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अंडमान-लक्षद्वीप का शासन: बिना CM के कैसे चलता है ये अनोखा सिस्टम? जानिए पूरी कहानी

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अंडमान-लक्षद्वीप का शासन: बिना CM के कैसे चलता है ये अनोखा सिस्टम?

देखिए, हमारे देश के ज्यादातर राज्यों में तो CM या मेयर की सरकार चलती है – ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के दो सबसे खूबसूरत द्वीप समूह अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में ये सिस्टम बिल्कुल अलग है? यहां कोई मुख्यमंत्री नहीं होता, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक प्रशासक (Lieutenant Governor) पूरी व्यवस्था संभालता है। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या ये व्यवस्था सही है? और क्या स्थानीय लोगों को इससे कोई दिक्कत होती है? चलिए, इस दिलचस्प मामले को थोड़ा गहराई से समझते हैं।

क्यों है यह अलग व्यवस्था?

असल में, 1956 के States Reorganisation Act के बाद से ही इन द्वीपों को खास दर्जा मिला हुआ है। मतलब ये कोई नई बात नहीं है। पर सवाल ये कि ऐसा क्यों? पहली वजह तो ये है कि यहां की आबादी बहुत कम है – और वो भी ज्यादातर आदिवासी समुदायों की। दूसरा, यहां की भौगोलिक स्थिति बड़ी नाजुक है – समुद्र से घिरे ये टापू पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। और तीसरी सबसे बड़ी वजह? ये द्वीप हमारे देश की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। इन्हीं वजहों से केंद्र सरकार ने यहां सीधा कंट्रोल रखने का फैसला किया। समझ आया न?

कैसे चलता है यह अनोखा प्रशासन?

तो अब बात करते हैं कि ये सिस्टम आखिर काम कैसे करता है। यहां Lieutenant Governor (LG) यानी प्रशासक की नियुक्ति सीधे केंद्र सरकार करती है। है न मजेदार बात? और हां, यहां कोई विधानसभा नहीं होती – हालांकि दिल्ली और पुडुचेरी की तरह थोड़ी-बहुत स्वायत्तता जरूर दी गई है। स्थानीय स्तर पर पंचायतों और जिला परिषदों को कुछ अधिकार मिले हुए हैं। और सुरक्षा की बात करें तो पुलिस, नौसेना और Coast Guard मिलकर यहां का हाल संभालते हैं। एक तरह से देखें तो ये पूरा सिस्टम काफी अनोखा है, है न?

क्या कहती हैं विभिन्न हितधारकों की राय?

अब सबसे दिलचस्प सवाल – लोग इसके बारे में क्या सोचते हैं? सच कहूं तो यहां राय बंटी हुई है। कुछ स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन क्षेत्रों को ज्यादा स्वायत्तता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे स्थानीय मुद्दों का समाधान जल्दी होगा। वहीं केंद्र सरकार का साफ मानना है कि ये व्यवस्था देश की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है। और पर्यावरणविद् तो यही कहेंगे न कि इन द्वीपों का नाजुक ecosystem सीधे केंद्र के नियंत्रण में ही सुरक्षित रह सकता है। तो हर किसी का अपना-अपना नजरिया है।

भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

अब आगे क्या? सच तो ये है कि आने वाले सालों में इन द्वीपों का महत्व और बढ़ने वाला है। केंद्र सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटी है और साथ ही इन्हें सैन्य रणनीति के लिहाज से भी मजबूत बना रही है। पर एक चिंता की बात ये है कि स्थानीय स्वशासन की मांग भी बढ़ सकती है। हालांकि सुरक्षा और भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय नियंत्रण बना रहेगा। और हां, Climate change का खतरा तो है ही – समुद्र का बढ़ता स्तर इन द्वीपों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप की ये प्रशासनिक व्यवस्था वाकई में अनोखी है। यहां केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण एक तरह से सुरक्षा, विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल बिठाने का काम करता है। जैसे-जैसे इन द्वीपों का महत्व बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस सिस्टम में भी बदलाव आ सकते हैं। पर एक बात तो तय है – ये द्वीप न सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए, बल्कि अपने इस अनूठे शासन मॉडल के लिए भी हमेशा चर्चा में रहेंगे। क्या आपको नहीं लगता?

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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