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बिहार में 16 अगस्त से शुरू होगा जमीन सर्वे महाअभियान: घर-घर पहुंचेंगी राजस्व टीमें, जानें पूरी जानकारी

बिहार में जमीन सर्वे का बड़ा फैसला: 16 अगस्त से घर-घर पहुंचेंगी राजस्व टीमें

अच्छी खबर है बिहारवासियों के लिए! सरकार ने आखिरकार जमीन के झगड़ों का हल निकालने का ठोस कदम उठा ही लिया। 16 अगस्त से लेकर 20 सितंबर तक चलने वाले इस “राजस्व महाअभियान” में अब आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकारी टीमें खुद आपके दरवाज़े तक पहुंचेंगी। सच कहूं तो, ये उतनी ही बड़ी राहत है जितनी गर्मी में बिजली का आना!

बिहार में जमीन के मामले तो… हम सब जानते हैं कितने पेचीदा होते हैं। Digital jamabandi से लेकर विरासत के बंटवारे तक – हर चीज़ में झंझट। पहले तो लोगों को पटवारी खाने के चक्कर लगाकर सफेद हो जाना पड़ता था। समय भी जाता था, पैसा भी। पर अब? देखिए न, सरकार ने उल्टा पुल्टा फॉर्मूला अपनाया है – “जनता के पास सरकार पहुंचेगी”। शाबाश!

तो ये काम कैसे होगा? सुनिए… अगस्त से सितंबर तक राजस्व वाले बाबू सीधे आपके गांव पहुंचेंगे। उनका मुख्य काम होगा: Digital jamabandi को दुरुस्त करना, बंटवारे के कागजात साफ करना और झगड़ों का जल्द निपटारा। साथ ही, टेक-सैवी लोगों के लिए online पोर्टल भी तैयार है। एक तरफ तो ये सुविधा बढ़िया है, पर सवाल ये है कि गांव के बुजुर्ग इसका कितना फायदा उठा पाएंगे?

राजनीति की बात करें तो… जैसा कि हमेशा होता आया है। सरकार दावा कर रही है कि “भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी”, तो विपक्ष बोल रहा है “ये सब दिखावा है”। कुछ किसानों को उम्मीद है, तो कुछ का कहना है – “देखते हैं कब तक चलता है ये सब”। सच तो ये है कि बिहार में जमीन के मामलों में लोगों का भरोसा टूट चुका है।

अगर सच में ये योजना ईमानदारी से चली, तो बिहार के किसानों का जीवन आसान हो सकता है। Digital सिस्टम मजबूत होगा, विवाद कम होंगे। पर याद रहे – नीयत साफ होनी चाहिए। वरना ये भी उन्हीं फाइलों में दफन हो जाएगा जिन्हें हम भूल चुके हैं। बिहार की जनता की नजरें अब इस अभियान पर टिकी हैं। क्या सच में बदलाव आएगा? वक्त बताएगा।

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बिहार सरकार का यह नया अभियान कितना काम का होने वाला है, ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन अगर ईमानदारी से कहूं, तो जमीन के झगड़ों का स्थायी हल निकालने की कोशिश वाकई तारीफ़ के काबिल है। 16 अगस्त से शुरू हो रही इस पहल में राजस्व विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे – और देखा जाए तो ये तरीका काफी पारदर्शी भी लगता है।

पर सवाल यह है कि क्या यह सिस्टम वाकई काम करेगा?

असल में, बिहार में जमीन के मामले हमेशा से ही गड़बड़झाले से भरे रहे हैं। तो इस बार सरकार ने सीधे लोगों के दरवाज़े पर सर्वे का ऑप्शन रखा है। Smart move, है न? लेकिन सब कुछ नागरिकों के सहयोग पर ही निर्भर करता है। अगर आप भी बिहार के रहने वाले हैं, तो इस सर्वे में पूरा साथ दीजिए – वरना फिर वही पुरानी कहानी, न्यायालय के चक्कर और सालोंसाल का इंतज़ार!

एक बात और – इस पूरे प्रोसेस में online और offline दोनों तरीकों से अपनी जानकारी चेक करते रहिए। सरकारी वादे तो अच्छे लगते हैं, पर हमें खुद भी सतर्क रहना होगा। आखिरकार, ज़मीन का सवाल है न?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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