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एअर इंडिया की लंदन-दिल्ली फ्लाइट में 11 घंटे की भीषण देरी! यात्रियों को फुल रिफंड का ऐलान

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एअर इंडिया की लंदन-दिल्ली फ्लाइट में 11 घंटे की देरी! यात्रियों का सब्र टूटा, पूरा रिफंड देने का ऐलान

सोचिए, आप Heathrow से दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने जा रहे हैं और वहीं अटक जाएं… पूरे 11 घंटे! एअर इंडिया की फ्लाइट AI2018 के यात्रियों के साथ ठीक यही हुआ। तकनीकी गड़बड़ी और लंदन एयरपोर्ट के रात के कर्फ्यू ने मिलकर क्या हालात बना दिए! असल में, देरी इतनी ज्यादा थी कि एयरलाइन को माफी मांगने के साथ-साथ पूरा रिफंड या फिर नया टिकट फ्री में देने का ऑफर देना पड़ा। क्या आप मानेंगे?

क्या हुआ था असल में?

देखा जाए तो ये कोई नई बात नहीं। एअर इंडिया की ये लंदन-दिल्ली फ्लाइट तो रोज ही चलती है। लेकिन उस दिन दो मुसीबतें एक साथ आ गईं – पहले तो प्लेन में कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम आई, और फिर Heathrow का वो सख्त नियम कि रात 11:30 के बाद कोई फ्लाइट नहीं। मरम्मत में वक्त लगा तो कर्फ्यू टाइम से पहले प्लेन तैयार ही नहीं हो पाया। नतीजा? अगले दिन सुबह 9 बजे तक का इंतजार!

यात्रियों ने झेला क्या?

अब सोचिए… रात 10 बजे की फ्लाइट और अगले दिन सुबह 9 बजे उड़ान! बीच में? होटल में रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था तो एयरलाइन ने की, लेकिन 11 घंटे का ये समय किसी टॉर्चर से कम नहीं रहा होगा। खैर, एअर इंडिया ने दो विकल्प दिए – या तो पैसा वापस ले लो, या फिर किसी और दिन के लिए फ्री में टिकट बुक कर लो। पर सवाल ये है कि क्या ये काफी है?

सोशल मीडिया पर आग, एयरलाइन की माफी

अब जाहिर है, यात्री चुप क्यों बैठते! Twitter और Facebook पर एअर इंडिया को जमकर कोसा गया। एक यात्री ने तो यहां तक कहा – “11 घंटे? सिर्फ माफी काफी नहीं है!” एयरलाइन की तरफ से बयान आया कि टेक्निकल इश्यू और एयरपोर्ट रूल्स की वजह से ऐसा हुआ। विमानन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे केसों के लिए एयरलाइंस को बेहतर प्लान बनाने चाहिए। सच कहूं तो, ये सलाह तो बहुत पहले ही दी जानी चाहिए थी!

अब आगे क्या?

इस घटना के बाद एअर इंडिया ने इंटरनल जांच शुरू कर दी है। नई गाइडलाइंस आने वाली हैं, ऐसा कहा जा रहा है। यात्रियों की मांग साफ है – देरी हो तो तुरंत सही जानकारी दो। DGCA भी इस मामले में दखल दे सकता है। सच तो ये है कि ये केस सिर्फ एक एयरलाइन की नहीं, पूरे एविएशन सेक्टर की समस्या उजागर करता है। एयरपोर्ट और एयरलाइंस को मिलकर काम करना होगा, वरना ऐसे हादसे फिर होंगे। और हम यात्री? हम तो बस यही कहेंगे – भगवान भरोसे!

एक तरफ तो हम ‘वोकल फॉर लोकल’ की बात करते हैं, दूसरी तरफ हमारी खुद की एयरलाइन्स ऐसे हालात पैदा करती हैं। आखिर कब सुधरेगा ये सिस्टम? सवाल तो यही है…

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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