विपक्षी गढ़ों में मतदाता फ्लैगिंग का मामला: तागोर ने संसद में बिहार SIR पर बहस की मांग की
कांग्रेस के माणिक्कम तागोर ने आज संसद में एक ऐसा मुद्दा उठाया जिस पर गौर करना बेहद ज़रूरी है। बिहार में चुनाव आयोग का यह SIR (Special Intensive Revision) कार्यक्रम… सुनने में तो अच्छा लगता है ना? पर असलियत कुछ और ही है। तागोर का सीधा आरोप है कि यहाँ विपक्ष के गढ़ों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है – खासकर दलित, मुस्लिम और शहरी गरीबों के इलाकों में। अब सवाल यह है कि क्या यह सच में मतदाता सूची सुधारने का काम है या फिर राजनीतिक खेल?
पूरा माजरा क्या है?
देखिए, चुनाव आयोग का कहना तो यह है कि SIR से डुप्लीकेट वोटर हटेंगे। लेकिन तागोर जी कह क्या रहे हैं? उनका दावा है कि यहाँ सिर्फ विपक्षी इलाकों में ही ‘सफाई’ हो रही है। और यह कोई नई बात भी नहीं है – पिछले कुछ सालों से ऐसी शिकायतें आती रही हैं। सच कहूँ तो, अगर यह सच हुआ तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए बड़ा झटका होगा। सोचिए, वोटर लिस्ट से ही अगर आपका नाम गायब कर दिया जाए तो?
संसद में क्या हुआ?
तागोर साहब ने आज सदन में जोरदार तरीके से इस मुद्दे को उठाया। उनकी मांग साफ है – तुरंत बहस हो और चुनाव आयोग जवाब दे। पर एक अजीब बात यह है कि आयोग की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। क्या यह चुप्पी संदेह पैदा नहीं करती? आप ही बताइए…
राजनीति गरमाई
इस मामले ने बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया है। RJD और दूसरे विपक्षी दल तागोर के साथ खड़े हैं, जबकि भाजपा इसे ‘बेबुनियाद’ कह रही है। पर सवाल यह है कि जब नागरिक समाज के संगठन भी जांच की मांग कर रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज कैसे किया जा सकता है? एक तरफ तो हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते हैं, लेकिन अगर वोटर लिस्ट से ही कुछ समुदायों के नाम गायब हो रहे हैं तो?
अब आगे क्या?
अब देखना यह है कि संसद में यह मुद्दा कितनी गंभीरता से उठता है। चुनाव आयोग को शायद जवाब देना पड़े, या फिर जांच समिति बनानी पड़े। और अगर आरोप सही निकले तो? तब तो बिहार की राजनीति ही पलट सकती है। कई विश्लेषक तो यहाँ तक कह रहे हैं कि यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा सवाल है।
अंत में बस इतना कि यह मामला सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं है। यह तो हमारे लोकतंत्र की मूल भावना पर सवाल है – क्या हम सच में ‘वन नेशन, वन एलेक्शन’ की तरफ बढ़ रहे हैं या फिर कुछ लोगों को सिस्टम से बाहर करने की साजिश चल रही है? आने वाले दिनों में इस पर ज़ोरदार बहस होनी चाहिए। क्योंकि अगर वोट ही नहीं रहेगा तो ‘वोट फॉर चेंज’ का नारा कैसे सच होगा?
Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com