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बढ़ते BRICS समूह के नेता रियो शिखर सम्मेलन में जुटे, जानें क्या है खास

BRICS शिखर सम्मेलन: रियो में जुटे नेता, पर चीन-रूस के बॉस कहाँ गायब?

अभी-अभी ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में BRICS की बैठक शुरू हुई है। दो दिन तक चलने वाली यह मीटिंग काफी दिलचस्प है, क्योंकि इसमें नए-पुराने सभी देशों के नेता एक साथ आए हैं। भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका तो हैं ही, साथ ही हाल में जुड़े नए देशों के लीडर्स भी मौजूद हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चीन के शी जिनपिंग और रूस के पुतिन क्यों नहीं आए? ये दोनों तो BRICS के heavyweights माने जाते हैं न! क्या ये सिर्फ schedule का issue है, या फिर कोई राजनीतिक message देना चाहते हैं?

BRICS: छोटा ग्रुप, बड़ा दबदबा

देखिए, BRICS (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) पिछले 10 साल से दुनिया की economy और राजनीति में अपनी धाक जमा रहा है। अब तो इसका दायरा और बढ़ गया है – सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया जैसे नए देश भी इसमें शामिल हो गए हैं। इस बार की मीटिंग में UAE और मिस्र जैसे देश पहली बार participate कर रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो BRICS अब सिर्फ 5 देशों का क्लब नहीं रहा। Global south की आवाज़ बनता जा रहा है।

क्या चीन-रूस की नाराज़गी का संकेत है?

असल में मज़ेदार बात यह है कि जिन दो देशों ने BRICS को आगे बढ़ाने में सबसे ज़्यादा मेहनत की, वो ही इस बार top level पर मौजूद नहीं हैं। चीन ने तो अपने प्रधानमंत्री को भेज दिया, और रूस ने विदेश मंत्री। है न अजीब बात? खासकर तब, जब पिछले कुछ सालों में ये दोनों देश BRICS में सबसे active रहे हैं। कई experts का मानना है कि शायद Ukraine war और West के साथ tensions की वजह से ये दोनों अपनी priorities बदल चुके हैं। या फिर नए members को लेकर कोई internal issues हैं। कौन जाने!

इस बार क्या है agenda पर?

इस बैठक में कई जरूरी मुद्दों पर बात होगी, जैसे कि:

  • देशों के बीच economic cooperation कैसे बढ़ेगा?
  • Digital currency और payment systems पर collaboration
  • Ukraine war का global impact और उसका समाधान
  • Developing countries की problems को कैसे tackle करें

नेता क्या कह रहे हैं?

हमारे PM मोदी ने तो साफ कहा – “BRICS developing countries को global stage पर strong voice देता है।” ब्राज़ील के प्रेसिडेंट ने इसे “global unity” का प्रतीक बताया। पर सच पूछो तो, चीन-रूस के बिना यह unity कितनी सच्ची लगती है? कुछ analysts तो यहाँ तक कह रहे हैं कि BRICS अब दो groups में बंट सकता है – एक तरफ चीन-रूस का ब्लॉक, दूसरी तरफ बाकी देश।

आगे क्या होगा?

इस summit के results सिर्फ BRICS देशों ही नहीं, पूरी दुनिया को affect कर सकते हैं। नए members के साथ इसका influence और बढ़ेगा। आने वाले सालों में और देश इसमें शामिल हो सकते हैं। पर सवाल यह है कि क्या यह group वाकई में एकजुट रह पाएगा? क्योंकि अभी तो ऐसा लग रहा है जैसे internal politics बाहर आने लगी है।

एक बात तो तय है – यह summit BRICS के नए chapter की शुरुआत है। अब देखना यह है कि नए और पुराने members के बीच balance कैसे बनेगा। और सबसे बड़ी बात – क्या यह group वैश्विक समस्याओं का कोई practical solution दे पाएगा, या सिर्फ बातों तक ही सीमित रहेगा?

यह भी पढ़ें:

BRICS का यह रियो शिखर सम्मेलन… सच कहूं तो मामला सिर्फ सदस्य देशों की मीटिंग तक सीमित नहीं है। देखा जाए तो यह पूरी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का गेम-चेंजर साबित हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि कैसे?

असल में, जब BRICS के ये पांच देश एक मंच पर आते हैं, तो उनकी सामूहिक ताकत किसी भूकंप से कम नहीं होती। अकेले चीन और भारत की GDP ही देख लीजिए – दुनिया का कितना बड़ा हिस्सा इनके हाथ में है! और अब इसमें नए सदस्य भी जुड़ रहे हैं… तो सोचिए, इसका असर क्या होगा?

हालांकि, सिर्फ आर्थिक मामले ही नहीं। इस बार के एजेंडे में जो बातें हैं – जलवायु परिवर्तन, technology transfer, यूक्रेन संकट… ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर BRICS का रुख पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा।

और सबसे मजेदार बात? यह समूह अभी तक अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल ही नहीं कर पाया है। जैसे हमारे यहां कहते हैं – “अभी तो पहला पहर है!” BRICS की असली ताकत तो अभी सामने आनी बाकी है।

तो क्या आपको नहीं लगता कि यह सम्मेलन सिर्फ एक फोटो-ऑप से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होगा? चलिए, साथ-साथ देखते हैं कि यह कैसे वैश्विक समीकरणों को बदलता है…

(Note: I’ve maintained the original paragraph structure while completely rewriting the content to sound more human. Key changes:
1. Added conversational phrases and rhetorical questions
2. Used more colloquial language and idioms
3. Varied sentence lengths dramatically
4. Included personal opinions and analogies
5. Kept English words in original form
6. Added imperfections like sentence fragments (“असल में,” “हालांकि”)
7. Made it sound like a blogger thinking aloud rather than a formal report)

BRICS Summit 2024 – वो सवाल जो हर कोई पूछ रहा है!

BRICS आखिर है क्या? और इसका असली मकसद?

देखिए, BRICS कोई नया ट्रेंडिंग हैशटैग तो नहीं, लेकिन ये पांच देशों – Brazil, Russia, India, China और South Africa का एक जबरदस्त ग्रुप है। असल में, ये सिर्फ economic cooperation की बात नहीं करता। सच कहूं तो, ये एक तरह से वैश्विक मंच है जहां developing countries की आवाज़ उठती है। और हां, अब तो कई और देश भी इसमें शामिल होने को बेताब हैं। क्यों? वो आगे समझते हैं…

2024 का BRICS Summit: Russia में क्यों और क्या होगा खास?

इस बार की मेजबानी Russia के Kazan शहर को मिली है। अब सवाल यह कि ये summit इतना important क्यों है? एक तरफ तो नए देशों को जोड़ने पर चर्चा होगी, वहीं global economy की चुनौतियों पर गंभीर बातचीत। पर मेरी निजी राय? असली गेमचेंजर हो सकता है dollar के alternatives पर होने वाला फोकस। क्या आपको नहीं लगता?

BRICS में नए देश: फायदे या सिरदर्द?

अरे भई, ज्यादा सदस्य तो अच्छी बात है न? पर सच्चाई ये है कि इससे BRICS की ताकत बढ़ेगी – trade के नए रास्ते खुलेंगे, developing countries को मिलेगा बड़ा मंच। लेकिन… हमेशा एक लेकिन तो होता ही है न? ज्यादा सदस्यों का मतलब है ज्यादा मतभेद भी। फिर भी, अगर सब एक साथ काम करें तो dollar के monopoly को चुनौती देना कोई मुश्किल काम नहीं।

भारत और BRICS: हमारा क्या रोल?

ईमानदारी से कहूं तो, BRICS में भारत की भूमिका उस दोस्त की तरह है जो हर ग्रुप में सबको जोड़े रखता है! हमें मिल रहे हैं technology transfer के मौके, बढ़ रहा है trade volume। पर सबसे बड़ी बात? Global issues पर अब हमारी आवाज़ सुननी पड़ती है। और यार, आज के दौर में ये किसी जैकपॉट से कम नहीं। सही कहा न?

Source: DW News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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