बांग्लादेश के हाशिम का ‘साधु वेश’ वाला गेम: असली कहानी जो आपको हैरान कर देगी!
अरे भाई, कभी-कभी सच्चाई फिल्मी कहानियों से भी ज़्यादा मज़ेदार होती है! पश्चिम बंगाल के नादिया में तो ऐसा ही एक ड्रामा हुआ है। सीमा पार के अपराधियों की हिम्मत देखिए – मोहम्मद हाशिम मलिक नाम का ये बंदा साधु बनकर भारत में घुस आया! है न मज़ेदार? लेकिन असल में ये कोई मज़ाक की बात नहीं है। यार, ये बांग्लादेश में कितने ही गंभीर केसों में वॉन्टेड था। और भारत आकर क्या किया? भगवा चोला पहन लिया! सोचा होगा कि “यहाँ तो कोई पूछेगा भी नहीं”। लेकिन भाई…पुलिस भी कम नहीं होती!
कहानी शुरू होती है: ढाका का गुंडा कैसे बना नादिया का ‘बाबा’?
सुनो यार, ये हाशिम ढाका का रहने वाला था। वहाँ इस पर क्या-क्या आरोप नहीं थे – हत्या, डकैती, ड्रग्स…पूरा पैकेज डील! जब केस ज्यादा टाइट होने लगे, तो ये भागकर भारत आ गया। और यहाँ आकर क्या किया? सीधा साधु का भेस धारण कर लिया! नादिया के एक आश्रम में जा बैठा। सोचा होगा “अब तो मैं पूरी तरह सेफ हूँ”। लेकिन यार, इतना आसान भी नहीं होता। बांग्लादेश की पुलिस ने भारतीय एजेंसियों को खबर कर दी, और फिर क्या? जॉइंट ऑपरेशन में ये पकड़ा गया। एकदम फिल्मी स्टाइल में!
पकड़े जाने का राज: मोबाइल और नकली ID का खेल
अब सुनिए मज़ेदार बात। ये हाशिम सोचता होगा कि उसने बड़ी स्मार्ट प्लानिंग की है – नकली नाम, नकली वेशभूषा। लेकिन भाई, आजकल के मोबाइल डेटा के आगे कौन बच पाया है? पुलिस ने इसी से इसकी असली पहचान ढूंढ़ निकाली। और जब तलाशी ली, तो मिला क्या? फर्जी ID कार्ड और धार्मिक वस्त्रों का पूरा सेट! बांग्लादेशी अधिकारियों ने तो कह दिया कि ये उनकी मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में है। सीख मिलती है – चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत यहाँ पूरी तरह फिट बैठती है!
लोगों की प्रतिक्रिया: “हमें तो शक था!”
यार, इस मामले में सबसे मजेदार बात ये है कि स्थानीय लोगों को पहले से ही शक था! उन्होंने बताया कि ये “बाबा” साहब असल में बाबा लगते ही नहीं थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने तो बड़ी शान से कहा कि उनकी निगरानी व्यवस्था ने इसे पकड़ लिया। वहीं बांग्लादेश पुलिस खुशी से झूम रही है – अब वो इसे वापस ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। सच कहूँ तो, ये दोनों देशों की पुलिस के बीच सहयोग का बढ़िया उदाहरण है।
अब क्या होगा? प्रत्यर्पण और नई गाइडलाइंस की बात
तो अब सवाल ये है कि आगे क्या? भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण समझौता है, तो हो सकता है ये वापस भेज दिया जाए। लेकिन इस पूरे केस ने सीमा सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब शायद नई गाइडलाइंस आएँ। और हाँ, खुफिया एजेंसियाँ अब और ऐसे “साधुओं” की तलाश में हैं जो असल में साधु होते नहीं!
आखिरी बात: अंतरराष्ट्रीय अपराध और सहयोग की अहमियत
देखा जाए तो ये केस अंतरराष्ट्रीय अपराध की बढ़ती चुनौती को दिखाता है। लेकिन साथ ही ये भी साबित करता है कि जब पड़ोसी देश मिलकर काम करें, तो हाशिम जैसे चालाक अपराधी भी नहीं बच पाते। एक तरफ तो ये अच्छी बात है, लेकिन दूसरी तरफ ये भी सोचने वाली बात है कि धार्मिक वेशभूषा का इस तरह दुरुपयोग हो रहा है। सच कहूँ तो, सतर्कता ही इसका एकमात्र इलाज है।
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com