छत्तीसगढ़ हथियार केस: NIA का बड़ा एक्शन, 5 माओवादियों पर चार्जशीट
देखिए न, छत्तीसगढ़ में एक बड़ा मामला सामने आया है। NIA ने बस्तर इलाके में हथियार और विस्फोटकों की तस्करी के केस में पांच माओवादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। असल में, ये आरोपी माओवादी संगठन को हथियार और जरूरत का सामान पहुंचाने का काम करते थे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए ये काफी बड़ी कामयाबी है, क्योंकि इससे माओवादियों की सप्लाई चेन पर बड़ा झटका लगा है।
पूरा मामला क्या है?
अब थोड़ा पीछे चलते हैं। बस्तर में पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा बलों की विशेष ऑपरेशन चल रही थी। और भईया, क्या काम किया उन्होंने! कई छापेमारी में माओवादियों के ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद हुए। लेकिन असली चौंकाने वाली बात ये रही कि इसमें एक पूरी सप्लाई चेन का पता चला – स्थानीय लोगों द्वारा माओवादियों तक हथियार पहुंचाने की पूरी कड़ी।
मैं तो कहूंगा, ये मामला सिर्फ हथियार बरामदगी से कहीं बड़ा है। ये तो माओवादियों को मिलने वाली बाहरी मदद के नेटवर्क को उजागर करता है। और यही इसकी सबसे बड़ी अहमियत है।
अब तक क्या हुआ?
तो NIA ने UAPA और IPC की कई धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। ज्यादातर आरोपी स्थानीय समर्थक हैं जो माओवादियों तक हथियार पहुंचाते थे। अब एजेंसी के पास क्या-क्या सबूत हैं? मोबाइल डेटा, गवाहों के बयान, और जब्त किया गया सामान। यानी केस काफी मजबूत दिख रहा है।
किसका क्या रिएक्शन?
NIA तो अपनी कामयाबी पर खुश है – उनका कहना है ये माओवाद के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार इसे अपनी सफलता बता रही है, जबकि विपक्ष कह रहा है कि माओवाद की जड़ें अभी भी गहरी हैं। स्थानीय लोग? उनके लिए तो ये राहत की बात है, क्योंकि वो सालों से माओवादियों के अत्याचार झेल रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब कोर्ट प्रोसेस शुरू होगी – गिरफ्तारी, जमानत, ट्रायल सब पर फैसले होंगे। पर मुझे लगता है ये तो सिर्फ शुरुआत है। सुरक्षा बलों ने तो माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज करने की योजना बना ली है। और छत्तीसगढ़ सरकार? वो अब इन इलाकों में विकास योजनाओं पर जोर देगी, ताकि लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
सच कहूं तो ये मामला दिखाता है कि छत्तीसगढ़ में माओवाद की समस्या कितनी गहरी है। लेकिन ये सुरक्षा बलों की एक बड़ी जीत भी है। और हो सकता है, ये आने वाले दिनों में माओवाद के खिलाफ लड़ाई में टर्निंग प्वाइंट साबित हो।
छत्तीसगढ़ हथियार केस में NIA की चार्जशीट ने सचमुच हलचल मचा दी है। देखा जाए तो यह सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सरकार की ‘नो मेरसी’ पॉलिसी का साफ संकेत है। अब सवाल यह है कि क्या यह सच में बड़े fish को पकड़ पाएगी? या फिर हमेशा की तरह छोटे-मोटे लोग ही फंसेंगे?
हालांकि, एक बात तो तय है – सुरक्षा एजेंसियों ने इस केस में जिस तरह की सतर्कता दिखाई है, वह काबिले-तारीफ है। आतंकवाद के खिलाफ zero tolerance की बातें तो हर कोई करता है, लेकिन यहाँ action भी दिख रहा है। ईमानदारी से कहूँ तो, ऐसे cases हमें याद दिलाते हैं कि हमारी सुरक्षा कितनी नाज़ुक है।
और हाँ, updates के लिए बने रहिए। क्योंकि यह केस अभी गरमा ही रहा है। जैसे-जैसे नए खुलासे होंगे, हम आप तक पहुँचाते रहेंगे। क्या पता, अगले कुछ दिनों में कुछ ऐसा सामने आए जो सबके होश उड़ा दे!
सच कहूँ तो, ऐसे मामलों पर नज़र रखना उतना ही ज़रूरी है जितना कि अपने घर का CCTV चेक करना। सुरक्षा का सवाल है न!
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

