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बिहार में फर्जीवाड़ा: डॉग बाबू, मोनालिसा के बाद अब CM नीतीश के नाम पर बना आवासीय प्रमाण पत्र!

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बिहार में फर्जीवाड़ा: डॉग बाबू, मोनालिसा के बाद अब CM नीतीश के नाम पर बना आवासीय प्रमाण पत्र!

सच कहूं तो, बिहार के मुजफ्फरपुर से आया यह मामला पढ़कर मैं भी चौंक गया। कल्पना कीजिए – कोई सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की कोशिश करे! अब सवाल यह है कि अगर CM के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी? प्रशासन ने तुरंत FIR दर्ज करके साइबर जांच शुरू कर दी है, लेकिन असल में यह घटना साइबर अपराधियों की बढ़ती हिम्मत की ओर इशारा करती है। और हां, यह सिर्फ एक मामला नहीं है…

पहले भी हुए हैं ऐसे मामले

देखा जाए तो बिहार में यह कोई नई बात नहीं। याद है ना वो मजाकिया मामला जब एक कुत्ते “डॉग बाबू” के नाम से प्रमाण पत्र बनाया गया था? या फिर अभिनेत्री मोनालिसा की फोटो का गलत इस्तेमाल? मजाक लगता है, लेकिन सच्चाई यह है कि ये सभी मामले हमारी online प्रक्रियाओं में सुरक्षा के छेद को बड़े ही शानदार तरीके से उजागर करते हैं। एक तरफ तो हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं हमारी नींद उड़ा देती हैं।

मामले का वर्तमान अपडेट

अब जरा ताजा अपडेट पर आते हैं। मुजफ्फरपुर प्रशासन को जैसे ही इसकी भनक लगी, उन्होंने तुरंत FIR दर्ज कर दी। और सिर्फ इतना ही नहीं – एक विशेष साइबर जांच टीम भी बना दी गई है। सूत्रों की मानें तो, आईपी एड्रेस और लॉगिन डिटेल्स की जांच चल रही है। मुझे लगता है कि यह कोई अकेला शख्स नहीं, बल्कि कोई संगठित गिरोह हो सकता है। क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर पीछे बड़े नेटवर्क होते हैं।

प्रशासन और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

मुजफ्फरपुर के DM साहब ने तो साफ कह दिया है – “शून्य सहनशीलता”। लेकिन सच पूछो तो, क्या सिर्फ कड़ी सजा का डर ही काफी है? विपक्ष तो सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा ही रहा है। वहीं साइबर एक्सपर्ट्स की राय है कि two-factor authentication जैसी बेसिक चीजें भी अभी तक लागू नहीं हुईं। अजीब लगता है ना? जबकि हमारे फोन में हर छोटे-मोटे ऐप में यह सुविधा मौजूद है।

भविष्य में क्या होगा?

तो अब सवाल यह उठता है कि आगे क्या? पुलिस तो जांच का दायरा बढ़ा रही है, लेकिन मेरी नजर में सिर्फ यही काफी नहीं। सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि नए सत्यापन तंत्र पर विचार चल रहा है। साथ ही जागरूकता अभियान की भी बात हो रही है। पर मेरा सवाल है – क्या हमें हर बार घटना होने का इंतजार करना चाहिए? Guidelines जारी करने से पहले ही preventive measures क्यों नहीं लिए जाते? सोचने वाली बात है…

एक बात तो तय है – डिजिटल युग में ये साइबर धोखाधड़ी के मामले अब नॉर्मल नहीं रहे। और अगर हमने अभी गंभीरता नहीं दिखाई, तो आने वाले समय में स्थिति और भी बदतर हो सकती है। क्या हम ऐसा होने देंगे? शायद नहीं। लेकिन कार्रवाई तो होनी चाहिए, सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।

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बिहार में फर्जीवाड़े की यह कहानी तो कुछ ऐसी है जैसे फिल्मी स्क्रिप्ट! डॉग बाबू से लेकर CM नीतीश कुमार तक… सच में, ये मामले पढ़कर हैरानी होती है कि हमारी व्यवस्था में इतने बड़े छेद कैसे हो सकते हैं? असल में, प्रशासन की यह लापरवाही कोई नई बात नहीं – पर अब तो हद हो गई है।

सरकार को चाहिए कि Online प्रमाण पत्र सिस्टम पर जल्द से जल्द काम करे। वरना… अरे भई, अगर कुत्ते का प्रमाणपत्र बन सकता है, तो आगे क्या-क्या होगा? मज़ाक नहीं, एक गंभीर सवाल है।

एक तरफ तो हम Digital India की बात करते हैं, दूसरी तरफ ये हालात। थोड़ी सख्त कार्रवाई और थोड़ी स्मार्ट टेक्नोलॉजी – बस, समाधान इतना ही चाहिए। पर क्या होगा? देखते हैं।

बिहार का फर्जीवाड़ा स्कैम: डॉग बाबू से लेकर CM नीतीश तक – सारे सवाल, सारे जवाब

1. बिहार में ये Residential Certificate वाला पूरा माजरा क्या है?

सुनिए, मामला कुछ यूं है कि बिहार के कुछ ‘चालाक’ अफसरों और उनके साथी दलालों ने मिलकर आवासीय प्रमाणपत्रों का पूरा धंधा खड़ा कर दिया। और सबसे मजेदार बात? इन्होंने डॉग बाबु और मोनालिसा जैसे नामों के साथ-साथ खुद CM नीतीश कुमार जी के नाम तक फर्जी दस्तावेज बना डाले! अब आप ही बताइए, यहां सिस्टम की हालत क्या होगी? पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी है, लेकिन असली मास्टरमाइंड अभी भी फ्री घूम रहा होगा।

2. इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल है?

देखिए, इस मामले में तीन तरह के लोग फंसे हैं – पहले वो सरकारी बाबू जिनकी मोहर के बिना ये सब असंभव था, दूसरे वो middlemen जो ‘काम करवाने’ का झांसा देते हैं, और तीसरे वो जालसाज जो fake documents बनाने में माहिर हैं। है न दिलचस्प कॉम्बिनेशन? अभी तक जितने लोग पकड़े गए हैं, वो तो बस छोटी मछलियां हैं। असली शार्क तो अभी भी पानी में ही है!

3. भईया, CM साहब के नाम पर प्रमाणपत्र कैसे बन गया?

असल में बात ये है कि इन जालसाजों ने CM नीतीश कुमार का नाम और आधिकारिक पता इस्तेमाल करके residential certificate बनवा लिया। सोचिए! जिस व्यक्ति का पूरा बिहार में सबसे ज्यादा सुरक्षा बंदोबस्त होता है, उनके नाम पर फर्जीवाड़ा? ये तो वाकई में सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान है। ईमानदारी से कहूं तो अगर CM के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम आदमी की क्या हालत होगी?

4. ये सारा घोटाला आम बिहारी को कैसे प्रभावित करेगा?

देखा जाए तो इसका सबसे बड़ा नुकसान तो जनता के भरोसे को होगा। अब जब कोई असली व्यक्ति certificate बनवाने जाएगा, तो authorities उसे शक की नजर से देखेंगी। एक तरफ तो ये अच्छा है कि सिस्टम टाइट होगा, लेकिन दूसरी तरफ असली लोगों को परेशानी होगी। सरकार ने नए rules जरूर बनाए हैं, पर क्या ये काफी होंगे? वक्त ही बताएगा।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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