छत्रपति शिवाजी का ‘वाघ नख’ और RSS प्रमुख मोहन भागवत की ऐतिहासिक टिप्पणी
क्या आपने सुना? RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में छत्रपति शिवाजी के मशहूर हथियार ‘वाघ नख’ (Tiger Claws) को देखा। और सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि इस मौके पर उन्होंने शिवाजी की जो बातें कहीं, वो सुनने लायक हैं। उन्होंने न सिर्फ शिवाजी के युद्ध कौशल की तारीफ की, बल्कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक ऐतिहासिक चीज़ देखने की घटना थी, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा मैसेज छुपा है? मुझे लगता है, यह बहस सांस्कृतिक पहचान से लेकर राष्ट्रीय अस्मिता तक जाती है।
वाघ नख का ऐतिहासिक संदर्भ और भागवत की दृष्टि
देखिए, शिवाजी का ‘वाघ नख’ सिर्फ एक हथियार नहीं था। असल में, यह उनकी पूरी गुरिल्ला वॉरफेयर स्ट्रेटजी का प्रतीक था। और यही वजह है कि यह मराठा साम्राज्य के उत्थान में इतना अहम रहा। भागवत जी तो अक्सर शिवाजी को ‘हिंदू स्वाभिमान’ का प्रतीक बताते आए हैं। इस बार भी उन्होंने उनकी सैन्य प्रतिभा को सलाम किया। मगर साथ ही एक दिलचस्प बात कही – कि आज के भारत को शिवाजी के लीडरशिप से सीख लेनी चाहिए। और हाँ, संस्कृत को बढ़ावा देने की बात तो RSS का पुराना एजेंडा रहा ही है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
अब ज़ाहिर है, भागवत जी के इस बयान पर राजनीतिक हलकों में तूफ़ान आ गया। शिवसेना जैसे दल खुश हैं, तो विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे ‘इतिहास का राजनीतिकरण’ बताया है। मज़े की बात यह है कि इतिहासकारों का एक बड़ा वर्ग कह रहा है कि शिवाजी की विरासत को किसी एक पार्टी या विचारधारा की जागीर नहीं बनाया जाना चाहिए। सच कहूँ तो, यह बहस नई नहीं है, लेकिन अब गरमा गई है।
भविष्य की संभावनाएँ
तो अब आगे क्या? मेरी नज़र में, RSS इसके बाद शिवाजी को लेकर और प्रोग्राम्स ला सकता है। और संस्कृत को लेकर एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव की बहस तो शुरू हो ही चुकी है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। क्योंकि, आप जानते ही हैं – भारत में इतिहास और राजनीति का रिश्ता हमेशा से… खास रहा है।
निष्कर्ष
सच पूछो तो, भागवत जी की यह टिप्पणी सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है। यह हमारी भाषा, हमारी पहचान और हमारे राष्ट्रवाद से जुड़े बड़े सवाल उठाती है। और जैसा कि हम सब जानते हैं – यह बहस यहीं नहीं रुकने वाली। आने वाले दिनों में यह और गहराएगी, और हो सकता है कि हमारे सांस्कृतिक-राजनीतिक माहौल पर इसका गहरा असर पड़े। क्या आपको नहीं लगता?
छत्रपति शिवाजी का ‘वाघ नख’ और RSS प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी – जानिए सबकुछ
1. छत्रपति शिवाजी का ‘वाघ नख’ क्या है और इसका क्या महत्व है?
देखिए, ‘वाघ नख’ (Wagh Nakh) कोई साधारण हथियार नहीं था। सोचिए, एक तरह का tiger claw जिसे हाथ में पहनकर शिवाजी महाराज अपने दुश्मनों से लड़ते थे! असल में यह उनकी guerrilla warfare tactics का हिस्सा था – छुपकर हमला करना, जंगली बिल्ली की तरह। और है ना दिलचस्प बात? इसकी design इतनी unique थी कि दुश्मन को पता भी नहीं चलता था कि मार कहाँ से खाई है। एकदम ज़बरदस्त।
2. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ‘वाघ नख’ के बारे में क्या कहा?
अब RSS chief मोहन भागवत जी की बात करें तो… उन्होंने तो इसे सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि शिवाजी की सोच का प्रतीक बताया। सच कहूँ तो उनकी यह बात सही भी लगती है। क्योंकि ‘वाघ नख’ सिर्फ लड़ने का तरीका नहीं था, बल्कि यह दिखाता था कि कम संसाधनों में भी कैसे बड़े से बड़े दुश्मन को मात दी जा सकती है। आज के context में देखें तो यही तो हमें सीखना चाहिए, है न?
3. क्या ‘वाघ नख’ आज भी कहीं preserved है?
अरे हाँ! मजे की बात यह है कि इसका original piece आज भी London के Victoria and Albert Museum में सुरक्षित रखा हुआ है। पर सुनकर दुख होता है कि हमारी यह ऐतिहासिक धरोहर विदेश में पड़ी है। अच्छी खबर? भारत सरकार और कुछ संगठन इसे वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही यह हमारे देश लौट आएगा। वैसे, क्या आपको नहीं लगता कि ऐसी चीज़ें हमारे अपने संग्रहालयों में होनी चाहिए?
4. शिवाजी के ‘वाघ नख’ और आज के भारत के लिए इसकी क्या relevance है?
सुनिए, यह सिर्फ कोई museum piece नहीं है। अगर गहराई से सोचें तो ‘वाघ नख’ हमें बहुत कुछ सिखाता है। एक तरफ तो यह courage और smart strategy की मिसाल है। दूसरी तरफ, यह हमें याद दिलाता है कि resourcefulness और innovation कितनी ज़रूरी होती है। RSS chief की बात भी तो यही है न? आज के youth को शिवाजी से यही सीखना चाहिए – कैसे कम में ज्यादा करना है, कैसे दिमाग से लड़ाई लड़नी है। सच कहूँ तो, हमारे इतिहास में ऐसी ही प्रेरणाएँ छुपी हैं!
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com