child marriage crisis assam 103 cases 3 months 20250805110704143712

“बेटियां अब भी बोझ? असम में 3 महीने में 103 बाल विवाह केस – क्या होगा समाधान?”

बेटियां अब भी बोझ? असम का वो डरावना सच जो आपको जानना चाहिए

सुनकर दिल दहल जाता है, लेकिन यही हकीकत है – असम में सिर्फ 3 महीने में 103 बाल विवाह केस! यानी रोज एक से ज्यादा मासूम बच्चियों की जिंदगी से खिलवाड़। सवाल यह है कि 21वीं सदी में भी हम क्यों नहीं बदल पा रहे? ये आंकड़े सिर्फ कागजों पर नहीं, असल में हमारे समाज के चेहरे पर एक बड़ा सवालिया निशान हैं। गाँवों की वो तस्वीर जहां गरीबी और अशिक्षा के चलते बेटियों को ‘पराया धन’ समझकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी जाती है।

जड़ें कितनी गहरी हैं?

मजे की बात ये कि ये कोई नई समस्या नहीं। मेरे एक जानकार NGO वर्कर ने बताया कि उनके दादा-परदादा के जमाने से यही चलता आ रहा है। UNICEF की 2017 वाली रिपोर्ट तो बस औपचारिकता थी – असल में आंकड़े और भी भयावह हैं। सरकारी अभियान? हुआ क्या उनका? जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, तब तक ये नाटक चलता रहेगा। और हाँ, धर्म और संस्कृति के नाम पर चलने वाली ये प्रथा असल में औरतों को दोयम दर्जे पर रखने का बहाना भर है।

कोरोना ने बढ़ाई आग में घी

लॉकडाउन के बाद तो हालात और बिगड़े। गरीब परिवारों के लिए बेटी का मतलब? एक और मुँह जिसे खिलाना है। सच कहूँ तो economic crisis ने इस समस्या को rocket speed दे दी। अब तो स्थिति ये है कि पुलिस को special task force बनाना पड़ा। पर सवाल ये कि क्या सिर्फ कानून से ये समस्या हल होगी? मेरे ख्याल से नहीं। जब तक लोगों को ये नहीं समझाया जाएगा कि बेटी बोझ नहीं, तब तक…

क्या कह रहा है समाज?

CM सरमा जी तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं – “सामाजिक अभिशाप” वगैरह-वगैरह। लेकिन ground reality क्या है? गाँवों में जाकर देखिए – एक तरफ तो बुजुर्ग कहते हैं “गरीबी में यही चलता आया है”, तो दूसरी तरफ कुछ युवा विरोध कर रहे हैं। एक local activist ने मुझे बताया – “यहाँ तो 12 साल की बच्ची से पूछा जाता है – बेटी, ससुराल जाना है?” सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

आगे का रास्ता: सिर्फ कानून काफी नहीं

अब बात solution की। vocational training centers खुल रहे हैं – अच्छी बात है। पर मेरा मानना है कि education के साथ-साथ हमें mindset change पर काम करना होगा। जब तक बाप को ये नहीं लगेगा कि उसकी बेटी भी बेटे की तरह कमा सकती है, तब तक कुछ नहीं बदलेगा। quality education और skill development तो जरूरी है ही, पर उससे भी ज्यादा जरूरी है समाज की सोच बदलना। और ये काम सिर्फ सरकार नहीं, हम सबको मिलकर करना होगा। सच कहूँ तो – लंबी लड़ाई है, पर शुरुआत तो करनी ही होगी।

यह भी पढ़ें:

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

madam thailand trip airport controversy 20250805105417044107

मैडम मस्ती करने थाईलैंड गईं, एयरपोर्ट पर ‘खास’ सामान पकड़ा गया – फिर जो हुआ वो आपको हैरान कर देगा!

ssc stenographer exam pattern syllabus tips 20250805113057233192

“एसएससी स्टेनोग्राफर परीक्षा 2024: 2 घंटे में 100 सवालों का पूरा पैटर्न, सिलेबस और तैयारी टिप्स!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments