ghost employees municipal corporation salary higher than ias 20250807155457732542

“IAS से भी ज्यादा सैलरी पा रहे हैं नगर निगम के ‘भूतिया’ कर्मचारी! जानें पूरा मामला”

IAS से भी ज़्यादा कमा रहे हैं नगर निगम के ‘भूत’ कर्मचारी! सच सुनकर दंग रह जाएंगे

अहमदाबाद नगर निगम का ये घोटाला सुनकर आपका दिमाग़ चकरा जाएगा। सोचिए, कुछ ऐसे कर्मचारी जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है, उन्हें महीने के 3 लाख रुपए से ज़्यादा की सैलरी मिल रही है! और ये कोई एक-दो महीने की बात नहीं – अब तक इन ‘भूतों’ पर 17 करोड़ रुपए पानी की तरह बहा दिए गए। सरकारी खज़ाने की ये लूट देखकर तो लगता है कि हमारे टैक्स के पैसे का क्या हाल हो रहा है।

पूरी कहानी: शुरुआत कहाँ से हुई?

ये कोई रातों-रात नहीं हुआ भाई। सालों से चल रहा ये खेल तब पकड़ में आया जब किसी ने RTI (Right to Information) के तहत वेतन रिकॉर्ड्स माँगे। और फिर क्या? पता चला कि पेरोल में ऐसे नाम शामिल हैं जो सिर्फ़ कागज़ों पर ही मौजूद हैं। असल में देखा जाए तो ये पूरा सिस्टम ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था। है न मज़ेदार बात?

ताज़ा अपडेट: अब तक क्या पता चला?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और भी गंभीर होता गया। सबसे हैरानी की बात ये कि कुछ ‘भूत’ कर्मचारी तो IAS अधिकारियों से भी ज़्यादा कमा रहे थे! अब आप ही बताइए, ये कैसा नाटक है? अहमदाबाद प्रशासन ने तो जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल ये है कि इतने सालों तक ये सब कैसे चलता रहा? सच कहूँ तो ये पूरा मामला हमारी व्यवस्था की खामियों को बेपर्दा कर देता है।

लोग क्या कह रहे हैं?

इस मामले ने तो अहमदाबाद में तूफान ला दिया है। नगर निगम के एक अधिकारी का कहना है, “हम जल्द कार्रवाई करेंगे” – पर सवाल ये कि इतने सालों में आँखें क्यों बंद थीं? एक RTI एक्टिविस्ट तो बिल्कुल सही कह रहे हैं – ये सरकारी पैसे की सीधी लूट है। और हम जैसे आम नागरिक? हम तो बस टैक्स भरते रहिए, बाकी पता नहीं कहाँ जाता है हमारा पैसा!

अब आगे क्या?

अब देखना ये है कि क्या सच में दोषियों पर PCA (Prevention of Corruption Act) के तहत केस होगा, या फिर ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा? कुछ नए सिस्टम जैसे बायोमेट्रिक अटेंडेंस या डिजिटल ऑडिट की बात हो रही है – पर क्या ये सच में लागू होंगे? राजनीतिक रूप से देखें तो अगले चुनावों में ये मुद्दा ज़रूर उछलेगा। पर असल सवाल तो ये है कि क्या सच में कुछ बदलेगा?

आखिरी बात

सच तो ये है कि ये घोटाला हमारी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देता है। अगर ऐसे ही मामले होते रहे, तो जनता का विश्वास कैसे बनेगा? प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने ही होंगे – वरना ये ‘भूत’ तो खाते ही रहेंगे, और हम जैसे लोग सिर्फ़ देखते रह जाएँगे। क्या आपको नहीं लगता कि अब वक्त आ गया है इस तरह के घोटालों को रोकने का?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

संसद का खर्च सत्र के दिनों में क्यों बढ़ जाता है? जानिए बाकी दिनों में क्या होता है

** “रूसी बच्ची की मासूम कन्नड़ कविता ने बेंगलुरु के दिल जीत लिए | वायरल वीडियो देखें!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments