“बीजेपी को मॉनसून सत्र से पहले नया राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं मिल पाएगा? जानें वजह!”

BJP को मॉनसून सत्र से पहले नया अध्यक्ष क्यों नहीं मिलेगा? असली वजह जानकर हैरान रह जाएंगे!

देखिए, BJP के अंदर ये राष्ट्रीय अध्यक्ष वाला मामला कुछ और ही टाइम लेने वाला है। मॉनसून सत्र आने को है, लेकिन नए अध्यक्ष की घोषणा होती नहीं दिख रही। और वजह? सीधा सा मामला है – पार्टी का फोकस अभी राज्यों पर है। जी हाँ, UP से लेकर गुजरात तक, नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर ही सारी हलचल है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर का फैसला थोड़ा पीछे जाता दिख रहा है।

पूरा माजरा क्या है?

अब जेपी नड्डा का कार्यकाल तो काफी समय से चल रहा है – ये तो सभी जानते हैं। पर सवाल ये उठता है कि आखिर इतनी देरी क्यों? असल में, BJP की गेम प्लान कुछ अलग है। 2024 के चुनावों को देखते हुए पार्टी को UP, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में अपनी जड़ें मजबूत करनी हैं। और ये काम प्रदेश अध्यक्षों के बिना कैसे होगा? तो समझ लीजिए, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अभी सेकंड प्रायोरिटी में आ गया है।

मुख्य बात: क्या ये देरी जानबूझकर है?

अब यहाँ दिलचस्प बात ये है कि BJP का नेतृत्व जानबूझकर इस प्रक्रिया को धीमा कर रहा है। क्यों? क्योंकि पहले राज्यों में पार्टी की नींव मजबूत करनी है। वैसे भी, मॉनसून सत्र आने वाला है – ऐसे में बड़े फैसले लेने से पहले पार्टी को सब कुछ सेट करना होगा। और अगर जल्दबाजी नहीं हुई तो… हाँ, नड्डा जी का कार्यकाल बढ़ भी सकता है। थोड़ा और!

क्या कह रहे हैं लोग?

BJP के कुछ नेताओं की मानें तो ये पूरी चीज प्लान्ड है। “पहले राज्य, फिर राष्ट्र” वाली स्ट्रैटजी पर काम चल रहा है। वहीं विपक्ष? उन्हें तो हर चीज में मतभेद दिखता है! राहुल गांधी ने तो ट्विटर पर ही सवाल उठा दिए। पर विश्लेषकों की राय अलग है – उनका मानना है कि 2024 की तैयारी के लिए ये सब चल रहा है। एक तरह से देखें तो ये देरी असल में सोचा-समझा कदम हो सकता है।

अब आगे क्या?

अगले कुछ हफ्ते बड़े अहम होने वाले हैं। राज्यों में नियुक्तियाँ पूरी होंगी, फिर शायद राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुद्दा उठेगा। पर एक बात तय है – ये प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर से पहले शुरू होती नहीं दिख रही। और हाँ, इसका असर 2024 की रणनीति पर जरूर पड़ेगा। सकारात्मक या नकारात्मक? वक्त बताएगा।

तो क्या निष्कर्ष निकालें?

सच कहूँ तो BJP इस समय एक बड़ी पजल सॉल्व कर रही है। राज्यों की चाल पहले, फिर राष्ट्रीय मोहरा। नड्डा जी का कार्यकाल बढ़ सकता है, पर ये कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। कुल मिलाकर? ये सब 2024 की तैयारी का हिस्सा है। और हम सब जानते हैं – BJP कोई भी चाल बिना सोचे-समझे नहीं चलती। तो इंतज़ार कीजिए, जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है!

यह भी पढ़ें:

बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी… है ना ये थोड़ा अजीब लग रहा है? असल में, ये सिर्फ एक तकनीकी देरी नहीं है। पार्टी के अंदर जो हो रहा है, वो किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं!

तो क्या वजह है इस देरी की? मुख्य मुद्दा तो राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर है। लेकिन यहाँ सवाल सिर्फ नियुक्ति का नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर चल रही उस ‘अंदरूनी खींचतान’ का है जिसके बारे में सब जानते हैं, पर खुलकर कोई बात नहीं करता।

देखा जाए तो ये स्थिति एक बड़ी समस्या की तरफ इशारा कर रही है – पार्टी के सामने संगठनात्मक चुनौतियाँ हैं। और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं। जब तक ये गाँठें नहीं खुलेंगी, बड़े फैसले लेना मुश्किल होगा। आखिरकार, टीम में एकता होनी चाहिए ना?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मॉनसून सत्र से पहले पार्टी इस गतिरोध को कैसे तोड़ती है। क्या कोई बड़ा ऐलान होगा? या फिर चुपचाप सब कुछ सेटल कर लिया जाएगा? समय बताएगा… लेकिन एक बात तो तय है – अगले कुछ हफ्ते देखने लायक होंगे!

(थोड़ा सा गॉसिप वाला अंदाज़… क्योंकि राजनीति में ये सब चलता है ना?)

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

हरिद्वार में कांवड़ियों का हंगामा! महिला पर हाथ उठाने और हाईकोर्ट के DJ बैन पर ज्वलंत खबर

“NHAI का कामकाज बदल गया! AI से 25,000 करोड़ की बचत और 155 विवादों का हल”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments