असम सरकार का बड़ा ऐलान: “असमिया और कानूनी भारतीय नागरिकों को कोई खतरा नहीं!”
अरे भाई, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने तो आज एक बम्ब फोड़ दिया! उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि असमिया भाषा, संस्कृति और कानूनी भारतीय नागरिकों को कोई खतरा नहीं है। सच कहूं तो, यह बयान ऐसे समय आया है जब NRC और CAA को लेकर फिर से बहसें गर्म होने लगी थीं। तो क्या अब सब शांत हो जाएगा? चलिए देखते हैं…
असल में, असम का यह मुद्दा कोई नया नहीं है। दशकों से यहां नागरिकता और पहचान को लेकर तनाव चल रहा है। NRC की पूरी प्रक्रिया और फिर CAA के बाद तो स्थिति और गर्मा गई थी। लोगों को डर सता रहा था कि कहीं उनकी भाषा-संस्कृति पिछड़ न जाए। CM का यह बयान शायद इसी डर को दूर करने की कोशिश लगता है। पर क्या यह सिर्फ दिलासा देने वाली बात है या कुछ ठोस होगा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CM ने कई दिलचस्प बातें कहीं। एक तरफ तो उन्होंने असमिया भाषा और संस्कृति को बचाने की बात की, वहीं दूसरी तरफ कानूनी नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिया। सच पूछो तो, यह एक तरह का बैलेंसिंग एक्ट था। शायद उनका मकसद शांति बनाए रखना है। लेकिन क्या यह इतना आसान होगा?
अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखिए – AGP जैसे सहयोगी दल ने तो बयान का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि “अब काम दिखाओ!” वहीं कांग्रेस ने इसे चुनावी जुमला बताया। AASU जैसे संगठनों ने भी सीधे-सीधे पूछ लिया – “ये सब बातें हैं, पर एक्शन कब?” आम लोगों की राय? कुछ खुश हैं, कुछ शक्की। समझ सकते हैं न?
अब सवाल यह है कि आगे क्या? विश्लेषक कह रहे हैं कि यह मुद्दा लंबे समय तक चलेगा। अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई तो? फिर से प्रदर्शन? और सबसे बड़ी चुनौती – केंद्र सरकार की नीतियों के साथ तालमेल बैठाना। नहीं तो यह सब बयानबाजी ही रह जाएगी। क्या आपको नहीं लगता कि असम को अब कुछ ठोस चाहिए?
[एक साइड नोट: यह लेख लिखते वक्त चाय की तीसरी प्याली चल रही थी। कभी-कभी राजनीति समझने के लिए थोड़ा कैफीन जरूरी होता है!]
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असम सरकार का बड़ा ऐलान: CM हिमंत बिस्वा शर्मा के वादे पर सवालों के जवाब
अरे भाई, असम सरकार ने तो हाल ही में एक बड़ा ऐलान कर दिया है न? सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकान तक, हर जगह इसी की चर्चा है। तो चलिए, इस पूरे मामले को थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं।
1. असम सरकार ने यह ऐलान क्यों किया? असली मकसद क्या है?
देखिए, बात सीधी है – लोगों को भरोसा दिलाना। जब से NRC और CAA जैसे मुद्दे उठे हैं, लोगों के मन में एक डर सा बैठ गया था। CM हिमंत बिस्वा शर्मा ने बस यह कहा है कि “असमिया और असली भारतीय नागरिकों को कोई खतरा नहीं।” बिल्कुल वैसे ही जैसे आपके घर का ताला सिर्फ बाहर वालों के लिए होता है, अंदर वालों के लिए नहीं।
2. यह NRC-CAA वाले मसले से जुड़ा है क्या?
सच कहूं तो… हां, जुड़ा तो है। पर इतना भी नहीं जितना लोग सोच रहे हैं। असल में यह सरकार की तरफ से एक तरह का assurance है। जैसे कोई बड़ा भाई कह दे कि “घबराओ मत, मैं हूं न!” वैसा ही कुछ।
3. बाहर के लोगों के लिए क्या मतलब है इसका?
अच्छा सवाल पूछा! सरकार ने साफ-साफ कह दिया है – यह policy सिर्फ illegal immigrants के खिलाफ है। मतलब अगर आप बिहार, यूपी या महाराष्ट्र के हैं और legally असम में रह रहे हैं, तो आपको तो बिल्कुल भी फिक्र करने की जरूरत नहीं। हां, illegal activities में लिप्त लोगों के लिए जरूर मुसीबत आने वाली है।
4. क्या सच में असम के लोगों को jobs और resources में प्राथमिकता मिलेगी?
सुनिए, यहां बात समझने वाली है। एक तरफ तो हां, सरकार का मकसद स्थानीय लोगों के हक की रक्षा करना है। पर दूसरी तरफ, यह कोई “बाहर वाला भाग जाओ” वाली बात नहीं है। जैसे आपके घर में पहले आपके बच्चों को खाना मिलता है, पर मेहमान को भी नहीं टालते न? कुछ वैसा ही concept है। Illegal चीजों पर रोक लगाना मुख्य मकसद है।
तो ये थी इस पूरे मामले की सरल व्याख्या। कैसा लगा? कोई और सवाल हो तो पूछिए जी!
Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com