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-10°C में नंगे पांव चढ़ाई, पेट में गोली और शहादत: कैप्टन नीकेझाकू की अदम्य गाथा

-10°C में नंगे पांव चढ़ाई, पेट में गोली और शहादत: कैप्टन नीकेझाकू की वो कहानी जो रोंगटे खड़े कर दे

दोस्तों, भारतीय सेना के इतिहास में कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो सुनकर लगता है – अरे भई, ये सच में हुआ था? कर्गिल युद्ध का वो दौर, जब कैप्टन नीकेझाकू केंगुरीज ने साबित कर दिया कि इंसान की हिम्मत के आगे प्रकृति भी हार मान लेती है। सोचो जरा, -10°C की ठंड में नंगे पैर बर्फीली चढ़ाई? पेट में गोली लगने के बाद भी लड़ाई जारी रखना? ये कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि हमारे एक जवान की असली जिंदगी का वाकया है। और है न ये सोचने वाली बात कि ऐसी ताकत आखिर आती कहाँ से है?

वो लड़का जिसने पहाड़ों से सीखा था लड़ना

असल में देखा जाए तो कैप्टन नीकेझाकू की कहानी शुरू होती है नागालैंड की उन पहाड़ियों से, जहाँ बच्चे खेल-खेल में ही साहस सीख लेते हैं। 2 राजपूताना राइफल्स में उनका जाना… वैसे तो एक सामान्य पोस्टिंग थी, लेकिन 1999 में कर्गिल वॉर ने सब बदल दिया। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने हमारी चौकियाँ छीन ली थीं, और कैप्टन की टुकड़ी को एक असंभव-सा टास्क मिला – बर्फीली खड़ी चट्टान पर चढ़कर पोस्ट वापस लेना। सच कहूँ तो, normal conditions में भी ये मिशन मुश्किल था, और यहाँ तो ऑक्सीजन की कमी और दुश्मन की मजबूत पोजीशन भी थी।

जब जूते जम गए, तो नंगे पैर ही चल दिए

यहाँ आकर कहानी दिलचस्प हो जाती है। चढ़ाई शुरू करते ही भयंकर ठंड में उनके जूते बर्फ में जम गए। अब सोचिए – आपके पास दो विकल्प हैं: या तो वापस लौटो, या फिर नंगे पैर आगे बढ़ो। कैप्टन ने दूसरा रास्ता चुना। -10°C में बर्फ पर नंगे पैर! मेरे ख्याल से तो हम लोग AC room में बैठकर भी ठंड से कांपने लगते हैं। लेकिन इस योद्धा के लिए मिशन पहले था, अपनी सुविधा बाद में। और तो और, जब दुश्मन की गोली उनके पेट में लगी, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी। खून से लथपथ होकर भी आगे बढ़े – अपने साथियों को लीड करते हुए।

वो आखिरी लड़ाई जिसने इतिहास बदल दिया

यहाँ तक पढ़कर आप सोच रहे होंगे – भई, इतना सब सहने के बाद शायद वो रुक गए होंगे। लेकिन असलियत तो और हैरान करने वाली है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कैप्टन ने न सिर्फ दुश्मन के बंकर को उड़ाया, बल्कि अपने साथियों को सुरक्षित निकाला भी। वो तब तक लड़ते रहे, जब तक कि मिशन पूरा नहीं हो गया। सच में, एक व्यक्ति का जज्बा पूरे युद्ध का रुख बदल सकता है, ये उसका जीता-जागता उदाहरण है।

जब पूरा देश एक सैनिक के आगे नतमस्तक हुआ

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। सेना ने इसे “अद्वितीय वीरता” बताया, तो रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर लिखा – “भारतीय सैन्य परंपरा की अमर गाथा”। नागालैंड के मुख्यमंत्री का कहना था कि वो पूरे नागा समुदाय का गौरव हैं। मरणोपरांत वीर चक्र मिला, गाँव में स्मारक बना… पर असल सम्मान तो वो है जो आज भी NCC के cadets से लेकर सैन्य अकादमियों तक में उनकी कहानी सुनाई जाती है।

सच कहूँ तो, कैप्टन नीकेझाकू की ये कहानी सिर्फ एक सैनिक की बहादुरी नहीं, बल्कि उस जज्बे की मिसाल है जो हम सबके अंदर छुपा होता है। वो साबित कर गए कि असली हथियार बंदूकें नहीं, बल्कि हौसला होता है। और जब भी कर्गिल की बात होगी, इस नागा योद्धा की वो तस्वीर याद आएगी – बर्फ में नंगे पैर, लेकिन जिसका हौसला कभी नहीं डगमगाया। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे हीरोज की वजह से हम सुरक्षित हैं?

यह भी पढ़ें:

कैप्टन नीकेझाकू की शहादत – वो सवाल जो हर किसी के मन में हैं

1. कैप्टन नीकेझाकू कौन थे? असल में, उनकी कहानी क्या है?

देखिए, कैप्टन नीकेझाकू कोई साधारण जवान नहीं थे। सोचिए -10°C की बर्फीली ठंड में नंगे पांव चढ़ाई करना? और फिर पेट में गोली लगने के बाद भी लड़ते रहना? ये कोई हॉलीवुड फिल्म का सीन नहीं, बल्कि हमारे ही एक जवान की हकीकत है। ईमानदारी से कहूं तो, ऐसी बहादुरी की मिसालें किताबों में ही मिलती हैं।

2. शौर्य चक्र मिला था न? ये पुरस्कार कितना बड़ा होता है?

अरे भाई, शौर्य चक्र कोई स्कूल का मेडल थोड़े ही है! युद्ध के मैदान में जब कोई जवान अपनी जान की परवाह किए बिना कुछ ऐसा कर दिखाता है जो सामान्य इंसान की समझ से परे हो, तभी ये सम्मान मिलता है। कैप्टन नीकेझाकू ने सच में ये सम्मान अपने खून से कमाया था।

3. -10°C में नंगे पांव? ये कैसा पागलपन था?

तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये क्यों जरूरी था? दोस्तों, ये पागलपन नहीं था – ये था मिशन के प्रति commitment का वो स्तर जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। जब देश की सुरक्षा सवाल पर हो, तो comfort zone से बाहर निकलना ही पड़ता है। सच कहूं तो, हम में से कितने लोग ऐसी ठंड में बिना जूतों के 5 मिनट भी खड़े रह सकते हैं?

4. हमें इस शहादत से क्या सीखना चाहिए?

एक तरफ तो ये कहानी हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है। लेकिन दूसरी तरफ, ये हमें सिखाती है कि जिंदगी में कुछ पाने के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ती है। कैप्टन ने हमें बताया कि challenges से भागने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने की जरूरत होती है। और हां, ये सब सिर्फ किताबी बातें नहीं हैं – ये real life की सच्चाई है।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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