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NYC मेयर पद के उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी का चार्टर स्कूलों के खिलाफ युद्ध की घोषणा, अभिभावकों और समर्थकों में आक्रोश

NYC मेयर की रेस में ज़ोहरान ममदानी का बम: “चार्टर स्कूलों से जंग करूंगा!” – पेरेंट्स गुस्से में

अरे भाई, न्यूयॉर्क की राजनीति में फिर से तूफान आ गया है! Socialist Democratic पार्टी के मेयर उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी ने तो बिल्कुल बम फोड़ दिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा – अगर मेयर बने, तो charter schools के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे। सुनकर हैरानी हुई न? असल में ये स्कूल तो वो हैं जो गरीब और अल्पसंख्यक बच्चों को पढ़ाते हैं। अब सवाल यह है कि इनके खिलाफ बोलकर ममदानी ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मारी?

चार्टर स्कूल – समझिए पूरा माजरा

देखिए, पहले ये समझ लीजिए कि ये charter schools आखिर हैं क्या चीज। सरल भाषा में कहें तो ये सरकारी फंडिंग वाले स्कूल हैं, लेकिन इन्हें थोड़ी आज़ादी होती है। जैसे कोई स्टार्टअप – नियम कम, नवाचार ज़्यादा। पर सच कहूं तो इनकी कामयाबी पर बहस अलग है। कुछ कहते हैं ये बेहतर हैं, तो कुछ इन्हें सिस्टम के लिए खतरा मानते हैं।

अब ममदानी साहब… ये तो पहले से ही प्रगतिशील विचारों के लिए जाने जाते हैं। शिक्षा में बड़े बदलाव चाहते हैं। उनका मानना है कि ये चार्टर स्कूल सामान्य सरकारी स्कूलों को कमज़ोर कर रहे हैं। लेकिन यहां दिक्कत क्या है? जिन बच्चों के पास कोई विकल्प नहीं, उनके लिए तो ये स्कूल जीवन रेखा की तरह हैं। सच बताऊं, मामला बहुत पेचीदा है।

धमाकेदार अपडेट: क्या-क्या हो रहा है?

ममदानी ने तो साफ कह दिया – चार्टर स्कूलों की फंडिंग ही बंद कर देंगे! ये बयान सुनते ही सोशल मीडिया पर आग लग गई। #SaveCharterSchools ट्रेंड करने लगा। पेरेंट्स का कहना है – “हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है!” एक मां ने तो मार्मिक बात कही: “मेरा बेटा पहले फेल हो रहा था, चार्टर स्कूल ने उसे नया जीवन दिया।” सच में, दिल छू लेने वाली बात है।

वहीं राजनीतिक गलियारों में भी हंगामा मचा हुआ है। Republican तो खैर विरोध करेंगे ही, लेकिन Democratic पार्टी के भी कई नेता नाराज़ हैं। उनका कहना है – “ये तो शिक्षा के अवसरों को ही सीमित करने जैसा है।” एक तरफ तो सुधार की बात, दूसरी तरफ बच्चों का भविष्य। कठिन स्थिति है।

अब आगे क्या?

असल सवाल यह है कि अगर ममदानी जीत भी गए, तो क्या वो अपना ये प्लान लागू कर पाएंगे? देखिए न, चार्टर स्कूलों के समर्थक कम नहीं हैं। फिर राज्य स्तर पर इन्हें मान्यता मिली हुई है – यानी कानूनी लड़ाई भी हो सकती है।

मज़ेदार बात ये है कि ये विवाद शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी समस्या को उजागर करता है। एक तरफ सबको समान शिक्षा चाहिए, दूसरी तरफ विकल्प भी तो चाहिए। अब देखना ये है कि ये नौटंकी किसके पक्ष में जाती है। और हां, सबसे बड़ा सवाल – आखिरकार बच्चों का भला कैसे होगा? क्योंकि अंत में तो यही मायने रखता है, है न?

ज़ोहरान ममदानी का चार्टर स्कूलों के खिलाफ यह रुख… सच कहूं तो थोड़ा हैरान करने वाला है। NYC के अभिभावकों की चिंता समझ आती है – आखिर education का सवाल है ना? लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नीति वोटरों को पसंद आएगी? या फिर, देखा जाए तो, NYC में इसका उल्टा असर होगा?

एक तरफ तो ममदानी सिस्टम बदलने की बात कर रहे हैं… पर दूसरी तरफ, parents और teachers दोनों ही कन्फ्यूज्ड हैं। असल में, बात सिर्फ चार्टर स्कूलों की नहीं, बल्कि पूरी education policy की है। और यहाँ गलती हो गई तो? फिर पछताने से कुछ नहीं मिलेगा।

हालांकि, politics है – कुछ भी हो सकता है। आपको क्या लगता है?

NYC मेयर की रेस में ज़ोहरान ममदानी का चार्टर स्कूल वाला विवाद – जानिए पूरी कहानी

ममदानी ने चार्टर स्कूलों के खिलाफ क्या बोला है?

देखिए, ममदानी साहब ने तो बड़ा बोल दिया है! उनका कहना है कि NYC के चार्टर स्कूलों को अब और फंडिंग नहीं मिलेगी, न ही वो expand कर पाएंगे। उनका तर्क? “ये सिस्टम तो पब्लिक स्कूलों के साथ अनफेयर है भाई!” लेकिन सच कहूं तो, ये सिर्फ एक तरफा नजरिया है या जायज मांग? आप ही बताइए।

पेरेंट्स का गुस्सा – क्यों भड़के लोग?

अरे भई, सीन तो ये है कि जिनके बच्चे चार्टर स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वो तिलमिला उठे हैं। क्यों न हो? उनका कहना है कि यहां पढ़ाई का लेवल कुछ अलग है। और अब अगर ऑप्शन ही कम हो जाएंगे तो? सोचिए, आप अपने बच्चे का एडमिशन कहां कराएंगे? एकदम सही नाराजगी है उनकी।

चार्टर vs पब्लिक – फर्क समझिए

ठीक है, थोड़ा बेसिक समझ लेते हैं। दोनों ही सरकारी पैसे से चलते हैं, मगर चार्टर स्कूलों के अपने नियम हैं। करिकुलम भी थोड़ा अलग, टीचर्स का अप्रोच भी अलग। और हां, रिजल्ट? वो भी अक्सर बेहतर ही आते हैं। तो सवाल ये कि अगर सिस्टम काम कर रहा है तो उसे बदलने की क्या जरूरत?

क्या अब डूब जाएंगे चार्टर स्कूल?

सुनिए, अगर ममदानी जीते तो हां, मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पर याद रखिए, NYC की राजनीति कोई आसान खेल नहीं। कोर्ट केस होंगे, विरोध प्रदर्शन होंगे। तो फिलहाल तो यही कहा जा सकता है – “कुछ कहा नहीं जा सकता!” हालांकि, एक बात तय है – ये बहस अभी लंबी चलने वाली है।

Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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