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“ECI ने चिदंबरम SIR के खिलाफ भ्रम फैलाने वालों को एक लाइन में झटका दिया!”

ECI ने चिदंबरम SIR के दावों पर दिया ऐसा जवाब, अब क्या बोलेगी राजनीति?

अरे भई, चुनाव आयोग (ECI) ने तो पी. चिदंबरम के उन आरोपों को ठुकरा दिया जैसे कोई बच्चे का गुब्बारा फोड़ दे! बिहार और तमिलनाडु की मतदाता सूचियों में अनियमितता के दावों को आयोग ने सीधे-सीधे “भ्रम फैलाने वाला” बताया है। और सच कहूँ तो, उनके पास ऐसा कहने की वजह भी है। क्योंकि जब ECI अपने आधिकारिक बयान में कुछ कहता है, तो उसके पीछे पूरा डेटा होता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट होगा?

पूरा मामला क्या है? समझिए आसान भाषा में

देखिए, चिदंबरम SIR ने social media पर क्या पोस्ट किया? उनका कहना था कि बिहार की voter list से 65 लाख नाम गायब हैं! वहीं तमिलनाडु में 6.5 लाख नए voters को “शक की नज़र” से देखा जा रहा है। अब ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब 2024 के चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। चिदंबरम ने तो यहाँ तक कह दिया कि ये “जानबूझकर की गई गड़बड़ी” है। पर सच क्या है? ECI के पास इसका जवाब है।

ECI का जवाब: डेटा के आगे कुछ नहीं चलता!

आयोग ने तो जैसे चिदंबरम SIR के दावों को डेटा की चक्की में पीस दिया! उनका कहना है कि बिहार में किसी voter को गलत तरीके से नहीं हटाया गया। और तमिलनाडु? वहाँ तो Representation of the People Act, 1950 के मुताबिक ही सब कुछ हुआ है। ECI ने साफ कहा – “हमारे पास हर entry का रिकॉर्ड है।” सच मानिए, जब आयोग इतने confident टोन में बोलता है, तो सवाल उठता है कि क्या विपक्ष ने पहले facts check किए बिना ही आरोप लगा दिए?

राजनीति का खेल या सच में कोई गड़बड़?

अब तो मामला गरमा गया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चिदंबरम का साथ दिया है, जबकि भाजपा वाले इसे “झूठ फैलाने की साजिश” बता रहे हैं। political analysts की राय? वो कहते हैं कि ऐसे बिना सबूत के आरोपों से चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होते हैं। खासकर तब, जब ECI का पूरा डेटा public domain में उपलब्ध हो। पर सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ political point scoring का मामला है?

अब आगे क्या होगा? 3 संभावनाएं

पहली बात – ECI ने सभी पार्टियों से facts check किए बिना बयान न देने को कहा है। दूसरा – अगर विपक्ष इस मुद्दे को और उछालता है, तो आयोग legal action भी ले सकता है। और तीसरा – ये मामला एक बड़े सवाल को उठाता है: कैसे ensure करें कि electoral process की credibility बनी रहे? आने वाले दिनों में इस पर ज़ोरदार बहस होनी तय है।

एक बात तो clear है – ECI का ये जवाब देश को याद दिलाता है कि हमारी electoral system दुनिया के सबसे मज़बूत systems में से एक है। अब देखना यह है कि क्या विपक्ष अपने stand पर कायम रहेगा, या फिर डेटा के सामने झुक जाएगा। क्योंकि अंततः, numbers never lie… है न?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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