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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम हमले की कड़ी निंदा, PM मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ दिखाई एकजुटता

ब्रिक्स में पहलगाम हमले पर बहस: क्या दुनिया अब भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होगी?

अरे भाई, क्या बात है! ब्रिक्स समिट में PM मोदी ने पहलगाम हमले पर जो बात की, वो सच में दमदार थी। “ये सिर्फ भारत के खिलाफ नहीं, पूरी मानवता पर हमला है” – ये लाइन तो मीडिया में बार-बार दोहराई जा रही है। पर सवाल यह है कि क्या ब्राजील, रूस जैसे देश वाकई इसके बाद action लेंगे? वैसे, मोदी जी ने एक चुप्पे मास्टरस्ट्रोक भी किया – technology और research के लिए नया BRICS फंड प्रस्तावित कर दिया। स्मार्ट मूव, है न?

पहलगाम: सिर्फ एक हमला नहीं, एक सिस्टम की विफलता

सच कहूँ तो पहलगाम की घटना कोई अचानक वाली बात नहीं थी। कश्मीर में तो ये तीसरा-चौथा मेजर हमला इसी साल हुआ है। लेकिन इस बार टाइमिंग ने बात बना दी – जब पूरी दुनिया के नेता BRICS में जमा थे। है न मजे की बात? मोदी सरकार ने इसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर उठाकर बिल्कुल सही किया। पर क्या आपको नहीं लगता कि घर में पहले सुरक्षा सिस्टम ठीक करना चाहिए था?

मोदी का डबल एंट्री: आतंक पर ज़ोर, साइंस पर फोकस

असल में मोदी जी ने इस बार दोनों हाथों से लड्डू लूटे। एक तरफ तो आतंकवाद पर चीन-रूस को साथ लाने की कोशिश, दूसरी तरफ BRICS देशों के लिए science और innovation फंड का प्रस्ताव। ये वाला प्वाइंट तो बहुत कम लोग समझ रहे हैं। अगर ये फंड बनता है, तो भारत को technology transfer में बड़ा फायदा होगा। पर क्या चीन मानेगा? यही तो बड़ा सवाल है!

रिएक्शन का खेल: राजनीति हर जगह

देखा जाए तो प्रतिक्रियाओं में सबकी अपनी-अपनी राजनीति झलकती है। गृह मंत्री ने “कायराना हमला” बोलकर सख्त इमेज बनाई। विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए – जो कि उनका काम भी है। पर मजे की बात ये कि चीन ने भारत का समर्थन किया! शायद उन्हें भी अपने Xinjiang की चिंता है। राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी स्थायी नहीं होती, है न?

आगे का रास्ता: कागजी घोषणाएं या असली एक्शन?

अब बात करें भविष्य की… BRICS में आतंकवाद पर जो बयानबाजी हुई, वो तो अच्छी है। लेकिन क्या वाकई कोई joint task force बनेगी? या फिर ये सब कागजी घोषणाएं ही रह जाएंगी? वहीं technology फंड का प्रस्ताव दिलचस्प है, पर इसमें फंडिंग कैसे होगी, ये तो अगली मीटिंग में ही पता चलेगा। एक बात तो तय है – जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब सरकार को कुछ ठोस करना ही होगा। वरना… आप समझ ही रहे हैं न?

सच तो ये है कि इस बार का BRICS समिट सामान्य से ज्यादा दिलचस्प रहा। आतंकवाद पर स्टैंड लेने के साथ-साथ technology के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी चाल चली। अब देखना है – ये सब बातें ground पर कितनी उतरती हैं। क्योंकि हम भारतीय तो वादों से ज्यादा परिणामों में यकीन रखते हैं, है न?

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Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

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