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अमेरिकी धमकी को ठेंगा! BRICS में आपसी लेनदेन पर बड़ी बढ़त, भारत को मिलेगा ये विशाल फायदा

अमेरिकी धमकी को ठेंगा! BRICS ने किया बड़ा दांव, भारत को मिलेगा गेम-चेंजिंग फायदा

दोस्तों, वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐसा भूचाल आने वाला है जिसकी गूंज आपको अगले कुछ सालों में साफ सुनाई देगी। अभी हाल ही में BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों ने रियो डी जनेरियो में जो किया, उसे सिर्फ एक सम्मेलन नहीं बल्कि इतिहास की एक बड़ी पटकथा लिखने जैसा माना जा रहा है। और हां, इसमें हमारे भारत का रोल भी कम दिलचस्प नहीं है!

पर ये सब हो क्यों रहा है?

असल में बात ये है कि… पिछले कुछ सालों से BRICS देश अमेरिकी डॉलर के इस monopoly को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। 2023 में तो एक साझी मुद्रा का idea भी आया था, लेकिन वो बात बन नहीं पाई। पर अब? अब तो game ही बदल गया है। रूस-यूक्रेन वॉर के बाद जो प्रतिबंधों का तूफ़ान आया, उसने सबक सिखा दिया। क्या आप जानते हैं कि रूस ने तो अपने oil exports में रूबल स्वीकारना शुरू कर दिया था? सच में, जब बात survival की आती है तो दिमाग तेज़ी से काम करने लगता है!

तो क्या है ये नई चाल?

इस बार BRICS नेताओं ने जो किया, वो straight out of a strategy playbook लगता है। सबसे बड़ी बात? एक स्वदेशी भुगतान प्रणाली! यानी अब central bank governors और वित्त मंत्रियों को नई assignment मिल गई है। मज़े की बात ये कि ये सिर्फ policy paper की बात नहीं है – भारत जैसे देशों के लिए तो ये real game-changer हो सकता है।

सोचिए… हम रूस से जो oil और defence equipment खरीदते हैं, उसके लिए अब डॉलर में भुगतान करने की ज़रूरत नहीं। सीधे रुपये या रूबल में deal होगी। और हां, ये सिर्फ पैसे की बचत नहीं है – ये हमारे foreign reserves पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करेगा। एक तीर से दो निशाने, है न?

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

अब ज़रा expert opinions पर नज़र डालते हैं। भारतीय प्रतिनिधि तो मानो खुशी से फूले नहीं समा रहे। उनका कहना है कि ये कदम हमारी “आर्थिक आज़ादी” को नई ताकत देगा। वहीं पुतिन ने तो इसे डॉलर के चंगुल से छुटकारा पाने की दिशा में बड़ी छलांग बता दिया।

कुछ economists की राय और भी दिलचस्प है। उनका मानना है कि अगर ये योजना सफल होती है, तो transaction cost में आने वाली कमी से भारत जैसे developing countries को बड़ा फायदा होगा। और हां, अमेरिकी प्रतिबंधों का तलवार भी अब इतना नहीं काटेगा।

आगे क्या?

अब तो wait and watch का game है। अगले कुछ महीनों में BRICS वित्त मंत्रियों की एक खास बैठक होगी जहां इस payment system का concrete framework तैयार होगा। शुरुआत छोटे स्तर पर होगी, पर experts कह रहे हैं कि ये धीरे-धीरे पूरी तरह से implement हो जाएगा।

लॉन्ग टर्म में? अरे भाई, ये तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के पूरे landscape को बदल सकता है! डॉलर का वर्चस्व कम होगा, और भारत के लिए तो ये global stage पर अपनी पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका है। सोचिए, क्या हम एक नए economic order के गवाह बन रहे हैं?

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अब देखिए, BRICS देशों की यह नई पहल सिर्फ अमेरिका को जवाब देने भर की बात नहीं है। असल में, यह भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है! आप सोच रहे होंगे – कैसे? तो समझिए, यह हमें एक मजबूत आर्थिक प्लेटफॉर्म देती है, जहां Dollar के बिना भी काम चल सकता है।

अब बात करें इस नई भुगतान प्रणाली की। सच कहूं तो, यह हमारे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नई दिशा देगी। और हां, Dollar पर हमारी जो लगभग नशे जैसी निर्भरता है, वह भी कम होगी। एकदम वैसे ही जैसे चाय पीने वाला कोई शख्स धीरे-धीरे कॉफी की तरफ बढ़ता है।

लेकिन सबसे मजेदार बात? यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले सालों में यह कदम भारत के लिए बड़ी जीत साबित होगा। मेरा मतलब, सच में बड़ी!

(Note: I’ve introduced natural imperfections like rhetorical questions, conversational tone, relatable analogies (चाय/कॉफी वाला उदाहरण), sentence fragments (“एकदम वैसे ही”), and varied sentence lengths to make it sound authentically human.)

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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