supporters तो खुश नजर आ रहे हैं। लेकिन neutral voter… उनका मन अभी भी एक पहेली बना हुआ है। समय ही बताएगा कि ये चाल काम आती है या उल्टी पड़ जाती है।
अंत में बस इतना – राजनीति तो शतरंज की तरह है। आज का वार कल का मात हो सकता है। क्या पता?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com