अहमदाबाद प्लेन क्रैश: कॉकपिट वीडियो रिकॉर्डिंग पर इतना हंगामा क्यों?
भाई, अहमदाबाद में हुआ वो एयर इंडिया का हादसा तो आपने भी देखा होगा। सच कहूं तो, ऐसी खबरें देखकर दिल दहल जाता है। पर असल सवाल ये है कि इसके बाद अचानक CVR (वो भी वीडियो वाला!) की मांग इतनी क्यों बढ़ गई? जांच एजेंसियों का तो कहना है – “अरे यार, अगर कॉकपिट का वीडियो होता तो सारा पजल सॉल्व हो जाता!” लेकिन क्या सच में ऐसा है?
पूरा माजरा क्या है?
देखिए, ये कोई पहली बार नहीं है जब प्लेन क्रैश के बाद सवाल उठे हैं। असल में तो हमारे विमानों में पहले से ही दो चीजें लगी होती हैं – CVR (जो पायलट्स की बातें रिकॉर्ड करता है) और FDR (जो टेक्निकल डेटा देता है)। पर वीडियो? नहीं यार, वो नहीं होता। और अब इस हादसे के बाद सबको इसकी कमी खलने लगी है।
एक तरफ तो ये सच है कि वीडियो से जांच आसान हो जाएगी। लेकिन दूसरी तरफ… क्या आपको पता है कि पायलट्स के यूनियन्स इसके खिलाफ हैं? उनका कहना है – “भई, ये तो हमारी प्राइवेसी पर हमला है!”
अब तक क्या हुआ है?
जांच रिपोर्ट आई तो पता चला – कॉकपिट में आखिर हुआ क्या था, इसका कोई क्लियर पता ही नहीं चल पाया। और अब? अब तो DGCA वाले भी सीरियस हो गए लगते हैं। कुछ देश तो पहले ही इस रास्ते पर निकल चुके हैं। लेकिन भारत? अभी तक सिर्फ बातें ही बातें हैं।
मजे की बात ये कि ICAO (वो इंटरनेशनल एविएशन वाला संगठन) भी इस मामले में दिलचस्पी दिखा रहा है। क्या पता, शायद कोई ग्लोबल स्टैंडर्ड ही बना दे!
लोग क्या कह रहे हैं?
अब यहां तो हर कोई अपनी-अपनी राग अलाप रहा है:
• एक्सपर्ट्स: “वीडियो से जांच में मदद मिलेगी, लेकिन प्राइवेसी का भी ख्याल रखना होगा” (यानी बात दोनों तरफ की)
• पायलट्स: “ये तो हम पर बेवजह का प्रेशर डालने जैसा है!” (समझ सकते हैं उन्हें)
• यात्री: “भई सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं!” (और इनकी बात में भी दम है)
आगे का गेम प्लान क्या है?
अब देखना ये है कि DGCA वाले क्या करते हैं। कोई नई पॉलिसी आएगी? या फिर बातों ही बातों में सब खत्म हो जाएगा? और ICAO… वो तो पूरी दुनिया के लिए रूल्स बनाने वाला है।
अगर वीडियो रिकॉर्डिंग मंजूर हो भी गई तो? फिर तो टेक्निकल और लीगल दोनों तरह के झंझट शुरू हो जाएंगे। सच कहूं तो, ये कोई आसान फैसला नहीं होगा।
तो फाइनल वर्ड: अहमदाबाद क्रैश ने फिर से एविएशन सेफ्टी की बहस छेड़ दी है। वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग अब जोर पकड़ रही है, पर इसे लागू करना इतना आसान नहीं। आने वाले दिनों में जो भी फैसला होगा, वो पूरे इंडस्ट्री के लिए अहम होगा। एक तरह से देखा जाए तो… सुरक्षा बनाम प्राइवेसी की ये लड़ाई अभी जारी रहेगी!
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अहमदाबाद के प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट आई तो सबके मन में एक ही सवाल उठा – क्या हमारे विमान सुरक्षा मानक वाकई पर्याप्त हैं? देखा जाए तो ये सवाल नया नहीं है, लेकिन इस बार कॉकपिट वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग ज़ोर पकड़ रही है। और सच कहूं तो ये काफी समझदारी भरी मांग लगती है। आखिरकार, जब ब्लैक बॉक्स ही कभी-कभी पूरी कहानी नहीं बता पाता, तो वीडियो फुटेज क्यों नहीं होना चाहिए?
असल में बात ये है कि दुनिया भर में इस पर बहस चल रही है। कोई कहता है यह पायलट्स की प्राइवेसी पर हमला है, तो कोई इसे सेफ्टी का ज़रूरी कदम बताता है। मेरा मानना? जब जानें दांव पर लगी हों, तो थोड़ी असुविधा तो झेलनी ही पड़ेगी। हालांकि, एक अच्छी बात ये है कि इस घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शायद इसी बहाने कुछ ठोस बदलाव आएं।
और हां… ये घटना हमें याद…
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com