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“समुद्र पर भारत की बड़ी जीत! 67 साल पुराने कानून को सरकार ने किया खत्म”

समुद्र पर भारत की बड़ी जीत! 67 साल पुराना कानून अब इतिहास

अरे वाह! भारत सरकार ने आखिरकार वो कर दिखाया जिसका इंतज़ार shipping industry को सालों से था। 1958 का वो पुराना Merchant Shipping Act, जो हमारे बाप-दादाओं के ज़माने का था, अब रिटायर हो गया है। संसद में पास हुए नए बिल ने न सिर्फ एक पुराने कानून को अलविदा कहा है, बल्कि भारत को global maritime map पर नई पहचान दिलाने का रास्ता भी खोल दिया है। सच कहूँ तो, ये उतना ही बड़ा कदम है जितना कि किसी जहाज़ का नए समुद्री रास्ते पर निकलना।

क्यों था ये पुराना कानून अब तक का सबसे बड़ा पेंच?

देखिए न, 1958 का वो कानून तो अंग्रेजों के ज़माने की सोच पर बना था। उस वक़्त न तो डिजिटलाइज़ेशन था, न global supply chains इतने complex थे। आज जब पूरी दुनिया का shipping industry क्लाउड पर चल रहा है, हम अभी तक कागज़ों के ढेर में उलझे हुए थे। मज़े की बात ये कि International Maritime Organization (IMO) के मानकों से हमारा पुराना कानून कहीं मेल नहीं खाता था। क्या आपको पता है? हमारे नाविकों को अभी तक वो basic rights भी नहीं मिल पा रहे थे जो दूसरे देशों में decades से हैं!

अब क्या बदलेगा? असली मसाला यहाँ है!

p>नया बिल लाएगा:
– जहाज़ मालिकों के लिए ‘रेड टेप’ कम, business ज्यादा
– नाविकों को मिलेंगे fixed working hours – जी हाँ, अब उन्हें भी 9-to-5 वाली सुविधा मिलेगी!
– बेहतर insurance और service conditions

पर सबसे ज़्यादा interesting बात ये है कि अब foreign investors को भारत में shipping business करने में वो झिझक नहीं होगी। एक तरफ तो हम ‘Make in India’ की बात करते हैं, दूसरी तरफ हमारे ही कानून उसके रास्ते में रोड़ा बनते थे। अब नहीं बनेंगे!

किसका क्या रिएक्शन? चलिए सुनते हैं!

Shipping मंत्री जी तो मानो खुशी से उछल पड़े – “आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ये मील का पत्थर है!” वहीं industry के लोगों का कहना है कि ये बिल तो game changer साबित होगा। पर मुझे सबसे ज़्यादा खुशी उन नाविकों के लिए हो रही है जिनकी आवाज़ अब तक नहीं सुनी जा रही थी। उनके लिए ये सच में एक बड़ी जीत है।

आगे का रास्ता: क्या है प्लान?

अभी तो बस राष्ट्रपति की मुहर लगनी बाकी है, जो कि formal ही है। असली चुनौती होगी इसे सही तरीके से implement करना। सरकार का दावा है कि 2030 तक हम दुनिया के टॉप-10 shipping nations में शामिल होंगे। थोड़ा ambitious लगता है न? पर अगर ये बिल सही से काम कर गया, तो who knows! Blue economy में हमारा दबदबा बढ़ सकता है।

एक बात तो तय है – आज का दिन भारत के maritime इतिहास में golden letters में लिखा जाएगा। अब देखना ये है कि क्या हम समंदर की लहरों पर अपनी किस्मत लिख पाएंगे। क्योंकि जहाज़ तो अब छूट चुका है, मंज़िल अभी दूर है!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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