छत्तीसगढ़ का नारायणपुर: 6 नक्सली ढेर, क्या ये बदलाव की शुरुआत है?
आज सुबह नारायणपुर के जंगलों में जो हुआ, उसे सिर्फ एक मुठभेड़ कहना कम होगा। CRPF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने नक्सलियों के साथ करीब दो घंटे तक जो जंग लड़ी, उसमें 6 नक्सली मारे गए। और हाँ, हथियारों का जो ढेर मिला है – AK-47 से लेकर IED तक – वो बताता है कि ये कोई छोटी-मोटी टीम नहीं थी। सूत्रों की मानें तो इनमें एक बड़ा नाम भी शामिल हो सकता है। पर सच्चाई तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगी, है न?
असल में नारायणपुर तो पिछले कई सालों से नक्सलियों का गढ़ रहा है। ऐसा नहीं कि यहाँ पहले मुठभेड़ें नहीं हुईं, लेकिन आज का ऑपरेशन कुछ खास है। क्यों? क्योंकि ये कोई रैंडम एक्शन नहीं था – बल्कि intelligence-based ऑपरेशन, जैसा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। पिछले कुछ महीनों से चल रहे इन विशेष अभियानों का ये सबसे बड़ा नतीजा है।
पूरी कहानी तो ऐसे शुरू हुई – कल रात ही सुरक्षाबलों को एक खुफिया जानकारी मिली। जंगल के बीचोंबीच नक्सलियों का एक बड़ा ग्रुप छुपा हुआ है। और फिर क्या? सुबह होते ही ऑपरेशन शुरू। जैसे ही घेराबंदी हुई, गोलियाँ चलनी शुरू। दो घंटे की भीषण गोलीबारी के बाद जो नज़ारा था – 6 शव, ढेर सारा हथियार और… एक बड़ा सवाल। क्या वाकई इनमें कोई टॉप लीडर था? अभी तो बस अंदाज़ा ही लगाया जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ? जैसी उम्मीद थी वैसी ही। कुछ नेताओं ने सुरक्षाबलों की तारीफ़ों के पुल बाँध दिए, तो कुछ का कहना है कि “ये तो बस एक छोटी जीत है, असली लड़ाई तो नक्सलवाद की जड़ें खत्म करने की है।” स्थानीय लोग? उनकी प्रतिक्रिया थोड़ी दिलचस्प है। एक तरफ तो राहत है कि 6 खतरनाक नक्सली अब नहीं रहे, लेकिन साथ ही डर भी है – कहीं इसका बदला न लिया जाए।
अब आगे क्या? तीन चीज़ें clear हैं:
1. मृतकों की पहचान पर सबकी नज़र है
2. पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है
3. सरकार विकास कार्यों को तेज़ करने पर विचार कर रही है
एक बात तो तय है – सिर्फ बंदूकों से नक्सलवाद खत्म नहीं होगा। जब तक जंगलों के आसपास के गाँवों में बुनियादी सुविधाएँ नहीं पहुँचेंगी, तब तक… पर ये तो लंबी बहस का विषय है। फिलहाल तो सुरक्षाबलों को इस सफलता पर बधाई देनी चाहिए। सच कहूँ तो, ये उनकी मेहनत और साहस का नतीजा है।
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Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com