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** “CJI गवई का बयान – ‘SC चीफ जस्टिस आधार नहीं… सुनहरे रथ का दूसरा पहिया किसे बताया?’ जानें पूरा विवाद”

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CJI गवई का बयान: “सुप्रीम कोर्ट सिर्फ चीफ जस्टिस की नहीं…” और फिर शुरू हुआ बहस!

अरे भई, सुप्रीम कोर्ट के CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ ने तो हाल ही में बम फोड़ दिया! एक ऐसा बयान दिया जिसने दिल्ली की गर्मी में भी न्यायिक गलियारों को गर्म कर दिया। असल में, उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट सिर्फ चीफ जस्टिस की कोर्ट नहीं हो सकती”। सुनने में तो ये साधारण सी बात लगती है, लेकिन जब आप गहराई में जाते हैं… वाह! मामला कुछ और ही समझ आता है। CJI साहब ने तो साफ-साफ कह दिया कि कोर्ट चलाने में वकीलों (बार) और जजों (बेंच) की भूमिका बराबर की होनी चाहिए। एक तरह से ये न्यायिक सिस्टम में टीम वर्क की तारीफ थी, है न?

पूरा माजरा क्या है?

देखिए, ये कोई नई बहस नहीं है। सालों से सुप्रीम कोर्ट में “चीफ जस्टिस-केंद्रित” सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं। मतलब क्या? मतलब ये कि CJI के पास केस किस जज के पास जाएगा ये तय करने का अधिकार… “मास्टर ऑफ द रोस्टर” वाला चक्कर। अब सोचिए, अगर एक ही व्यक्ति के हाथ में इतनी ताकत हो तो…? हालांकि कुछ लोग कहेंगे कि सिस्टम ऐसा ही चलता आया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सही है? क्या ये संतुलन बिगाड़ता है? ईमानदारी से कहूं तो मेरे ख्याल से…

CJI ने क्या कहा असल में?

तो सुनिए! CJI साहब ने एक कार्यक्रम में बड़ी दिलचस्प तुलना की। उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट सुनहरे रथ का दूसरा पहिया है, पहला पहिया तो वकील होते हैं”। सच कहूं तो ये बयान काफी साहसिक है। आप समझ गए होंगे – रथ तभी चलेगा जब दोनों पहिए साथ काम करेंगे। बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारे यहाँ कहते हैं “एक हाथ से ताली नहीं बजती”। पर सवाल ये है कि क्या सिर्फ बयान देने से काम चल जाएगा?

किसने क्या बोला? – प्रतिक्रियाओं का दंगल

अब ज़रा देखिए इस पर किसने क्या कहा! वरिष्ठ वकीलों ने तो मानो खुशी से झूम मार दी। इसे “सुधार की दिशा में पहला कदम” बता रहे हैं। कुछ पूर्व जज साहबान भी खुश नज़र आए। पर कुछ लोगों को ये सब “ढकोसला” लग रहा है। उनका कहना है कि CJI के पास अभी भी बहुत ज्यादा पावर है। और सच्चाई ये है कि… बयान देने से क्या होता है? असली बदलाव तो तब आएगा जब सिस्टम बदलेगा। आप क्या सोचते हैं?

आगे क्या? – भविष्य की गुत्थी

अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा? CJI के इस बयान के बाद शायद केस आवंटन में पारदर्शिता बढ़े। हो सकता है वकीलों को ज्यादा महत्व मिले। पर मैं तो यही कहूंगा – देखते हैं कितना बदलता है। क्योंकि हमारे यहाँ तो… आप जानते ही हैं न? बातें बड़ी-बड़ी होती हैं, पर अमल कम होता है। फिर भी, उम्मीद तो अच्छी ही रखनी चाहिए!

अंत में मेरी राय: CJI गवई का ये बयान वाकई तारीफ के काबिल है। पर जैसे मेरी दादी कहती थीं – “अच्छी बातें तो सब करते हैं, असली फर्क तब पड़ता है जब काम करके दिखाओ”। अब इंतज़ार है तो बस इस बात का कि ये बयान कितना अमल में आता है। आपको क्या लगता है – ये सिर्फ एक भाषण था या फिर सच में कुछ बदलाव आएगा?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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