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बिहार में ‘भूराबाल’ की सियासी आंधी: लालू का ‘अभिशाप’ PK के लिए वरदान साबित होगा?

बिहार में ‘भूराबाल’ की सियासी आंधी: क्या लालू का ‘अभिशाप’ PK के हाथों जादू की छड़ी बन जाएगा?

अरे भई, बिहार की राजनीति तो इन दिनों गर्मा रही है न? 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक पुराना शब्द फिर से चर्चा में है – ‘भूराबाल’। याद है न वो 90s का वो मशहूर फॉर्मूला? जिसने लालू यादव को सत्ता के शिखर पर पहुँचा दिया था, लेकिन बाद में… खैर, वो अलग कहानी है। अब प्रशांत किशोर (PK) इसी रणनीति को नए अंदाज़ में पेश करने की फिराक में हैं। सवाल ये है कि क्या ये चाल JD(U)-BJP गठबंधन के लिए सिरदर्द साबित होगी? या फिर…?

पुरानी बोतल में नया शराब, या फिर…?

देखिए न, असल में ‘भूराबाल’ था क्या? 90s में लालू का वो मास्टरस्ट्रोक जिसमें MY (मुस्लिम-यादव) गठजोड़ के साथ-साथ दूसरे OBCs को भी साथ लिया गया। कामयाबी मिली? बिल्कुल! लेकिन बाद में यही जातिगत राजनीति RJD के लिए मुसीबत बन गई। अब PK, जिन्होंने 2015 में ‘महागठबंधन’ की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी, वो इसी फॉर्मूले को ‘भूराबाल 2.0’ के रूप में लॉन्च करने वाले हैं। मजे की बात ये कि PK को तो राजनीति का चाणक्य माना जाता है। तो क्या ये नया अवतार काम करेगा?

PK का गेम चेंजर: भूराबाल 2.0

अब ये दिलचस्प होने वाला है। PK की टीम ने पिछले कुछ महीनों में बिहार के तमाम जिलों में सर्वे कराया है। क्यों? क्योंकि इस नए वर्जन में EBCs और महादलितों को भी जोड़ने की योजना है – जो परंपरागत रूप से NDA के वोटर रहे हैं। अगर ये चाल काम कर गई तो… समझिए ना! BJP और JD(U) वाले तो पहले से ही अपने जाति समीकरण संभालने में जुट गए हैं। एक तरह से देखें तो PK ने चिट्ठी खोल दी है, अब देखना है बाकी खिलाड़ी कैसे जवाब देते हैं।

राजनीति के मैदान में हलचल

अब सबकी प्रतिक्रियाएं देखिए। तेजस्वी यादव तो इसे ‘बिहार को बांटने की साजिश’ बता रहे हैं। वहीं BJP के गिरिराज सिंह जैसे नेताओं का कहना है कि ‘ये पुरानी रणनीति अब काम नहीं करेगी’। विश्लेषकों की राय? वो तो हमेशा की तरह दो हिस्सों में बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि PK का ये नया फॉर्मूला गेम चेंजर साबित हो सकता है। लेकिन दूसरे ये कह रहे हैं कि अब बिहार का वोटर सिर्फ जाति के आधार पर नहीं, विकास के मुद्दों पर भी वोट करता है। सच क्या है? वो तो वक्त ही बताएगा।

अब आगे क्या? चुनौतियाँ और मौके

मान लीजिए अगर PK की ये रणनीति काम कर गई, तो 2025 में गैर-NDA दलों को फायदा हो सकता है। पर एक बड़ा सवाल ये भी है कि क्या जातिगत राजनीति फिर से बिहार में विकास के मुद्दों को पीछे धकेल देगी? और हाँ, एक और अहम बात – अब चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाति आधारित भाषणों पर रोक है। ये PK की रणनीति पर कितना असर डालेगा?

आखिर में, सच तो ये है कि बिहार की राजनीति में ‘भूराबाल’ की वापसी निश्चित तौर पर बड़ा मोड़ ला सकती है। लेकिन ये PK के लिए वरदान साबित होगा या अभिशाप, ये तो कई बातों पर निर्भर करेगा – समय, रणनीति और सबसे बढ़कर, बिहार के वोटरों का मिजाज। एक बात तो तय है – 2025 का चुनाव देखने लायक होगा। क्या आपको नहीं लगता?

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1. ‘भूराबाल’ क्या है और यह बिहार की राजनीति में क्यों चर्चा में है?

देखिए, मामला कुछ ऐसा है – ‘भूराबाल’ ये कोई नया सियासी term नहीं है, लेकिन Lalu Yadav के एक बयान ने इसे अचानक हवा दे दी। असल में, ये BJP के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, वहीं RJD के लिए… अरे भई, मौका ही मौका है! क्योंकि अब तो caste equations ही बदलने की बात चल रही है।

2. Lalu Yadav ने ‘अभिशाप’ वाला क्या statement दिया था?

सुनिए, Lalu जी ने तो बम फोड़ दिया! उनका कहना था – “BJP को भूराबाल (यानी भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला-कायस्थ) का सहारा है, और यही उनका अभिशाप है।” अब आप ही बताइए, इससे ज़्यादा direct caste-based politics की बात और क्या होगी? साफ-साफ बिहार के social fabric को टारगेट किया गया है।

3. क्या यह ‘अभिशाप’ वाली बात PK (Prasad Kushwaha) के लिए वरदान साबित होगी?

अच्छा सवाल पूछा आपने! Political experts की मानें तो… देखिए, एक तरफ तो यह statement OBC और EBC voters को जोड़ने में PK की मदद कर सकता है। क्यों? क्योंकि अब ‘upper caste vs backward caste’ का पूरा narrative बन रहा है। लेकिन… हमेशा एक लेकिन तो होता ही है न? Final result तो election strategy और ground reality पर ही निर्भर करेगा। बातें तो बहुत होती हैं, असली खेल तो मैदान में ही दिखेगा।

4. बिहार की राजनीति में ‘भूराबाल’ का क्या impact हो सकता है?

असल में देखा जाए तो… यह ‘भूराबाल’ वाली बहस बिहार में फिर से caste equations को जगा सकती है। BJP के लिए? हां, चुनौती हो सकती है। क्योंकि अब उन्हें non-‘भूराबाल’ voters को समझाना होगा। वहीं RJD और उसके allies के लिए? OBC/EBC votes मिलने की संभावना बढ़ गई है। पर याद रखिए, बिहार की राजनीति… सरल कहां होती है भला!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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