“अमित शाह और नीतीश कुमार 8 अगस्त को सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माँ जानकी के मंदिर की आधारशिला रखेंगे – बिहार चुनाव से पहले क्या है राजनीतिक संदेश?”

अमित शाह और नीतीश कुमार 8 अगस्त को सीतामढ़ी जाएंगे – क्या ये सिर्फ़ एक मंदिर का काम है या चुनावी चाल?

देखिए न, 8 अगस्त को बिहार में एक बड़ा कार्यक्रम होने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साथ-साथ सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माँ जानकी के मंदिर की नींव रखेंगे। अब सवाल यह है कि ये सिर्फ़ एक धार्मिक कार्यक्रम है या फिर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले की कोई चाल? आपको बता दूं, राजनीति में कोई भी कदम बिना किसी मकसद के नहीं उठाया जाता।

पुनौराधाम… ये नाम सुनकर ही दिमाग में सीता माता की छवि आ जाती है। कहते हैं यहीं पर उनका जन्म हुआ था। सच कहूं तो, ये जगह धार्मिक ही नहीं, पर्यटन की दृष्टि से भी कमाल की है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ़ मंदिर बनाने से पर्यटन बढ़ेगा? असल में तो पूरी infrastructure चाहिए होती है – सड़कें, होटल, सुविधाएं। वैसे अयोध्या के बाद अब सीतामढ़ी… समझदार लोगों को तो पता ही है मामला क्या है।

8 अगस्त वाला दिन तो देखने लायक होगा! अमित शाह और नीतीश एक साथ मंच पर। है न मजेदार बात? वैसे security arrangements को लेकर administration पूरी तरह alert है। खासकर जब से ये इलाका Nepal border के पास है, तो और भी सतर्कता बरती जा रही है। कहने को तो ये एक धार्मिक कार्यक्रम है, लेकिन राजनीति की गंध तो हवा में साफ़ महसूस हो रही है।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तो बिल्कुल predictable हैं। भाजपा वाले कह रहे हैं – “हिंदू संस्कृति का सम्मान”। जदयू वाले बोल रहे हैं – “सांस्कृतिक विरासत बचाना”। और विपक्ष? वो तो पहले से ही चिल्ला रहा है – “ये सब चुनावी stunt है!” सच तो ये है कि जनता इन सब बातों से ऊपर उठकर सोचती है। या कम से कम उठना चाहिए।

अब आगे क्या? इस कार्यक्रम के बाद तो बिहार की राजनीति और गर्म होगी। एक तरफ तो हिंदू voters को लुभाने की कोशिश, दूसरी तरफ development का नारा। पर सच्चाई ये है कि जनता को चाहिए रोजगार, सड़कें, बिजली… बाकी सब तो बाद की बात है। क्या आपको नहीं लगता?

अंत में बस इतना कहूंगा – ये मंदिर प्रकरण बिहार की राजनीति का एक नया chapter लिख देगा। पर क्या ये chapter जनता के हक में होगा या सिर्फ़ netas के फायदे के लिए? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो popcorn लीजिए और देखिए ये political drama कैसे unfold होता है!

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अमित शाह और नीतीश कुमार की सीतामढ़ी यात्रा – जानिए सारे जरूरी सवालों के जवाब

1. अमित शाह और नीतीश कुमार 8 अगस्त को सीतामढ़ी क्यों जा रहे हैं?

देखिए, बात सीधी है – दोनों नेता पुनौराधाम में माँ जानकी के मंदिर की आधारशिला रखने जा रहे हैं। धार्मिक तो है ही, लेकिन आप समझ ही रहे होंगे कि बिहार चुनाव से ठीक पहले ऐसे कार्यक्रम का क्या मतलब हो सकता है। राजनीति और धर्म का ये मेल तो नया नहीं है, है न?

2. इस कार्यक्रम का बिहार चुनाव से क्या connection है?

असल में, ये एक तरह का पावर शो है। BJP और JDU अपनी जोड़ी की ताकत दिखाना चाहती हैं। सीतामढ़ी तो वैसे भी अहम जगह है। और हाँ, मंदिर का announcement… आप समझ गए न? हिंदू voters को attract करने की पूरी planning लगती है। चालाकी भरी चाल, लेकिन काम क्या करेगी? ये तो वक्त ही बताएगा।

3. पुनौराधाम मंदिर का क्या महत्व है?

अरे भई, ये तो माँ सीता का जन्मस्थान माना जाता है! धार्मिक नजरिए से बेहद अहम जगह। अब नए मंदिर के निर्माण से दो फायदे – एक तो devotees की भावनाएँ, दूसरा tourism को बढ़ावा। सच कहूँ तो धर्म और विकास का ऐसा कॉम्बिनेशन आजकल खूब चल रहा है।

4. क्या इस event से BJP और JDU के alliance पर कोई effect पड़ेगा?

देखा जाए तो ये एक तरह का symbolic gesture है। दोनों दिग्गज एक साथ धार्मिक मंच पर… साफ संकेत है कि गठबंधन मजबूत है। पर याद रखिए, बिहार की राजनीति में कुछ भी fixed नहीं होता। आज साथ हैं, कल क्या होगा कोई नहीं जानता। लेकिन फिलहाल तो ये alliance और strong ही दिख रही है।

Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

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