पहले मेरे से निपट लो! अमित शाह का वो धमाकेदार बयान जिसने संसद हिला दी
आज राज्यसभा में जो हुआ, सच कहूं तो वो एकदम फिल्मी सीन जैसा था! गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को जो जवाब दिया, उसने तो सबके होश उड़ा दिए। ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर सवाल उठा रहे विपक्षी नेताओं से उन्होंने कहा – “पहले मेरे से निपट लो!” और ये बात उन्होंने तब कही जब विपक्ष लगातार PM मोदी को सदन में बुलाने की जिद कर रहा था। असल में, शाह ने ऑपरेशन महादेव का उदाहरण देकर साफ कर दिया कि सेना ने उन आतंकियों को ठिकाने लगा दिया था जिन्होंने पहलगाम में वो नृशंस हमला किया था।
पूरा मामला समझिए
अब सवाल यह है कि ये पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ? दरअसल, दो बड़ी घटनाएं हैं जिन्हें समझना जरूरी है। पहली – ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें हमारी सेना ने कश्मीर में आतंकियों के छक्के छुड़ा दिए थे। दूसरी – 2017 का वो दर्दनाक पहलगाम हमला, जहां 7 निर्दोष अमरनाथ यात्रियों की जान चली गई थी। और फिर? सेना ने ऑपरेशन महादेव चलाकर उन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया जो इस हमले के पीछे थे। विपक्ष को इन घटनाओं पर सरकार से सफाई चाहिए थी, और इसी के जवाब में अमित शाह ने आज वो जबरदस्त बयान दिया।
संसद में क्या हुआ?
राज्यसभा में आज का माहौल क्या था? एक शब्द में कहूं तो – विस्फोटक! जब अमित शाह ने गरजते हुए कहा “जो PM मोदी को चुनौती देना चाहते हैं, वे पहले मुझसे निपटें!”, तो विपक्ष के सदस्यों ने तुरंत हंगामा शुरू कर दिया। शाह ने साफ किया कि हमारी सरकार आतंकवाद के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेगी। लेकिन विपक्ष को ये जवाब कहां मंजूर होने वाला था? उनकी जिद थी – सीधे PM मोदी को जवाब देना होगा। नतीजा? सदन में इतना हंगामा हुआ कि कार्यवाही रुकनी पड़ी।
क्या कह रहे हैं राजनीतिक दल?
इस घटना के बाद तो राजनीतिक बवाल मच गया है। भाजपा तो पूरी तरह शाह के साथ खड़ी है – कह रही है कि हम आतंकवाद के खिलाफ zero tolerance की नीति पर अडिग हैं। वहीं राहुल गांधी ने तो सीधे आरोप लगा दिया कि “सरकार जवाबदेही से भाग रही है। PM को सीधे जवाब देना चाहिए।” और सोशल मीडिया? वहां तो #पहलेमेरेसेनिपटलो ट्रेंड कर रहा है, जहां कई लोग शाह के इस आक्रामक रुख की तारीफ करते नजर आ रहे हैं।
अब आगे क्या?
राजनीतिक जानकार क्या कह रहे हैं? उनका मानना है कि ये विवाद जल्द खत्म होने वाला नहीं। विपक्ष तो PM से सीधे जवाब मांगने पर अड़ा हुआ है। सूत्रों की मानें तो सरकार शायद ऑपरेशन सिंदूर पर एक white paper पेश करे। और 2024 के चुनाव? हो सकता है यही सुरक्षा और राष्ट्रवाद का बड़ा मुद्दा बन जाए। भाजपा के लिए तो ये राजनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
एक बात तो साफ है – कश्मीर और आतंकवाद का मुद्दा भारतीय राजनीति में हमेशा की तरह संवेदनशील बना हुआ है। सरकार अपनी सख्त नीतियों पर गर्व करती है, विपक्ष पारदर्शिता की मांग करता है। अब देखना ये है कि ये राजनीतिक तूफान आगे किस रूप में सामने आता है। दिलचस्प होगा!
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com