कांग्रेस की ‘गलती’ या ‘साजिश’? पाकिस्तान बनने के पीछे नेहरू जी को ठहराया गया निशाना!
लोकसभा में आज क्या हंगामा हुआ, साथियों! गृह मंत्री अमित शाह ने तो जैसे राजनीतिक बम फोड़ दिया। बातचीत के बीच अचानक उन्होंने कांग्रेस और पंडित नेहरू पर ऐसा वार किया कि सदन में सन्नाटा छा गया। और बात क्या थी? उनका ये दावा: “पाकिस्तान बनना कांग्रेस की भूल थी, और नेहरू जी इसकी जड़ में थे।” है ना मज़ेदार? ये सब उन्होंने ‘ऑपरेशन महादेव’ के संदर्भ में कहा – जहां राजौरी में तीन आतंकी ढेर कर दिए गए थे।
इतिहास की किताब फिर खुली
अब यहां दिलचस्प बात ये है कि शाह ने 1947 के उन ज़ख्मों को फिर से छेड़ दिया जो शायद कभी भरने वाले नहीं। उनका कहना था कि पाकिस्तान आज भी हमारे खिलाफ आतंक export कर रहा है। और फिर उन्होंने जो कहा, सुनकर तो विपक्ष के पैरों तले ज़मीन खिसक गई: “ऑपरेशन में मारे गए ये तीनों आतंकी… पाकिस्तान के थे!” यानी साफ-साफ सबूत कि पड़ोसी मुल्क अभी भी हमें परेशान करने से बाज़ नहीं आता।
पर सवाल ये उठता है – क्या सच में नेहरू जी अकेले ज़िम्मेदार थे? शाह जी का तो यहां तक कहना था कि अगर तब कांग्रेस ने थोड़ी समझदारी दिखाई होती, तो शायद न पाकिस्तान बनता, न ये विभाजन का दर्द झेलना पड़ता। लेकिन… हमेशा की तरह यहां भी दोनों तरफ के तर्क हैं ना? सदन का माहौल तो देखने लायक था – एक तरफ भाजपा के जोशीले नेता, दूसरी तरफ विपक्ष गरज रहा था!
राजनीति का तापमान बढ़ा
और फिर क्या था – इस एक बयान ने तो पूरे दिल्ली की राजनीति को हिला कर रख दिया। कांग्रेस के खड़गे जी तो मानो आग बबूला हो गए। उन्होंने तुरंत जवाब दिया: “ये सरासर झूठ है! इतिहास को मोड़ने की सस्ती कोशिश!” वहीं भाजपा वालों का कहना था कि कांग्रेस को अपनी गलतियों का ईमानदारी से सामना करना चाहिए।
अब social media पर तो माजरा और भी रोचक हो गया। #NehruResponsible ट्रेंड करने लगा तो #CongressFault भी चल निकला। कुछ लोग पुराने कागज़ात ढूंढ-ढूंढकर पोस्ट कर रहे थे, तो कुछ का कहना था कि ये सब मौजूदा सरकार की नाकामियों को छुपाने की चाल है। सच क्या है? शायद इतिहास ही बता पाएगा।
अब आगे क्या?
देखिए, एक बात तो तय है – ये मुद्दा अभी जल्द खत्म होने वाला नहीं। संसद के अगले सत्र में तो शायद और भी धमाल होगा। विपक्ष दस्तावेज़ मांगेगा, सरकार जवाब देगी… और ये सिलसिला चलता रहेगा। कुछ विशेषज्ञ तो ये भी कह रहे हैं कि 2024 के चुनावों में ये एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। आखिरकार, भाजपा तो हमेशा से कांग्रेस को इतिहास की गलतियों का हिसाब मांगती आई है ना?
अमित शाह के इस बयान ने न सिर्फ पुराने घावों को हरा कर दिया है, बल्कि देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर नई बहस छेड़ दी है। 2024 नज़दीक आ रहा है… और ये देखना दिलचस्प होगा कि ये ‘इतिहास का खेल’ आने वाले दिनों में किस तरह की राजनीति करवाता है। क्या आपको नहीं लगता कि ये सब कुछ जानबूझकर चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है? सोचने वाली बात है!
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com