10 महीने से भाग रहा ये शातिर आखिरकार पकड़ा गया – पर कैसे?
सोनीपत पुलिस ने आखिरकार एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। रोडवेज बस ड्राइवर तोख राज को गिरफ्तार कर लिया गया, जो पिछले 10 महीनों से पुलिस की नाक के नीचे से फरार था। है न मजेदार बात? ये वही आरोपी है जिस पर Flipkart के दो कर्मचारियों की हत्या का आरोप है। पुलिस ने फॉरेंसिक और टेक्नोलॉजी की मदद से उसे पकड़ा – और यकीन मानिए, ये कोई आसान काम नहीं था!
पूरा मामला क्या है? एक डरावनी कहानी
ये सब 10 महीने पहले सोनीपत में हुआ था। एक रोडवेज बस ने Flipkart के दो कर्मचारियों को कुचल दिया। इतनी भयानक टक्कर थी कि दोनों की तुरंत मौत हो गई। और ड्राइवर तोख राज? वो तो सीन से ही गायब हो गया! पुलिस ने मैनस्लॉटर का केस दर्ज किया, पर ये चालाक बन्दा हर बार पुलिस को चकमा देता रहा।
क्या आप जानते हैं? पुलिस ने कई बार उसके ठिकानों पर छापे मारे। लेकिन हर बार – अरे यार! – ये आदमी हाथ से निकल जाता था। अलग-अलग राज्यों में भागता फिरता था, नकली नामों से। सच में, एक फिल्मी स्टोरी लगती है न?
पकड़ा कैसे गया? मोबाइल और सोशल मीडिया ने पकड़वाया!
आखिरकार पुलिस ने मोबाइल ट्रैकिंग और सोशल मीडिया की मदद से इस शातिर को पकड़ ही लिया। पता चला कि ये झारखंड के एक सुनसान गाँव में छुपा बैठा था। सोनीपत पुलिस की स्पेशल टीम ने वहाँ रेड डालकर इसे धर दबोचा। और सुनिए – ये नकली आईडी बनाकर घूम रहा था! क्या बात है न?
गिरफ्तारी के बाद पता चला – इसने दाढ़ी बढ़ा ली थी, स्थानीय भाषा बोलने लगा था। पर भाई, टेक्नोलॉजी के आगे ये सब चल नहीं पाया। मोबाइल और सोशल मीडिया ने ही इसकी पोल खोल दी। टेक्नोलॉजी ने फिर एक बार साबित कर दिया कि आज के ज़माने में भागना मुश्किल है!
पीड़ित परिवार को मिली राहत, पर सवाल बाकी
इस गिरफ्तारी पर पुलिस खुश तो है, पर सवाल ये है कि इतना समय क्यों लगा? सोनीपत के डीएसपी ने कहा, “हमने टेक्नोलॉजी और स्थानीय सूत्रों की मदद से इसे पकड़ा। हमारी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि है।” वहीं पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली – “हमें न्याय मिलेगा, ये उम्मीद है।”
स्थानीय नेताओं ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। एक नेता ने तो सीधा सवाल खड़ा कर दिया – “क्या पुलिस को ऐसे मामलों में और तेजी नहीं दिखानी चाहिए?” सड़क सुरक्षा के नियमों पर भी सवाल उठे। कई लोगों ने कमर्शियल ड्राइवरों की सख्त जांच की मांग की।
अब आगे क्या? कोर्ट और जांच का सफर
अब तोख राज को कोर्ट में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसियां इससे पूछताछ करेंगी। दिलचस्प बात ये है कि पुलिस बस कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है – क्योंकि कहा जा रहा है कि कंपनी ने ड्राइवर की बैकग्राउंड चेक ठीक से नहीं की थी।
इस पूरे मामले ने सड़क सुरक्षा पर बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमर्शियल ड्राइवरों के लिए नियम और सख्त होने चाहिए। पर सवाल ये है – क्या सिर्फ नियम बनाने से काम चलेगा?
आखिरी बात: टेक्नोलॉजी और इंसानी दिमाग की जीत
ये केस साबित करता है कि टेक्नोलॉजी और पुलिस की मेहनत से कोई भी भाग नहीं सकता। अब सबकी नजर कोर्ट पर है – क्या पीड़ित परिवार को सच में न्याय मिलेगा? एक बात तो तय है – आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और मोबाइल ट्रैकिंग अपराधियों को पकड़ने का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। पर क्या ये काफी है? आपको क्या लगता है?
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com