बिहार में अगस्त से सियासी तूफान! NDA vs महागठबंधन की जंग, कौन रहेगा मैदान में?
अरे भाई, बिहार की राजनीति अब गर्मा गई है ना? विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही माहौल ऐसा बन गया है जैसे पटना के गर्मियों वाले दिन – हर कोई पसीने से लथपथ! अगस्त शुरू होते ही NDA (भाजपा+जदयू+हम) और महागठबंधन (राजद+कांग्रेस+वाम दल) एक-दूसरे पर टूट पड़े हैं। सच कहूँ तो, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी ने विपक्ष को नई जान दी है, वहीं NDA के संयुक्त सम्मेलन ने तो जैसे आग में घी डाल दिया है। अब देखना है, यह मैच किसके हक में जाता है!
मामले की पृष्ठभूमि: 2020 के चुनाव से आगे
यार, बिहार की सियासत समझनी हो तो 2020 को याद करो। NDA ने तब जीत तो दर्ज की थी, लेकिन इस बार दोनों टीमों ने अपनी प्लेइंग इलेवन ही बदल दी है। तेजस्वी यादव ने ‘युवा बिहार’ और ‘रोजगार’ को लेकर ऐसा शोर मचाया है कि उनकी छवि अब लालू प्रसाद से अलग बनने लगी है। वहीं भाजपा वाले ‘विकास’ और ‘सुशासन’ का मंत्र जप रहे हैं। और कांग्रेस? उन्होंने तो राहुल गांधी की Bharat Jodo Yatra को बिहार में ऐसे पेश किया जैसे कोई ब्लॉकबस्टर मूवी रिलीज कर रहे हों!
चुनावी मैदान गर्म: रैलियाँ, सम्मेलन और सोशल मीडिया युद्ध
अगस्त आते ही बिहार का हर मैदान सियासी क्रिकेट का स्टेडियम बन गया है। राजद-कांग्रेस की रैलियाँ देखो तो लगता है जैसे कोई मेला लगा हो – भीड़, शोर और जोश! उधर NDA वालों ने पटना में ऐसा सम्मेलन प्लान किया है जैसे कोई बॉलीवुड मेगा इवेंट हो। और भाई, सोशल मीडिया पर तो जंग इतनी तेज है कि ट्विटर-फेसबुक के सर्वर धधक रहे होंगे। दोनों तरफ के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर ऐसे ट्वीट कर रहे हैं जैसे गोली चला रहे हों!
नेताओं की प्रतिक्रियाएं और जनता की आवाज
अब सुनिए इन नेताओं के बयानों का तड़का। राजद वाला कहता है – “इस बार तो हमारी सुनामी आएगी!” भाजपा वाला जवाब देता है – “ये लोग तो बस नारेबाजी करते हैं, हम काम दिखाएँगे!” असल में, जनता क्या सोचती है? कुछ लोग कहते हैं मुद्दे मायने रखेंगे, तो कुछ का मानना है जाति का खेल ही चलेगा। मेरा मानना है? दोनों ही बातें सही हैं – बिहार की राजनीति तो ऐसे ही चलती है!
आगे की राह: क्या होगा अगस्त-सितंबर में?
अब तो पारा और चढ़ेगा भाई! अगस्त-सितंबर में रैलियों का ऐसा तूफान आएगा कि बिहार की सड़कें गूँज उठेंगी। चुनाव आयोग जब तिथि घोषित करेगा, तब तो खेल और भी रोमांचक हो जाएगा। कई सर्वे कह रहे हैं यह मुकाबला बेहद टाइट होगा – जैसे IPL का फाइनल मैच! एक बात तो तय है – बिहार की सियासत अब पूरी तरह गर्म हो चुकी है। और हम सबके पास तो बस एक ही विकल्प है – पॉपकॉर्न लेकर बैठ जाओ, शो शुरू हो चुका है!
बिहार की सियासी जंग – NDA vs महागठबंधन: कुछ सवाल जो दिमाग में आते हैं
सच कहूं तो बिहार की राजनीति हमेशा से ही दिलचस्प रही है। और अब जब NDA और महागठबंधन आमने-सामने हैं, तो कई सवाल उठते हैं। आखिर कौन जीतेगा? कौन सी बातें voters को प्रभावित करेंगी? चलिए, इन्हीं सवालों पर थोड़ी बात करते हैं।
1. असल में, बिहार में NDA और महागठबंधन को लेकर मुख्य मुद्दे क्या हैं?
देखिए, मुद्दे तो वही पुराने हैं – रोजगार, किसानों की मुश्किलें, बेरोजगारी। लेकिन इस बार twist यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर corruption के आरोप लगा रहे हैं। NDA विकास के projects की बात कर रही है, तो महागठबंधन poor governance को issue बना रहा है। मजेदार बात यह है कि असल मुद्दे कहीं पीछे छूटते दिख रहे हैं। सच ना?
2. क्या NDA का voter base अभी भी मजबूत है?
सीधा जवाब? हां। खासकर upper castes और OBC वोटरों में तो BJP-JDU का जोड़ अभी भी जमता है। पर यहां एक ‘लेकिन’ है – पिछले कुछ सालों में महागठबंधन ने भी अपनी पकड़ मजबूत की है। तो अब सवाल यह उठता है कि क्या यह मजबूती सच में चुनावी नतीजों में दिखेगी?
3. महागठबंधन के नेता और उनकी चाल: क्या यह काम आएगी?
तेजस्वी यादव, Congress और left parties… यह तिकड़ी साफ तौर पर youth और backward classes को target कर रही है। Strategy तो दमदार लगती है। पर असल सवाल यह है कि क्या वे NDA के votes को बांट पाएंगे? अगर हां, तो game बदल सकता है। नहीं तो… आप समझ ही गए होंगे।
4. क्या इस बार बिहार कुछ नया चुन सकता है?
ईमानदारी से कहूं तो… शायद। Youth और first-time voters performance देख रहे हैं, hollow promises नहीं। पर यहां एक reality check – NDA और महागठबंधन के अलावा कोई तीसरा serious option नजर नहीं आ रहा। तो फिलहाल तो यही दो मुख्य players हैं। हालांकि, politics में कभी कुछ भी हो सकता है। है ना?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com