Axiom-4 मिशन: शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से लौट रहे हैं… पर सवाल ये है कि पृथ्वी पर वापस एडजस्ट कर पाएंगे या नहीं?
अरे भाई, इतिहास बनता देखना हो तो आज आँखें खुली रखिए! Group Captain Shubhanshu Shukla – जिन्होंने International Space Station (ISS) पर पूरे 18 दिन बिताए – आज हमारे बीच वापस आ रहे हैं। सच कहूँ तो मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि कोई इंसान इतने दिन तक अंतरिक्ष में रहकर सही-सलामत लौट आएगा। SpaceX का Dragon spacecraft तो कल ही ISS से undock कर चुका है, और अब California के पास समंदर में उतरने की तैयारी में है। ये सिर्फ भारत के लिए नहीं, पूरी दुनिया के space research के लिए एक बड़ी छलांग है।
ये मिशन आखिर है क्या बला?
देखिए न, Axiom-4 mission असल में private space flights की एक नई लहर का हिस्सा है। NASA और SpaceX की जोड़ी ने कमाल कर दिया है! शुभांशु शुक्ला को चुनने की बात करें तो – भारतीय वायु सेना का ये जांबाज़ pilot सच में खास है। ISS पर उन्होंने जो 60 से ज़्यादा experiments किए… वो भी microgravity और biomedical research पर… सच में हैरान कर देने वाले हैं। मतलब साफ है – अंतरिक्ष में इंसानी ज़िंदगी को आसान बनाने की कोशिश।
अभी क्या चल रहा है?
तो सुनिए, Dragon capsule तो कल ही ISS से अलग हो चुका है। अब बस California के पानी में सुरक्षित उतरने का इंतज़ार है। पर यहाँ एक दिलचस्प बात – splashdown के तुरंत बाद शुक्ला और उनके साथियों को medical check-up के लिए ले जाया जाएगा। और भई, ये experiments सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के सभी human space missions की नींव रख रहे हैं।
क्या कह रहे हैं लोग?
ISRO तो खुशी से झूम उठा है! उनका कहना है – “ये भारत के लिए सिर्फ एक कदम नहीं, बल्कि पूरी छलांग है।” वहीं शुभांशु के परिवार की बात करें तो… उनकी माँ की आवाज़ में खुशी साफ झलक रही थी – “बस एक बार गले लगा लूँ अपने बेटे को।” पर space doctors की चिंता भी समझ आती है – Earth’s gravity में वापस एडजस्ट करना कोई आसान काम नहीं। हालाँकि शुक्ला के intensive training को देखते हुए, वो जल्द ही ठीक हो जाएंगे।
आगे क्या होगा?
अगले कुछ दिन तो शुभांशु डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे। Gravity के साथ तालमेल बिठाना उतना ही ज़रूरी है जितना कि नए साल पर नए कपड़े! लंबी अवधि की बात करें तो… अब ISRO और NASA मिलकर Gaganyaan mission को नई गति देंगे। और सुनिए – इस सफलता के बाद भारत में space tourism के दरवाज़े भी खुल सकते हैं। सोचिए, कल को आप भी अंतरिक्ष में घूमने जा पाएंगे!
अंत में बस इतना कहूँगा – शुभांशु शुक्ला की ये वापसी सिर्फ एक मिशन का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। भारत का space program अब नए आयाम छूने वाला है… और हम सब इसके गवाह बन रहे हैं। क्या बात है न?
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Axiom-4 मिशन – जानिए वो सवाल जो आप पूछना चाहते थे!
1. शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से लौटने के बाद कैसे संभालेंगे धरती की ग्रेविटी?
अरे भाई, अंतरिक्ष में तो वजनहीनता का मजा है, लेकिन वापस आकर धरती की ग्रेविटी में एडजस्ट करना कोई आसान काम नहीं! शुभांशु को एक खास रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजरना पड़ेगा – सोचो जैसे कोई एथलीट लंबे ब्रेक के बाद वापस ट्रेनिंग शुरू करता है। फिजिकल थेरेपी, रोजाना एक्सरसाइज, और हां, बार-बार मेडिकल चेकअप्स तो होंगे ही। असल में, उनके शरीर को Earth’s gravity के साथ फिर से तालमेल बिठाना होगा – और ये प्रोसेस कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक चल सकता है!
2. Axiom-4 के बाद क्या करेंगे शुभांशु? जानिए उनके फ्यूचर प्लान्स
अब यहां बात दिलचस्प हो जाती है। शुभांशु ने खुद बताया है कि वो अपने अनुभवों को युवाओं के साथ शेयर करना चाहते हैं। मतलब? हमारे देश के बच्चों को inspire करने का प्लान! और सिर्फ यही नहीं, वो भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने में भी मदद करेंगे। सच कहूं तो, ये आदमी तो अभी और मिशन्स के लिए तैयार बैठा है – जैसे कोई सुपरहीरो जिसकी भूख ही न भरे!
3. अंतरिक्ष से लौटने के बाद किन-किन मुश्किलों का सामना करते हैं एस्ट्रोनॉट्स?
देखिए, अंतरिक्ष में लंबा वक्त बिताना कोई मजाक नहीं। वापस आकर एस्ट्रोनॉट्स को कई तरह की प्रॉब्लम्स होती हैं – जैसे मसल्स कमजोर हो जाना, हड्डियों का घनत्व कम होना (बोन डेंसिटी लॉस), और बैलेंस बनाने में दिक्कत। है न मुश्किल? पर चिंता की कोई बात नहीं! इन सबके लिए उन्हें इंटेंसिव रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ता है। कुछ हफ्ते की मेहनत और वो फिर से पहले जैसे हो जाते हैं। मजेदार बात ये कि ये प्रोसेस कुछ-कुछ वैसा ही है जैसे कोई लंबी बीमारी के बाद रिकवरी कर रहा हो।
4. Axiom-4 मिशन: भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए क्यों है खास?
अब यहां मैं थोड़ा गर्व से भर जाता हूं! Axiom-4 मिशन भारत के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक बड़ा स्टेटमेंट है। क्यों? क्योंकि ये प्राइवेट स्पेस मिशन्स में भारतीयों की भागीदारी को दिखाता है। सोचिए, अब तक तो हम ISRO के मिशन्स के बारे में सुनते आए थे, लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर भी इस रेस में कूद चुका है! और शुभांशु जैसे हीरोज इसका हिस्सा बन रहे हैं। एक तरह से देखें तो ये हमारे स्पेस प्रोग्राम का नया चैप्टर है – जो शायद आने वाले समय में और बड़े मिशन्स की नींव रखेगा। क्या आपको नहीं लगता कि ये एक बेहद एक्साइटिंग टाइम है?
Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com