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बिहार ड्राफ्ट रोल: सभी पार्टियों को मिलेगी फिजिकल और डिजिटल कॉपी, CEC ने दिया बड़ा बयान

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बिहार ड्राफ्ट रोल पर CEC का बड़ा फैसला: अब फिजिकल और डिजिटल दोनों कॉपी मिलेंगी, पर क्या यह काफी है?

देखिए, चुनाव आयोग ने आखिरकार बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर एक साफ़ रुख अपनाया है। CEC ने कहा है कि सभी राजनीतिक पार्टियों को इसकी फिजिकल और डिजिटल कॉपी दी जाएगी। सुनने में तो यह बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या यह पारदर्शिता के लिए पर्याप्त होगा? खैर, आयोग का यह कदम निश्चित तौर पर बिहार में आने वाले चुनावों को लेकर उठ रही आशंकाओं को कम करने की कोशिश है।

अब थोड़ा पीछे चलते हैं। बिहार में मतदाता सूचियों को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ सालों से तो यह मामला बार-बार सुर्खियों में रहा है। कभी नामों की स्पेलिंग गलत, तो कभी फर्जी वोटरों के आरोप… ईमानदारी से कहूं तो हर पार्टी ने कभी न कभी इन सूचियों पर उंगली उठाई है। शायद यही वजह है कि इस बार आयोग ने थोड़ा अलग तरीका अपनाया है। एक तरह से ‘पहले खाओ, फिर भरोसा करो’ वाला फॉर्मूला!

CEC के इस नए प्रोटोकॉल के मुताबिक, पार्टियों को जांच के लिए काफी समय मिलेगा। और हां, दोनों विकल्प – फिजिकल और डिजिटल। फिजिकल कॉपी तो जिला कार्यालय से ली जा सकेगी, वहीं डिजिटल वर्जन online पोर्टल पर उपलब्ध होगा। सच कहूं तो यह काफी सुविधाजनक लगता है। पर एक बात और – आयोग ने एक विशेष पोर्टल भी शुरू किया है जहां कोई भी आम नागरिक गलतियां रिपोर्ट कर सकता है। बस, अब देखना यह है कि यह सिस्टम कितना प्रभावी साबित होता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं? वैसे तो सबने औपचारिक तौर पर इस कदम की सराहना की है, लेकिन… हमेशा की तरह एक ‘लेकिन’ जरूर है! RJD का कहना है कि यह तभी सार्थक होगा जब शिकायतों पर वास्तव में कार्रवाई हो। BJP इसे पारदर्शिता की दिशा में अच्छा कदम मानती है, जबकि JDU को उम्मीद है कि इस बार विवाद नहीं होगा। सच बात तो यह है कि जब तक फाइनल रोल नहीं आ जाता, तब तक सब कुछ दावों पर ही रहेगा।

तो अब आगे क्या? अगले कुछ दिनों में पार्टियां इस ड्राफ्ट रोल को माइक्रोस्कोप से देखेंगी। हर छोटी-बड़ी गलती पर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। फिर आयोग इन सभी शिकायतों को देखेगा और अंतिम सूची जारी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी होती है, तो यह बिहार के चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। पर हम भारतीयों को तो पता ही है – ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली कहावत भी कुछ कारण से ही बनी है!

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बिहार ड्राफ्ट रोल का ये नया प्रावधान, सच कहूँ तो, एक बड़ा कदम लगता है। अब सवाल यह है कि क्या यह सच में राजनीतिक पारदर्शिता बढ़ाएगा? देखिए, CEC के इस बयान के बाद तो स्थिति दिलचस्प हो गई है। अब हर पार्टी को रोल की प्रति मिलेगी – Physical भी और Digital भी। यानी चुनावी तैयारियाँ करने में ज्यादा आसानी होगी।

लेकिन असल बात ये है कि ये सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है। अगर ईमानदारी से देखें, तो ये लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की एक कोशिश है। थोड़ी सी उम्मीद तो जगती ही है, है न? हालांकि, अब ये देखना बाकी है कि जमीन पर इसका कितना असर होता है।

(Note: HTML tags preserved as instructed. The text now has a more conversational flow with rhetorical questions, sentence variety, and slight imperfections to sound human-written.)

Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com

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