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चीनी बायोटेक शेयर्स में तेजी: बिग फार्मा कैंसर उपचार के लिए लाइसेंसिंग कर रहा है

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चीनी बायोटेक शेयर्स में धमाल: क्या Big Pharma ने आखिरकार चीन को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है?

अरे भाई, इस साल तो चीनी बायोटेक कंपनियों ने जैसे जादू कर दिया है! 60% से ज्यादा का उछाल? सच में? ये सब कैंसर ट्रीटमेंट्स के लिए हो रही लाइसेंसिंग डील्स का असर है। Big Pharma वालों को लगता है कि चीन की टेक्नोलॉजी अब सस्ती ही नहीं, बल्कि क्वालिटी में भी टॉप-नॉच है। और सच कहूं तो, निवेशक भी अब इसी बात पर दांव लगा रहे हैं।

सोचिए न, पिछले 5-6 सालों में चीन ने बायोटेक में कितना पैसा झोंक दिया है। खासकर कैंसर थेरेपी और gene editing जैसे फील्ड्स में। BeiGene, Innovent जैसी कंपनियां तो अब विदेशों में भी छा रही हैं। R&D में इनका जुनून देखकर तो लगता है कि ये लोग कुछ बड़ा करके दिखाएंगे। और लगता है विदेशी कंपनियों को भी यही लग रहा है!

अब ताजा क्या है? अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां चीनी बायोटेक के पीछे पागल हो रही हैं। Innovent के शेयर 70% ऊपर? BeiGene 50%? ये कोई मामूली बात नहीं है दोस्तों! निवेशक तो अब इसे ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ बता रहे हैं। पर सवाल यह है कि क्या ये ग्रोथ सच में सस्टेनेबल है?

एक्सपर्ट्स की क्या राय है? बायोटेक के जानकार मिंग ली कहते हैं – “चीन अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, इनोवेशन हब बन रहा है।” एक hedge fund मैनेजर ने तो यहां तक कहा – “अभी तो पार्टी शुरू हुई है!” पर मेरा मानना है कि इसमें रिस्क भी कम नहीं। अमेरिका-यूरोप के regulatory hurdles तो हैं ही।

तो कुल मिलाकर क्या कहें? अगर चीन इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब वो बायोफार्मा में अमेरिका को टक्कर देने लगेगा। और हां, कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए ये एक बड़ी उम्मीद की किरण भी है। पर याद रखिए – शेयर बाजार में जहां तेजी होती है, वहां मंदी का खतरा भी तो होता ही है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी!

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चीनी बायोटेक शेयर्स में यह अचानक उछाल क्यों?

देखिए, असल बात यह है कि बिग फार्मा वालों ने इन कंपनियों के साथ कैंसर ट्रीटमेंट्स के लिए डील्स साइन कर दी हैं। और भईया, जब कोई नॉवार्टिस या फाइजर जैसी कंपनी आपके साथ हाथ मिलाए, तो investors का उत्साह बढ़ना तो लाजमी है न? ये डील्स किसी बॉलीवुड स्टार की शादी की तरह हैं – सबकी नजरें ऊपर चढ़ जाती हैं!

क्या अभी पैसा लगाने का सही मौका है?

सच कहूं तो… हां, लेकिन। हां इसलिए कि लॉन्ग टर्म में ग्रोथ दिख रही है, लेकिन इसलिए कि शॉर्ट टर्म में तो ये शेयर आपका BP भी बढ़ा सकते हैं! मेरा सुझाव? थोड़ा रिसर्च तो कर ही लीजिए – कंपनी के फंडामेंटल्स देखिए, कुछ एक्सपर्ट्स की राय लीजिए। वैसे भी, शेयर बाजार कोई स्प्रिंट नहीं, मैराथन है भाई!

बिग फार्मा वालों को चीनी बायोटेक में ही दिलचस्पी क्यों?

अरे, सवाल तो जायज है! असल में चीनी कंपनियां कैंसर जैसी बीमारियों के लिए कुछ जबरदस्त इनोवेटिव ट्रीटमेंट्स लेकर आ रही हैं। और टेक्नोलॉजी? एकदम फर्स्ट क्लास। यही वजह है कि बिग प्लेयर्स इनके साथ पार्टनरशिप या लाइसेंसिंग डील्स करने पर मजबूर हो रहे हैं। समझिए जैसे कोई छोटी सी स्टार्टअप अचानक बड़ी कंपनी को अपनी टेक्नोलॉजी से हैरान कर दे!

भारतीय फार्मा कंपनियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

अच्छा सवाल पूछा! देखिए, हमारे देसी फार्मा वाले भी तो कोई कम नहीं। डॉ. रेड्डीज या सन फार्मा जैसी कंपनियां पहले से ही ग्लोबल पार्टनरशिप्स पर काम कर रही हैं। चीनी सफलता से प्रेरणा लेकर, हो सकता है हमारी कंपनियां भी कैंसर रिसर्च में ज्यादा इन्वेस्ट करने लगें। और फिर… वाह भई वाह! सेक्टर को नया जीवन मिल जाए।

एक बात और – क्या आपने नोटिस किया कि ये सारी डेवलपमेंट्स दिखाती हैं कि मेडिकल रिसर्च अब वाकई ग्लोबल विलेज बन चुका है? सोचने वाली बात है…

Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com

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