BOE के एंड्रयू बेली का बयान: क्या दुनिया की अर्थव्यवस्था अब टूटने के कगार पर है?
अरे भई, ये BOE (बैंक ऑफ इंग्लैंड) वाले कुछ ज्यादा ही गंभीर लग रहे हैं! गवर्नर एंड्रयू बेली ने तो जैसे सीधे-सीधे दुनिया को चेतावनी दे डाली – अमेरिका, चीन और बाकी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को अभी नहीं जागे तो…? उनका कहना है कि global trade में जो असंतुलन पैदा हो गया है, उसे ठीक करने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। वरना? वरना तो पूरी दुनिया को economic chaos का सामना करना पड़ेगा। और ये बात ऐसे समय में कही जा रही है जब दुनिया पहले से ही कितने संकटों से जूझ रही है!
असल में, ये चेतावनी अचानक नहीं आई है। पिछले कुछ सालों को याद करिए – अमेरिका-चीन का trade war, कोविड के बाद supply chain का बिगड़ना, फिर यूक्रेन युद्ध से oil और food prices का आसमान छूना… ये सब मिलकर global economy को कहाँ का कहाँ पहुँचा दिया है। बेली साहब ने बिल्कुल सही पकड़ा है – अब या तो देश आपस में मिलकर काम करेंगे, या फिर सबको मिलकर मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
बात सिर्फ trade imbalance की नहीं है। देखा जाए तो ये तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। बेली ने खास तौर पर अमेरिका, चीन और यूरोप को टारगेट किया है – भई, थोड़ा coordinate तो करो अपनी policies! BOE ने साफ कहा है कि अगर ये असंतुलन ऐसे ही चलता रहा तो inflation, unemployment और recession जैसी समस्याएँ और गहरा जाएँगी। और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है।
अब सवाल यह है कि दुनिया के experts इस पर क्या सोचते हैं? ज्यादातर economists मान रहे हैं कि BOE ने सही समय पर alarm बजा दिया है। कई लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि देशों को protectionist policies से तुरंत पीछे हटना चाहिए। पर सच कहूँ तो, जब तक अमेरिका और चीन जैसे बड़े players इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, तब तक स्थिति की गंभीरता समझ में नहीं आती।
तो अब आगे क्या? अगर बड़े देशों ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, तो global trade और भी ज्यादा unstable हो सकता है। आने वाले महीनों में G20 और WTO की meetings में ये मुद्दा जरूर उठेगा। कुछ analysts का तो ये भी मानना है कि अगर सही तरीके से काम किया जाए तो अर्थव्यवस्था को फिर से stable किया जा सकता है। पर क्या वाकई ऐसा हो पाएगा?
एक बात तो साफ है – BOE ने जो चेतावनी दी है, वो दुनिया के leaders के लिए एक तरह का wake-up call है। अब वक्त आ गया है कि national interests से ऊपर उठकर global cooperation को priority दी जाए। नहीं तो… नहीं तो जो हालात बनने वाले हैं, उसकी कीमत हम सबको चुकानी पड़ेगी। और वो कीमत, दोस्तों, बहुत भारी होगी।
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Source: Dow Jones – Social Economy | Secondary News Source: Pulsivic.com