अयोध्या का वो सनसनीखेज मामला: बहू ने सास को सड़क पर छोड़ा, CCTV ने पकड़ा हाथ!
कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो सिर्फ क्राइम नहीं, बल्कि हमारे समाज की बिगड़ती तस्वीर दिखाती हैं। अयोध्या में हुआ ये मामला तो वाकई दिल दहला देने वाला है – एक बहू ने अपनी 65 साल की सास को सड़क पर अकेला छोड़ दिया! सोचिए, जिस घर में बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहां ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन हुआ, और CCTV फुटेज ने पूरी कहानी उजागर कर दी। अब तो ये केस सोशल मीडिया पर भी आग की तरह फैल रहा है।
असल में, कहानी थोड़ी और गहरी है। श्रीमती सुमन देवी – यानी वो बेचारी मां जिसे सड़क पर छोड़ा गया – उनकी ज़िंदगी पहले ही कितनी मुश्किलों से गुजरी है। कुछ साल पहले उनका इकलौता बेटा चल बसा, और फिर बहू जया और पोते-पोतियों के साथ रहने लगीं। पड़ोसियों की मानें तो… “अरे भई, कब से तो घर में लड़ाई-झगड़े चल रहे थे।” मगर किसने सोचा था कि हद ही पार कर देंगी?
पूरा मामला तब खुला जब एक दुकान के CCTV में जया को सास को जबरन गाड़ी से उतारते हुए कैद कर लिया। सच कहूं तो वो वीडियो देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पुलिस ने तुरंत धारा 498A के तहत केस दर्ज कर लिया। अच्छा हुआ कम से कम सुमन देवी को अस्पताल में सही देखभाल मिल रही है।
इस पूरे मामले पर लोगों की प्रतिक्रियाएं क्या कहती हैं? पुलिस वाले राजेश यादव तो बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं – “हम कड़ी सजा दिलाएंगे!” वहीं समाजसेवी अनीता शर्मा का कहना है कि ये तो समाज के पतन का संकेत है। स्थानीय लोग? हैरान, परेशान। एक तो बुजुर्गों की हालत पहले से ही खराब, ऊपर से ऐसे केस!
अब सवाल ये है कि आगे क्या? जया को तो कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाना ही पड़ेगा। लेकिन असली सवाल तो ये है कि सुमन देवी का क्या होगा? कुछ संगठनों ने मदद का वादा किया है, पर क्या ये काफी है? और सबसे बड़ी बात – क्या हम सच में अपने बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यवहार करने लगे हैं? सोचने वाली बात है…
यह घटना सिर्फ एक CCTV फुटेज से ज़्यादा कुछ कहती है – हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई को उघाड़ती है। देखा जाए तो बुजुर्गों के साथ हो रही यह बेरुखी सिर्फ जया जैसे लोगों की वजह से नहीं, बल्कि हम सभी की सोच का नतीजा है। ईमानदारी से कहूं तो, क्या आपने कभी बस में किसी बूढ़े को खड़ा देखकर भी आंखें फेर लीं? मैंने की हैं। शर्म आती है मुझे यह कबूल करने में।
लेकिन सच यही है…
CCTV ने जया को पकड़वाकर न्याय तो दिला दिया, पर असली सवाल तो यह है कि क्या हम ऐसे मामलों को रोक पाएंगे? जया अकेली नहीं है – हमारे आसपास ऐसे कितने ही केस दबे पड़े हैं। एक तरफ तो हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का नारा लगाते हैं, दूसरी तरफ अपने ही घर के बुजुर्गों को ‘ओल्ड एज होम’ में छोड़ आते हैं। विडंबना देखिए!
और सबसे दुखद बात? यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। जब तक हम अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक CCTV कैमरे सिर्फ अपराध रिकॉर्ड करते रहेंगे – रोक नहीं पाएंगे। थोड़ा सोचिए… क्या हम वाकई इंसान बनना चाहते हैं या सिर्फ ‘सोशल मीडिया पर शेयर’ करके अपनी फ़र्ज़ पूरी समझ लेते हैं?
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

