ट्रंप का 50% टैरिफ वाला बम: चीन का गुस्सा और दिल्ली में ‘बदमाश’ तक की बयानबाजी!
अरे भई, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो फिर से हंगामा खड़ा कर दिया! चीनी सामानों पर 50% टैरिफ की उनकी घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गरमा दिया है। और चीन? उनका तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इतना कि दिल्ली में बैठे चीनी राजदूत ने सीधे-सीधे अमेरिका को “बदमाश” तक कह डाला! अब ये बयान किसी राजनयिक भाषा से तो कोसों दूर है, लेकिन असल में यही तो दिखाता है कि मामला कितना गंभीर है। खासकर तब, जबकि मोदी-जिनपिंग मीटिंग की तैयारियां चल रही हैं।
पूरा माजरा समझें तो… ट्रंप अपने election campaign में फिर से चीन को निशाना बना रहे हैं। उनका कहना साफ है – अगर दोबारा राष्ट्रपति बने, तो चीनी सामान महंगा कर देंगे। पर ये कोई नई बात थोड़े ही है? अमेरिका और चीन का ये व्यापारिक झगड़ा तो सालों से चल रहा है। एक दूसरे पर टैरिफ लगाओ, प्रतिबंध लगाओ… ये सिलसिला चलता आ रहा है। लेकिन इस बार मसला और गंभीर इसलिए है क्योंकि भारत भी इसका हिस्सा बन गया है। तीनों देशों के बीच ये तिकड़म भरी राजनीति देखने लायक है!
अब जरा चीनी राजदूत के बयान पर गौर करें। दिल्ली में हुई press conference में उन्होंने अमेरिका को सीधे “बदमाश” कहा! साथ ही आरोप लगाया कि अमेरिका व्यापार युद्ध भड़का रहा है। है न मजेदार? क्योंकि भारत सरकार ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। पर राजनयिक गलियारों में ये चर्चा जरूर है कि मोदी-शी वार्ता से पहले ये कितना संवेदनशील मुद्दा बन सकता है। वहीं अमेरिका ने इस बयान को “असभ्य” बताकर ठुकरा दिया। सच कहूं तो, ये सब देखकर लगता है जैसे कोई राजनयिक धमाचौकड़ी चल रही हो!
अब सबकी प्रतिक्रियाएं देखिए न:
– चीन: “अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़े हैं!”
– अमेरिका: “चीन बेवजह आक्रामक हो रहा है!”
– भारत? अभी तक खामोश… पर हमारे विश्लेषक कह रहे हैं कि ये हमारे लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि हमें तो दोनों महाशक्तियों के साथ तालमेल बिठाना है। एक तरफ अमेरिका, दूसरी तरफ चीन। बीच में फंसे भारत की कहानी!
तो अब सवाल ये है कि आगे क्या? तीन बड़ी बातें:
1. मोदी-शी मीटिंग में ये मुद्दा उठ सकता है – खासकर जब चीन हमसे समर्थन चाहेगा
2. अमेरिकी elections का रिजल्ट बड़ा रोल खेलेगा – ट्रंप जीते तो आग लग जाएगी!
3. और सबसे जरूरी – भारत को बेहद सावधानी से चलना होगा। एक गलत कदम और… समझदारी की जरूरत है न?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात तो साबित कर दी – आजकल की वैश्विक राजनीति में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़ा विस्फोट कर सकती है। अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में भारत-चीन-अमेरिका के इस तिकोन में कौन किसके साथ खड़ा होता है। एकदम धमाकेदार स्थिति। सच में!
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चीन का अमेरिका पर गुस्सा तो समझ आता है – 50% टैरिफ, यानी सीधे-सीधे व्यापार में दखलंदाजी! लेकिन दिल्ली में उनके राजदूत का वो “बदमाश” वाला बयान? अरे भाई, ये क्या चल रहा है? मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत से ठीक पहले ये नई टेंशन… कुछ ज़्यादा ही संयोग लगता है, है न?
असल में, ये सिर्फ भारत-अमेरिका-चीन के उलझे हुए रिश्तों की ही बात नहीं। सोचिए, अगर ये टैरिफ वॉर चलता रहा तो Global Trade का क्या होगा? हम सब जानते हैं कि आजकल अर्थव्यवस्था एक जाल की तरह जुड़ी हुई है। एक तरफ़ तो चीन की चाल, दूसरी तरफ़ अमेरिका का दबाव… और बीच में फंसा भारत।
अब देखना ये है कि इस पूरे खेल में कौन बाज़ी मारेगा। कूटनीति की इस चालबाज़ी में… वैसे मेरी निजी राय? दिल्ली वाला बयान शायद जानबूझकर दिया गया था। क्या आपको नहीं लगता?
एक बात और – ये सब कुछ ऐसा है जैसे चेस का खेल। चाल… प्रतिचाल… और फिर कोई अचानक से शह और मात! लेकिन इस बार दांव पर सिर्फ़ कुछ देशों की नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था लगी है। सच कहूं तो, थोड़ा डरावना भी है।
ट्रंप का 50% टैरिफ और चीन-अमेरिका की तनातनी – समझिए पूरा माजरा
1. ट्रंप का ये 50% टैरिफ (tariff) वाला प्रस्ताव क्या बला है? और चीन इतना गुस्सा क्यों है?
देखिए, ट्रंप साहब ने फिर से एक बम फोड़ दिया है! चीन से आने वाले सामान पर 50% टैरिफ लगाने की बात कर रहे हैं। अब सवाल ये है कि क्या ये अमेरिका-चीन के बीच चल रही trade war को और हवा देगा? चीन का गुस्सा समझा जा सकता है – उनका पूरा export business ही तो धरा का धरा रह जाएगा। सोचिए, आधा पैसा सीधे अमेरिका के खजाने में चला जाएगा!
2. चीनी राजदूत ने अमेरिका को “बदमाश” कहा – ये क्या माजरा है?
अरे भई, दिल्ली में तो बवाल हो गया! चीन के राजदूत ने सीधे-सीधे अमेरिकी टैरिफ नीतियों को “बदमाशी” बता दिया। असल में देखा जाए तो ये चीन की बेबसी ही तो है। लगातार economic pressure झेलते-झेलते उनका धैर्य जवाब दे गया। पर सच कहूँ तो, इतना strong reaction देकर क्या वो खुद ही अपनी frustration जाहिर नहीं कर रहे?
3. क्या ये सब मोदी-शी की मुलाकात पर पानी फेर देगा?
अब ये दिलचस्प सवाल है! हालांकि भारत-चीन relations के लिए ये एक अहम मोड़ हो सकता है। मोदी और शी जिनपिंग जब मिलेंगे, तो ये मुद्दा ज़रूर उभरेगा। क्योंकि भारत भी तो अमेरिका के साथ गले तक trade relations में डूबा हुआ है। एक तरफ दोस्ती, दूसरी तरफ व्यापार – बड़ी उलझन है न?
4. भारत के लिए इसका क्या मतलब है? फायदा या नुकसान?
ईमानदारी से कहूं तो, ये सिक्के के दो पहलू जैसा है। एक तरफ हमारे exporters को मौका मिल सकता है – चीनी सामान महंगा होगा तो हमारा माल बिकेगा। लेकिन दूसरी तरफ… अगर global trade war छिड़ गई तो? पूरी economy ही डगमगा सकती है। Experts तो अपनी रिपोर्ट्स लिखने में जुट गए हैं, पर असली असर तो वक्त ही बताएगा।
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com