दिल्ली नेवी HQ में ISI जासूस! विशाल की गद्दारी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी
परिचय
दिल्ली नेवी हेडक्वार्टर का ये मामला सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। एक छोटे से क्लर्क विशाल ने पैसों के लालच में देश के साथ धोखा किया और ISI को नेवी की सबसे गोपनीय जानकारियां बेच डालीं। असल में, ये कोई सामान्य डेटा लीक नहीं था – इसमें ऑपरेशन सिंदूर जैसी अहम योजनाएं शामिल थीं। देखा जाए तो ये मामला हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है।
मामले की पृष्ठभूमि
विशाल कौन था ये शख्स?
विशाल नेवी HQ में एक साधारण सा UDC क्लर्क था। लेकिन इसी ‘साधारण’ नौकरी के दौरान उसे कई ऐसी फाइल्स और डॉक्युमेंट्स तक पहुंच मिल गई जो उसके पद से कहीं ऊपर थीं। और यहीं से शुरू हुई उसकी गद्दारी की कहानी।
कैसे शुरू हुआ ये सब?
2022 के आसपास विशाल की मुलाकात ISI के एजेंट्स से हुई। पहले तो छोटी-मोटी जानकारियां दीं, फिर धीरे-धीरे वो पूरी तरह उनके जाल में फंस गया। पैसों का लालच इतना बड़ा था कि देशभक्ति भूल गई।
जासूसी के तरीके और असर
डेटा चोरी का तरीका
विशाल ने दो तरह से काम किया – कभी फाइल्स की फोटो खींचकर, तो कभी डायरेक्ट डिजिटल डेटा ट्रांसफर करके। हैरानी की बात ये है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी टॉप सीक्रेट योजना की जानकारी भी उसने लीक कर दी। Experts का कहना है कि इससे हमारी नेवी की रणनीतियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
अब सवाल ये उठता है कि अगर एक छोटा सा क्लर्क इतना बड़ा डेटा लीक कर सकता है, तो हमारी सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां खामियां हैं? इससे दुश्मन देशों को हमारी कमजोरियों का पता चल गया है, जो आने वाले समय में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
गिरफ्तारी और जांच
कैसे पकड़ा गया?
यहां दिलचस्प बात ये है कि विशाल कोई मास्टरमाइंड नहीं था। उसके एक सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों को उस पर शक हुआ। फिर तो उसकी हर एक्टिविटी पर नजर रखी गई और आखिरकार उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
जांच कहां तक पहुंची?
अभी तक की जांच में पता चला है कि विशाल ने कम से कम 6-7 बड़ी जानकारियां लीक कीं। साइबर एक्सपर्ट्स उसके फोन और लैपटॉप से डेटा रिकवर करने में जुटे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये सारी जानकारियां ISI तक पहुंच गईं या कुछ रोक ली गईं?
सवाल और चुनौतियां
सुरक्षा में कमियां
इस मामले ने हमारे सिस्टम की कई कमजोरियां उजागर कर दी हैं। पहला तो ये कि इतने संवेदनशील विभाग में Employees की बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं होती? दूसरा, क्या सभी को इतनी एक्सेस देना जरूरी था? और तीसरा, डेटा लीक रोकने के लिए हमारे पास क्या सिस्टम है?
क्या होगी सजा?
विशाल पर Official Secrets Act के तहत केस दर्ज हुआ है। Legal Experts के मुताबिक, अगर उसे दोषी पाया गया तो उसे 14 साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ सजा से ऐसे मामले रुक पाएंगे?
निष्कर्ष
ये मामला हमें एक बड़ा सबक देता है। सिर्फ बाहरी दुश्मनों से ही नहीं, अंदरूनी खतरों से भी सावधान रहने की जरूरत है। सरकार को अब सुरक्षा प्रोटोकॉल्स को और सख्त बनाना होगा। वहीं आम जनता की भी जिम्मेदारी है कि ऐसे संदिग्ध लोगों के बारे में Agencies को सूचित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. विशाल ने कौन-कौन सी जानकारियां लीक कीं?
ऑपरेशन सिंदूर के अलावा, नेवी की डिप्लॉयमेंट प्लानिंग, कुछ वेपन सिस्टम्स और कोस्टल सिक्योरिटी से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं।
2. ISI के साथ उसका संपर्क कैसे हुआ?
शुरुआत सोशल मीडिया से हुई। फिर व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर बातचीत होने लगी। पैसों का लालच बढ़ता गया और विशाल पूरी तरह उनके कंट्रोल में आ गया।
3. इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अभी तक विशाल समेत 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जांच अभी जारी है, हो सकता है और नाम सामने आएं।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com