बिहार का 422 करोड़ वाला फ्लाईओवर धंसा – अब क्या होगा?
सच कहूं तो ये खबर सुनकर गुस्सा तो आता ही है, है न? पटना के अशोक राजपथ पर बना ये नया डबल-डेकर फ्लाईओवर, जिसे महज एक महीने पहले ही CM नीतीश कुमार ने इनॉगरेट किया था… वो भारी बारिश में धंस गया! असल में देखा जाए तो ये कोई साधारण घटना नहीं है। 422 करोड़ रुपये की इस ‘मास्टरपीस’ ने तो सचमुच बिहार सरकार को शर्मसार कर दिया है। और अब तो भ्रष्टाचार के आरोप भी जोरों पर हैं।
क्या हुआ था असल में?
ये फ्लाईओवर बनाया गया था पटना की ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए। पर अब देखिए न… जिस चीज़ को 422 करोड़ में बनना था, वो एक बारिश में ही धंस गया! स्थानीय लोग तो पहले से ही शिकायत कर रहे थे कि निर्माण सामग्री में कटौती हुई है। लेकिन किसने सुनी इनकी बात? अब जब हादसा हो गया, तो सबकी आँखें खुली हैं।
एक दिलचस्प बात – ये फ्लाईओवर तो CM के उद्घाटन के ठीक बाद से ही समस्याएं दे रहा था। पानी जमा होना, कंक्रीट में दरारें… पर कौन सुनता है आम आदमी की बात?
अब तक के अपडेट्स
तो स्थिति ये है कि फ्लाईओवर का एक हिस्सा पूरी तरह धंस चुका है। NDRF की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। विपक्ष तो मानो मौके की तलाश में ही बैठा था – तेजस्वी यादव ने तो सीधे ‘422 करोड़ की लूट’ का आरोप लगा दिया! सरकार ने जांच कमेटी बना दी है, पर सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ दिखावा है?
और हां, निर्माण कंपनी का बयान तो सुनिए – “हमने सब स्टैंडर्ड फॉलो किए!” अरे भई, तो फिर ये हालात क्यों? बारिश तो बिहार में नई चीज़ थोड़े ही है!
लोग क्या कह रहे हैं?
CM नीतीश कुमार: “गंभीरता से जांच होगी” (वैसे ये लाइन तो हर केस में बोल देते हैं)
तेजस्वी यादव: “पूरा सिस्टम फेल हो चुका है”
स्थानीय निवासी: “हमें तो पहले से ही पता था ये ठीक से नहीं बना है”
सच कहूं तो आम जनता का गुस्सा समझ आता है। टैक्स के पैसे से बनी चीज़ें ऐसे धंसे, तो कौन नाराज़ नहीं होगा?
अब आगे क्या?
जांच कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट देगी (हम सब जानते हैं इन रिपोर्ट्स का क्या होता है)। फ्लाईओवर को ठीक करने का काम शुरू होगा (और शायद फिर से पैसा बंटेगा)। पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सच में किसी को सजा मिलेगी? या फिर ये केस भी फाइलों में धूल खाते-खाते भुला दिया जाएगा?
मेरी निजी राय: ये केस सिर्फ एक फ्लाईओवर के गिरने की कहानी नहीं है। ये हमारे सिस्टम की विफलता की कहानी है। जब तक भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक ऐसे ‘धंसते हुए सपने’ हमें देखने को मिलते रहेंगे। क्या आपको नहीं लगता?
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बिहार का यह डबल-डेक फ्लाईओवर गिरा तो सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि सिस्टम की पूरी झूठी ताकत भी धराशायी हो गई। सोचिए, 422 करोड़! इतने पैसे में तो कई गाँवों की जिंदगी बदली जा सकती थी। लेकिन यहाँ? सिर्फ एक झटके में सब धरा का धरा रह गया।
असल में, ये कोई नई बात नहीं। हर बार एक ही रट लगाई जाती है – “जाँच होगी, कार्रवाई होगी”। पर सच यही है कि जब तक ठेकेदार-नेता-अफसरों की यह मिलीभगत चलती रहेगी, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
और सबसे बड़ा सवाल तो यह है – आखिर जनता के पैसे और विश्वास के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलेगा? यह सिर्फ इंजीनियरिंग फेलियर नहीं, बल्कि नैतिकता का पूरा पतन है।
एक तरफ तो हम स्मार्ट सिटी की बात करते हैं, दूसरी तरफ बुनियादी ढाँचे तक सही से नहीं बन पाते। क्या यही है विकास?
अब तो बस इतनी सी मांग है – जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए। वरना… अरे भई, अगली बार किसका नंबर होगा? आपका? मेरा? सोचकर ही डर लगता है।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

