भगवंत मान ने कह दी बड़ी बात: “सिंधु का पानी? पंजाब को मिले उसका हक, एक बूंद भी ज़्यादा नहीं!”
अरे भई, पंजाब के सीएम भगवंत मान ने तो बिल्कुल साफ़-साफ़ कह दिया है – सिंधु नदी का पानी हो या कोई और मुद्दा, अब पंजाब पीछे हटने वाला नहीं। सीधे शब्दों में कहें तो उन्होंने केंद्र और पड़ोसी राज्यों को यह संदेश दे दिया है कि “हमें बस हमारा हक चाहिए, एक बूंद भी नहीं!” और सच कहूं तो यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब के किसानों की हालत… खैर, आप समझ ही रहे होंगे।
पुरानी कहानी, नया अध्याय
देखिए, सिंधु नदी को लेकर झगड़ा कोई नया नहीं है। 1960 का Indus Water Treaty याद है न? भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ वो समझौता? लेकिन असल मसला तो हमारे अपने घर का है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान – सबकी नज़र इसी पानी पर। और अब तो ऐसा लग रहा है जैसे मामला फिर से गरमाने वाला है। पंजाब वालों का कहना साफ़ है – “हमें कम पानी मिल रहा है, हमारे किसान मर रहे हैं।” सच्चाई क्या है? यही तो जानना दिलचस्प होगा।
भगवंत मान का स्टैंड – क्लियर और क्रिस्प
अब ज़रा सीएम साहब के बयान को समझते हैं:
- पहली और सबसे बड़ी बात – “हम किसी का हक नहीं छीनना चाहते, बस अपना हिस्सा चाहिए” (और इसमें गलत क्या है?)
- दूसरा – किसानों को पहली प्राथमिकता (वैसे भी, पंजाब बिना किसानों के क्या है?)
- और तीसरा – कोई समझौता नहीं! (यहां तो लगता है मोर्चा खुल गया है)
और हां, इसके बाद तो हरियाणा और राजस्थान वालों के तो पसीने छूट गए होंगे। आखिरकार, उनकी भी तो खेती इसी पानी से चलती है।
राजनीति गरमाई – किसने क्या कहा?
अब देखिए इस पर सबकी क्या प्रतिक्रिया आई:
- हरियाणा सरकार: बिल्कुल ठंडे दिमाग से कहा – “भई, नियम तो पहले से बने हैं” (मतलब साफ़ – हम नहीं मानेंगे!)
- राजस्थान के किसान नेता: थोड़ा गुस्से में – “हमारे किसानों के साथ अन्याय नहीं चलेगा” (यानी तैयार हो जाओ धरने के लिए)
- पंजाब किसान यूनियन: पूरा समर्थन! “हमारा हक़ हमें चाहिए” (और इसमें हैरानी की क्या बात है?)
केंद्र सरकार? अभी तक चुप्पी। लेकिन political experts कह रहे हैं कि जल्द ही कोई बड़ी meeting हो सकती है। देखते हैं क्या होता है।
आगे क्या? तीन संभावनाएं
अब सवाल यह है कि आगे का रास्ता क्या होगा?
- पहला रास्ता – केंद्र बीच-बचाव करे (लेकिन क्या वाकई यह इतना आसान है?)
- दूसरा – मामला कोर्ट पहुंचे (और फिर तो सालों लग जाएंगे!)
- तीसरा और सबसे खतरनाक – राज्यों के बीच तनाव बढ़े (जो किसी को नहीं चाहिए)
एक बात तो तय है – अभी यह मामला और गहराएगा। खासकर जब पंजाब के किसान संगठन पूरी तरह पीछे खड़े हैं।
अंत में: भगवंत मान का यह बयान कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। यह तो उत्तर भारत के जल संकट पर एक बड़ी बहस की शुरुआत हो सकती है। और हां, अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस गर्मागर्म मुद्दे को कैसे संभालती है। क्योंकि अगर यह मामला बिगड़ा, तो… खैर, आप समझदार हैं!
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com