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SC ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन को लेकर UP सरकार को लगाई फटकार, HC के फैसले तक समिति का प्रस्ताव

SC ने UP सरकार को जमकर लताड़ा – बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन पर HC के फैसले तक रोक!

अरे भई, सुप्रीम कोर्ट ने तो आज यूपी सरकार की खूब धुनाई कर दी! बात चल रही थी मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन की। कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया – “भाई, हाईकोर्ट का फैसला आने तक नई समिति बनाने का खेल बंद!” असल में, सरकार ने जल्दबाजी में एक नई प्रबंधन समिति बनाने की कोशिश की थी, जबकि मामला पहले से ही हाईकोर्ट में चल रहा था। ऐसे में SC ने इसे लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये सख्त टिप्पणी की।

पूरा माजरा क्या है?

देखिए, बांके बिहारी मंदिर तो वैसे भी विवादों से घिरा रहता है। यूपी सरकार ने अचानक मंदिर के प्रबंधन में बदलाव करने का फैसला किया। लेकिन सवाल यह है कि जब पहले से ही हाईकोर्ट में मामला चल रहा था, तो ये जल्दबाजी क्यों? कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर के फंड मैनेजमेंट में गड़बड़ियाँ हो रही थीं। वहीं सरकार का पक्ष है कि वो तो बस बेहतर प्रबंधन चाहती थी। पर सुप्रीम कोर्ट को ये तर्क नहीं भाया।

कोर्ट ने क्या कहा?

SC की पीठ ने तो साफ शब्दों में कह दिया – “ये सरकारी कार्रवाई अवैध है!” एक तरफ तो हाईकोर्ट में केस चल रहा है, दूसरी तरफ सरकार नई समिति बना रही है? ये कैसा न्याय? कोर्ट ने अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद रखी है और सरकार को हाईकोर्ट में पेंडिंग केस की पूरी डिटेल देने को कहा है। सच कहूँ तो, ये फैसला बताता है कि कोर्ट सरकारों को मनमानी नहीं करने देगा।

लोग क्या कह रहे हैं?

अब इस पर तो हर कोई अपनी-अपनी राय दे रहा है। जिन लोगों ने केस किया था, वो खुश हैं कि अब मंदिर का प्रबंधन पारदर्शी होगा। सरकार वालों ने कहा – “हम तो कोर्ट के आदेश मानेंगे”, पर साथ ही ये भी कहा कि उनका मकसद सिर्फ अच्छा प्रबंधन था। भक्तों में भी मतभेद है – कुछ कह रहे हैं सरकार सही थी, तो कुछ कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। मजे की बात ये कि ये मामला अब देश के दूसरे बड़े मंदिरों के लिए भी मिसाल बन सकता है!

अब आगे क्या?

अब तो ये मामला हाईकोर्ट में अपना रास्ता तय करेगा। SC ने साफ कर दिया है कि जब तक कोर्ट प्रोसेस पूरी नहीं हो जाती, सरकार कुछ नहीं कर सकती। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इसका असर दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी पड़ेगा, खासकर जहाँ सरकारी दखल को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

सच तो ये है कि ये केस एक बार फिर दिखाता है कि हमारे देश में न्यायपालिका कितनी मजबूत है। अब तो यूपी सरकार को हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना होगा। फिलहाल तो उनकी प्रस्तावित समिति वाला मामला फाइलों में ही दबा रहेगा। क्या पता, ये केस भविष्य में धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के तरीके को ही बदल दे!

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SC का यह फैसला सिर्फ़ बांके बिहारी मंदिर के मामले में पारदर्शिता लाने वाला कदम नहीं है, बल्कि एक बड़ा संदेश भी है। सोचिए, अगर धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन ही साफ़-सुथरा नहीं होगा, तो आम भक्तों का क्या होगा? यह फैसला सरकारों को याद दिलाता है – भगवान के घर भी कानून का राज चलना चाहिए।

अब बात UP सरकार की। HC का फैसला आने तक उन्हें क्या करना चाहिए? मेरी राय में, एक ऐसी समिति बनाने की ज़रूरत है जो न सिर्फ़ नियमों का पालन करे, बल्कि भक्तों के विश्वास को भी सही तरीके से संभाल सके। थोड़ा संतुलन तो बनाना ही पड़ेगा न!

और सच कहूँ तो, यह मामला सिर्फ़ इस एक मंदिर तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में ऐसे कितने ही विवाद सामने आ सकते हैं। तैयार रहिए!

क्या आपको लगता है मंदिर प्रबंधन में सरकार की भूमिका ज़्यादा होनी चाहिए? कमेंट में बताइए!

SC ने UP सरकार को बांके बिहारी मंदिर मामले में जमकर लताड़ा – जानिए पूरा माजरा

1. आखिर SC ने UP सरकार को खरी-खरी सुनाने की नौबत क्यों ला दी?

देखिए, मामला कुछ ऐसा है – HC का फैसला आने से पहले ही सरकार ने अपनी मनमानी करते हुए एक समिति गठित कर दी। और भईया, SC को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया! कोर्ट ने साफ कहा कि यह तो न्यायिक प्रक्रिया में सीधा दखल है। सच कहूं तो, सरकार ने जल्दबाजी में गलती कर दी।

2. HC का फैसला अभी बाकी है – पर किस बात पर?

असल में, पूरा झगड़ा मंदिर के प्रबंधन को लेकर है कि आखिर इसकी कमान किसके हाथ में होगी। SC ने तो साफ-साफ कह दिया – “भई, HC का फैसला आने तक UP सरकार को चुपचाप बैठना होगा।” एक तरह से सरकार के हाथ बांध दिए गए हैं।

3. SC ने सरकार को क्या-क्या हिदायतें दीं?

कोर्ट ने सरकार को दो टूक लहजे में समझाया – “HC का फैसला आने तक इंतज़ार करो और अपनी मर्जी से कुछ भी करने की कोशिश मत करो।” वैसे, सरकार द्वारा बनाई गई समिति के प्रस्ताव पर भी रोक लगा दी गई है। सीधे शब्दों में कहें तो, सरकार को एक तरह से ‘टाइम आउट’ दे दिया गया है!

4. यह केस इतना चर्चा में क्यों है? असली मुद्दा क्या है?

अरे भाई, यह तो सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं है। इसमें तो बड़ा सवाल छुपा है – धार्मिक स्थलों पर सरकार का कितना दखल ठीक है? SC का यह फैसला तो अब एक नजीर बन जाएगा। सोचिए, अगर आगे किसी मंदिर-मस्जिद में ऐसा ही विवाद हो तो? तब तो यह केस याद किया जाएगा। है न दिलचस्प बात?

Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com

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