रांची में पुलिस पर हमला: थार से कुचलने की कोशिश, PCR वैन तबाह!
रांची का जगन्नाथपुर इलाका रविवार रात एक ऐसी घटना का गवाह बना जिसने सबकी नींद उड़ा दी। सोचिए, अपराधी इतने बेखौफ कि पुलिसवालों पर सीधे हमला कर दें? और सिर्फ हमला ही नहीं, उन्हें गाड़ी से कुचलने की कोशिश तक! ये कोई फिल्म का सीन नहीं, असलियत है। थार SUV में सवार युवकों ने पुलिस की PCR वैन को जान-बूझकर टक्कर मारी – गाड़ी तो लगभग खत्म ही हो गई। एएसआई अनिल कुमार राम ने मामला दर्ज किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ एक केस नंबर बनकर रह जाएगा?
जगन्नाथपुर पहले से ही अपराधों के लिए बदनाम रहा है। पुलिस रात में patrolling भी करती है, मगर ये क्या… पुलिस पर ही हमला? ये तो किसी गैंगवार जैसा लगता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो ये कोई आम अपराध नहीं, बल्कि सीधे-सीधे पुलिस को चुनौती देने वाली एक्ट थी। सोचा-समझा प्लान। और देखिए न, हमलावरों ने सिर्फ गाड़ी ही नहीं तोड़ी, पुलिस की इज्जत पर भी सीधा वार किया।
हमला या कोई वार?
घटना का तरीका सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। थार SUV… वो भी पूरी रफ्तार में… सीधा PCR वैन पर टकराई। कल्पना कीजिए उस वक्त वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों की हालत! रविवार की रात को जब पूरा शहर सो रहा था, ये लोग patrolling कर रहे थे – और ये हादसा। अब पुलिस जाँच में जुटी है, पर सच कहूँ तो ये सिर्फ एक घटना नहीं, एक ट्रेंड की शुरुआत लगती है।
किसका सिर दर्द, किसकी नींद हराम?
इस एक घटना ने कई लोगों की नींद उड़ा दी है। पुलिस वाले तो चिंतित हैं ही, आम जनता भी डरी हुई है। पुलिस प्रवक्ता ने इसे “गंभीर” तो बताया, मगर असल सवाल ये है कि क्या वाकई ये सिस्टम की नाकामी है? वहीं स्थानीय लोगों का कहना है – “अब तो हद हो गई!” राजनीति वालों ने भी मौका नहीं गँवाया – विपक्ष सरकार पर कानून-व्यवस्था खराब होने का आरोप लगा रहा है। पर सच ये है कि ये खेल सिर्फ बयानबाजी का नहीं, लोगों की सुरक्षा का सवाल है।
अब आगे क्या?
पुलिस ने कुछ कदम उठाए हैं – CCTV footage चेक कर रहे हैं, गवाहों से पूछताछ हो रही है। मगर क्या ये काफी है? थाने में एक्स्ट्रा फोर्स की बात चल रही है, पर क्या सिर्फ पुलिस बढ़ाने से समस्या हल होगी? राजनीतिक दबाव के चलते जल्दबाजी में कोई एक्शन लिया जाएगा, मगर असली सवाल तो ये है कि क्या हम एक सिस्टमैटिक चेंज की तरफ बढ़ रहे हैं?
ये घटना सिर्फ रांची की नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है। पुलिसकर्मी खुद असुरक्षित महसूस करें, तो आम आदमी की सुरक्षा कैसे होगी? आने वाले दिनों में क्या कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, या फिर ये भी एक और केस फाइल में दर्ज होकर रह जाएगा? वक्त बताएगा। फिलहाल तो पुलिस और प्रशासन दोनों ही इस चुनौती से निपटने की कोशिश में जुटे हैं।
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अरे भाई, ये रांची वाला पुलिस हमला तो हर किसी की जुबान पर है न? तो चलिए, बिना किसी झंझट के सीधे बात करते हैं।
1. ये हमला हुआ कहाँ और कब? सच-सच बताओ!
देखो, बात [तारीख] की है। रांची के [लोकेशन] इलाके में अचानक हंगामा शुरू हो गया। मोब भीड़ ने PCR वैन को घेर लिया – पत्थरबाजी, शोर-शराबा, वाहन तोड़ने का नज़ारा… एकदम फिल्मी सीन जैसा। लेकिन ये कोई फिल्म नहीं, असलियत थी।
2. पुलिस वालों को कितना नुकसान हुआ? सीरियस है क्या?
बड़ी गंभीर बात है भाई। [संख्या] पुलिसकर्मी बुरी तरह जख्मी हुए। इतना बुरा हाल कि [हॉस्पिटल नाम] में भर्ती कराना पड़ा। सच कहूँ तो, ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं – कोई का बेटा, कोई का पिता घायल हुआ है।
3. क्या किसी को पकड़ा गया? या फिर सब फरार हैं?
अभी तक की खबरों के मुताबिक, पुलिस ने [संख्या] लोगों को पकड़ लिया है। FIR तो हो गई है, लेकिन investigation अभी चल रही है। वैसे CCTV फुटेज की मदद से और लोगों की तलाश जारी है। सच बताऊँ? पुलिस इस बार जल्दबाजी नहीं कर रही।
4. असली सवाल – भला ऐसा क्यों हुआ? कोई वजह?
असल में, प्राथमिक जाँच तो [कारण] की ओर इशारा कर रही है। हो सकता है पुलिस एक्शन की वजह से हो, कोई गैंग वॉर हो या फिर कोई पुराना विवाद। पर यकीन मानिए, अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है। जैसे-जैसे investigation आगे बढ़ेगी, नए तथ्य सामने आएँगे।
एक बात और – अगर आपके पास कोई जानकारी है तो पुलिस को जरूर बताएँ। आखिरकार, सुरक्षा हम सबकी साझा जिम्मेदारी है न?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

